सत्र 1
चेक-इन
(1 min)
सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।
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प्रार्थना करें
(5 min)
प्रार्थना के साथ शुरू करें । आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और परिवर्तन पवित्र आत्मा के बिना संभव नहीं है । इस सत्र में एक समूह की तौर पर उसे आपकी अगुवाई करने के लिए, उसे आमंत्रित करने में कुछ समय लें ।
अवलोकन
(1 min)
इस सत्र में, हम इन अवधारणाओं को सुनेंगे और उन पर चर्चा करेंगे:
- परमेश्वर आम लोगों को इस्तेमाल करता है
- शिष्य और कलीसिया की एक साधारण परिभाषा
- आत्मिक सांस लेना परमेश्वर की सुनना और आज्ञा पालन करना है
READ
(5 min)
परमेश्वर आम लोगों को इस्तेमाल करता है
ZÚME प्रशिक्षण में आपका स्वागत है। Zume 'खमीर' के लिए ग्रीक शब्द है ।
प्रभु यीशु हमें बताते हैं कि परमेश्वर का राज्य उस स्त्री की तरह है जिसने थोड़ा सा ' Zume ' लेकर बहुत सारे आटे में मिला दिया।
जैसे ही उसने मिश्रण में खमीर मिलाया, तो पूरा आटा खमीरा हो गया।
प्रभु यीशु हमें बता रहे थे कि एक साधारण व्यक्ति एक छोटा सी चीज को लेकर, बहुत बड़ा प्रभाव बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है!
हमारा सपना है वह करना जो प्रभु यीशु ने कहा है -दुनियाभर में साधारण लोगों की सहायता करना, परमेश्वर के राज्य में प्रभाव बनाने के लिए छोटे उपकरणों का इस्तेमाल करना!
प्रभु यीशु का अंतिम निर्देश उनके चेलों के लिए सरल था। उन्होंने कहा -- स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये---तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को शिष्य बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ और देखो मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ।
प्रभु यीशु की आज्ञा सरल थी - शिष्य बनाओ
यह कैसे करना है, इस बारे में उनका निर्देश बिल्कुल सरल है - जहॉं कही जाओ शिष्य बनाओ
- उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम में बपतिस्मा देकर शिष्य बनाओ
- उन्हें प्रभु यीशु की सब आज्ञाओं को मानना सीखाओ।
तो शिष्य बनाने के लिए क्या - क्या करना है?
- हम हर समय शिष्य बनाते है - हम जहाँ कहीं और जब भी जाते हैं
- जब कोई प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय लेता है - तो उन्हें बपतिस्मा देना चाहिए
- जब वे बढ़ते हैं - तो हमें हर शिष्य को सिखाना चाहिए कि प्रभु यीशु की सभी आज्ञाओं को कैसे मानना है।
क्योंकि उन्होंने शिष्य बनाने की एक आज्ञा दी है, इसका अर्थ है कि प्रभु यीशु के पीछे चलनेवाले हर शिष्य को यह सीखना जरूरी है कि शिष्य कैसे बनाया जाए।
उन चेलों ने शिष्य बनाना है। और उन चेलों ने भी शिष्य बनाना है।
चेलों को बढ़ाना। Zume इसी तरह से काम करता है।
यह खमीर की तरह है - जो सारे आंटे को खमीर बना देता है।
जब प्रभु यीशु ने आज्ञा दी की जाकर शिष्य बनाओ, तो उन्होंने यह वायदा भी किया है।
प्रभु यीशु ने कहा है - मैं हमेशा तुम्हारे संग रहूँगा। जगत के अंत तक।
प्रभु यीशु के हर चेलों को इस वायदे पर विश्वास करना चाहिए कि प्रभु यीशु हमेशा हमारे संग हैं। क्योंकि वह संग हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि प्रभु यीशु के हर शिष्य को इस तथ्य के प्रति समर्पित होना चाहिये कि प्रभु यीशु चाहते हैं कि हम सब शिष्य बनाएं। क्योंकि वह ऐसा ही करते हैं।
प्रभु यीशु ने कहा - स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओ और शिष्य बनाओ।
जब प्रभु यीशु हमें भेजते है तब जिस अधिकार पर वह यकीन करते हैं - वह उनका अधिकार है।
प्रभु यीशु कहते हैं कि इससे बड़ा कोई अधिकार नहीं है।
किसी भी परंपरा में इससे बड़ा अधिकार नहीं है।
किसी भी संस्कृति में इससे बड़ा अधिकार नहीं है।
पृथ्वी पर किसी भी नियम में इससे बड़ा अधिकार नहीं है।
प्रभु यीशु ने कहा - जाओ और शिष्य बनाओ।
और Zume की तरह - खमीर की तरह - हम लगातार बढ़ते रहेंगे, जब तक कि काम पूरा न हो जाए।
चर्चा करें
(10 min)
- यदि यीशु चाहते है की उसके हर अनुयायी उसके महान आदेश (ग्रेट कमीशन) का पालन करें, तो फिर वास्तव में क्यों कुछ थोड़े ही लोग शिष्य बनाते हैं?
