Zúme Training Guidebook

10-Session Course

सत्र 1

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 5678

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना के साथ शुरू करें । आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और परिवर्तन पवित्र आत्मा के बिना संभव नहीं है । इस सत्र में एक समूह की तौर पर