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(5 min)
शिष्य और चर्च
Zume प्रशिक्षण में आपका स्वागत है। इस सभा में, हम शिष्य और चर्च के बारे में बात करेंगे। शिष्य कौन है? और आप शिष्य बनाते कैसे हैं?
प्रभु यीशु के शिष्य को आप उनकी सभी आज्ञाएँ कैसे मानना सीखाओगे?
आप एक ऐसे व्यक्ति को परमेश्वर के राज्य का नागरिक बनने के लिए सक्षम बनाते हैं जो दुनिया के बंधन में जी रहा था?
'शिष्य' शब्द का अर्थ है - एक अनुयायी। तो एक शिष्य परमेश्वर का अनुयायी होता है। प्रभु यीशु ने कहा - स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। तो परमेश्वर के राज्य में, प्रभु यीशु हमारे राजा हैं। हम उनके नागरिक हैं, और उनकी इच्छा के अधीन हैं। उनकी इच्छा, उद्देश्य, अभिप्राय, प्राथमिकताएँ और मूल्य उच्चतम और सर्वश्रेष्ठ हैं। उनका वचन नियम है। तो राज्य का नियम क्या है? प्रभु यीशु अपने नागरिकों को क्या करने के लिए कहते हैं?
प्रभु यीशु ने कहा - अपने पूरे मन, प्राण और शक्ति से अपने प्रभु परमेश्वर से प्रेम करना। प्रभु यीशु ने कहा - अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना। प्रभु यीशु ने कहा कि पुराने नियम में परमेश्वर की आज्ञाएँ - सारे नियम और भविष्यवक्ता - इन दो चीजों में समाविष्ट हो सकते हैं - परमेश्वर से प्रेम करो और लोगों से प्रेम करो। प्रभु यीशु ने कहा - शिष्य बनाओ। प्रभु यीशु ने कहा - जो कुछ मैंने आज्ञा दी है उन्हें मानना सिखाओ।
शिष्य बनाते समय उन्हें प्रभु यीशु की सभी आज्ञाओं को सिखाना पड़ता है - नया नियम इस एक चीज में समाविष्ट हो सकता है - शिष्य बनाओ।
एक शिष्य प्रभु यीशु का एक अनुयायी है जो परमेश्वर से प्रेम करता है, लोगों से प्रेम करता है और शिष्य बनाता है ।
तो एक चर्च क्या है?
शायद आप चर्च को एक इमारत समझते हैं - एक ऐसा स्थान जहाँ आप जाते हैं। लेकिन परमेश्वर का वचन चर्च को लोगों का इकट्ठा होना कहता है - ऐसे लोग जिसमें आप शामिल हैं।
बाईबल में "चर्च" शब्द का इस्तेमाल तीन अलग-अलग तरीकों से किया गया है:
- सार्वभौमिक चर्च - सभी लोग जो प्रभु यीशु के शिष्य थे, हैं और बनेंगे।
- शहर या क्षेत्रीय चर्च - सभी लोग जो प्रभु यीशु के शिष्य हैं और दुनिया के किसी भी क्षेत्र में या इसके आस-पास रहते हैं।
- घर पर चर्च - जो प्रभु यीशु के शिष्य हैं वे सभी लोग और वहाँ पर मिलते हैं जहाँ उनके बीच एक या एक से ज्यादा लोग रहते हैं।
एक आत्मिक परिवार - प्रभु यीशु के शिष्य जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं, लोगों से प्रेम करते हैं और शिष्य बनाते हैं और जो स्थानीय रूप से मिलते हैं, वह यह अंतिम चर्च है - घर पर चर्च या साधारण चर्च।
जब इन साधारण चर्च के समूह कुछ बड़ा करने के लिए इकट्ठा होते हैं, तो वे साथ मिलकर एक शहर या क्षेत्रीय चर्च बना सकते हैं।
ये सभी साधारण चर्च जो इस क्षेत्र से जुडे होते हैं और पूरे इतिहास में फैले हुए हैं, ये सभी मिलकर सार्वभौमिक चर्च बनाते हैं।
इस चर्च को अंग्रेजी अक्षर "C" से दर्शाते हैं
**साधारण चर्च आत्मिक परिवार है, प्रभु यीशु उनके केंद्र और उनके राजा हैं। **
साधारण चर्च आत्मिक परिवार है जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं, दूसरों से प्रेम करते हैं और शिष्य बनाते हैं, जो बढ़ाते हैं। कुछ चर्च के पास ईमारतें और प्रोग्राम और पैसा और कर्मचारी हैं। लेकिन साधारण चर्च को परमेश्वर से प्रेम करने, दूसरों से प्रेम करने और शिष्य बनाने - जो बढ़ते जाते हैं - इत्यादि के लिए इन चीजों की जरुरत नहीं है। क्योंकि कुछ भी अतिरिक्त चीजें किसी चर्च को और ज्यादा जटिल बना देती हैं और इसका बढ़ना मुश्किल कर देती है, इसलिए हमारा प्रशिक्षण ईमारतों, प्रोग्राम और पैसा और कर्मचारी को शहर या प्रदेश चर्च तक सीमित रखता है, जो कि साधारण चर्च के बढ़ने से बना है।
याद रखिये "Zume" का अर्थ है 'खमीर"एक सरल एवं एकमात्र घटक जो तुरंत अपने जैसा उत्पन्न करता है।
Zume प्रशिक्षण के साथ - हम उस खमीर की तरह बन जाएँगे - जो सरल और बढ़नेवाला हो। लेकिन आईये बढ़ने से पहले इस बात पर ध्यान देते हैं कि परमेश्वर क्या उत्पन्न करवाना चाहते हैं। क्योंकि बढ़ोत्तरी अच्छी हो सकती है - लेकिन हमेशा नहीं होती। कैंसर बढ़ोत्तरी है। और यह प्राणघातक है। तो हम कैसे जीवन को उत्पन्न करते हैं और मृत्यु को नहीं? और हम कैसे सुनिश्चित करते हैं कि हम दोबारा उत्पन्न करने वाले योग्य शिष्य हैं?
चर्चा करें
(10 min)
- जब आप एक चर्च के बारे में सोचते हैं, तो आपके मन में क्या आता है?
- उस चित्र और इस वीडियो में वर्णित जो “साधारण चर्च” है, इन दोनों में क्या अंतर हैं?
- आपके विचारानुसार गुणात्मक रीती से बढ़ने के लिए कौन सा आसान रहेगा और क्यों?
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(5 min)
परमेश्वर की सुनना और उसका आज्ञा पालन करना
Zume प्रशिक्षण में आपका स्वागत है। हम इस सत्र में परमेश्वर से सुनने और जो सुनते हैं उसे करने के बारे में बात करेंगे।
श्वास लेना जीवन है। हम श्वास अंदर लेते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते हैं। जीवन।
श्वास लेना परमेश्वर के राज्य में उतना ही महत्वपूर्ण है। वास्तव में परमेश्वर अपने आत्मा को - "श्वास" कहते हैं
परमेश्वर राज्य में, जब हम परमेश्वर की बात सुनते हैं, तो श्वास अंदर लेते हैं। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम उनके वचन के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - बाईबल। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - उनके साथ हमारी बातचीत। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम उनकी देह के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - चर्च, प्रभु यीशु के अन्य शिष्य। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम उनके कामों के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - घटनाऍं, अनुभव और सताव और कष्ट जिनसे वह अपने बच्चों को गुजरने देते हैं।
परमेश्वर के राज्य में हम श्वास बाहर छोड़ते हैं, जब हम परमेश्वर की बात पर कार्य करते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते हैं जब हम आज्ञा मानते हैं।
कभी कभी आज्ञा मानने के लिए श्वास बाहर छोड़ने का अर्थ है अपने विचारों, अपने शब्दों या अपने कार्यों को बदलना, उन्हें प्रभु यीशु और उनकी इच्छा के साथ मेल में लाने के लिए।
कभी कभी आज्ञा मानने के लिए श्वास बाहर छोड़ने का अर्थ है उसे बाँटना जो प्रभु यीशु ने हमारे साथ बाँटा है - उसे देना जो उन्होंने हमें दिया है - ताकि दूसरे भी आशीष पाएं, जैसा कि परमेश्वर हमें आशीष देते हैं।
प्रभु यीशु के एक शिष्य के लिए - इस श्वास अंदर लेना और बाहर छोड़ना महत्वपूर्ण है। यह हमारा जीवन है।
प्रभु यीशु ने कहा - पुत्र अपने आपसे कुछ नहीं कर सकता। जो वह पिता को करते हुए देखता है, वही करता है। जो कुछ पिता करता है, वही पुत्र भी करता है।
प्रभु यीशु ने कहा - मैं अपने अधिकार से बात नहीं करता। पिता जिसने मुझे भेजा है, उसने मुझे आज्ञा दी है कि क्या कहना है और कैसे कहना है।
प्रभु यीशु ने कहा है कि जो शब्द उन्होंने कहे और हर कार्य जो उन्होंने किया, वह परमेश्वर से सुनने और उनकी आज्ञा मानने पर आधारित है।
श्वास अंदर लेना - परमेश्वर की बात सुनना। श्वास बाहर छोड़ना - जो आप सुनते हैं उसकी आज्ञा मानना और दूसरों के साथ इसे बाँटना।
प्रभु यीशु ने कहा कि उनके शिष्य भी परमेश्वर की बातें सुनेंगे, उनके पवित्र आत्मा की सहायता से - उनका श्वास - जो उनके हर शिष्य को दिया जाएगा।
प्रभु यीशु ने कहा - सहायक, पवित्र आत्मा, जिसे पिता मेरे नाम में भेजेंगे, वह तुम्हें सारी बातें सीखाएगा और मेरी सारी बातें स्मरण कराएगा।
श्वास अंदर लेना - परमेश्वर की बात सुनना। श्वास बाहर छोड़ना - जो आप सुनते हैं उसकी आज्ञा मानना और दूसरों के साथ इसे बाँटना।
प्रभु यीशु हमें दिखा रहे थे कि कैसे जीते हैं।
तो हम परमेश्वर की आवाज को कैसे सुनते हैं? हम कैसे जानेंगे कि आज्ञा कैसे माननी है?
प्रभु यीशु ने अपने आपको "अच्छा चरवाह" कहा है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को उनकी "भेंड़" कहा है। प्रभु यीशु ने कहा - मेरी भेंड़ मेरी आवाज सुनती है, और मैं उन्हें जानता हूँ और वे मेरे पीछे चलती हैं। प्रभु यीशु ने कहा - जो कोई परमेश्वर का है वह परमेश्वर की बातें सुनता है। तुम नहीं सुनते क्योंकि तुम परमेश्वर के नहीं हो।
प्रभु यीशु के शिष्यों के रूप में, हमें उनकी आवाज सुनने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिये।
- हम शांत रहकर उनकी आवाज को सुनते हैं।
- प्रभु यीशु पर ध्यान केंद्रित करने के द्वारा हम उनकी आवाज को सुनते हैं।
- हम अपने विचारों में, अपने दर्शन में, अपनी भावनाओं में और प्रभाव में उनकी आवाज को सुनते हैं।
- जब हम सुनकर लिखते हैं और परखते हैं तब हम उनकी आवाज को सुनते हैं।
हर आवाज, हर विचार, हर दर्शन, भावना या प्रभाव परमेश्वर की आवाज नहीं है। कभी कभी यह शत्रु की आवाज होती है। प्रभु यीशु ने कहा हमारा शत्रु झूठा है और झूठ का बाप है। प्रभु यीशु ने कहा हमारा शत्रु चुराने, घात करने और नष्ट करने के लिए आता है।
लेकिन परमेश्वर कहते हैं कि हम उनकी आवाज सुनेंगे और हमें पता होगा जब वह हमसे बात करते हैं। अभ्यास और प्रार्थना के द्वारा, हम परमेश्वर की आवाज को बेहतर जान सकते हैं। हम यह जानना सीख सकते हैं कि जो हम सुनते हैं वह परमेश्वर की आवाज है या कोई दूसरी आवाज है।
जो हम सुनते हैं उसे परखने के कुछ तरीके हैः
- जब प्रभु यीशु बोलते हैं - तब उनकी आवाज हमेशा उनके लिखे वचनों - यानि बाईबल - के साथ मेल खाएगी जिसे हमें पहले ही बता दिया गाया है। उनकी बोली गई आवाज उनकी लिखी हुई आवाज के विरोध में कभी नहीं होगी।
- जब प्रभु यीशु बात करते हैं - तब उनकी आवाज हमारे हृदय को आशा और शांति का एक एहसास प्रदान करेगी। उनकी आवाज हमपर दोष नहीं लगाएगी या हमें निराश नहीं करेगी। प्रभु यीशु दोष नहीं लगाते हैं। प्रभु यीशु प्रेम में सुधारते हैं।
- प्रभु यीशु की आवाज शरीर के कामों को नहीं दर्शायेगी - शारिरिक के दुष्कर्म और अशुद्धता, व्यभिचार, मूर्तिपूजा और काला जादू, नफरत और झगड़ा, ईष्या और क्रोध, स्वार्थ, असहमति, गुटबाजी और द्वेष, पिय्यकड़पन और रंगरेलियॉं। यें बातें परमेश्वर की आवाज की ओर से नहीं हैं।
- जब प्रभु यीशु बोलते हैं - तब उनकी आवाज परमेश्वर के आत्मा के फल को प्रकट करेगी - प्रेम और आनंद, शांति और धीरज, दया और भलाई, विश्वासयोग्यता, नम्रता और आत्म-संयम।
- जब प्रभु यीशु बोलते हैं - तो उनकी आवाज हमें आत्मविश्वास देती है ना कि संदेह। हम अपने अंदर ज्ञान और शांति का अनुभव करते हैं कि जो हम सुन रहे हैं, वह परमेश्वर की ओर से है। शायद हम एक ही बार में सबकुछ न सुन पायें। शायद हम उसका सिर्फ एक भाग सुन पायें जो हमें जानने की आवश्यकता है। लेकिन जो हम सुनते हैं वह दृढ़ होगा -वह बदलेगा नहीं।
प्रभु यीशु के हर शिष्य के लिए शुभ समाचार यह है कि जब हम श्वास अंदर लेते हैं और परमेश्वर से सुनते हैं और जब हम श्वास बाहर छोड़ते हैं और जो हम सुनते हैं उसकी आज्ञा मानते हैं और दूसरों को बताते हैं - तब परमेश्वर और भी स्पष्ट रूप से बात करेंगे।
उनकी श्वास हमसे भी ज्यादा निकलेगी।
तब हम और स्पष्ट रूप से उनकी आवाज सुन पाएंगे। हम उनकी आवाज को पहचानेंगे ना कि दूसरों की। हम दुनिया में उनके काम को देखेंगे और उनके साथ जुड़कर काम कर पायेंगे।
हम श्वास अंदर लेते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते हैं। जीवन।
चर्चा करें
(10 min)
- परमेश्वर की वाणी को सुनना और पहचानना सीखना क्यों जरूरी है?
- क्या प्रभु से सुनना और उसे प्रतिक्रिया देना वास्तव में श्वसन की तरह है? क्यों या क्यों नहीं?
अवलोकन
(1 min)
इस सत्र में सुनी गई अवधारणाएँ:
- परमेश्वर आम लोगों को इस्तेमाल करता है
- शिष्य और कलीसिया की एक साधारण परिभाषा
- आत्मिक सांस लेना परमेश्वर की सुनना और आज्ञा पालन करना है
NEXT STEP
आज्ञा पालन करें
इन परिभाषाओं को किसी मित्र के साथ साझा करने का अभ्यास करें और प्रभु से प्रार्थना करें कि वे आपके दिल और प्राण में गहराई से समा जाएँ। प्रभु से पूछें कि आप उन्हें किसके साथ साझा करें ऐसी उसकी इच्छा है।
साझा करें
प्रभु ने आपको जिन लोगों के साथ परिभाषाएँ साझा करने के लिए आपको कहा है, उनके साथ यह साझा करें। फिर उन्हें किसी और के साथ साझा करने के लिए तैयार करें।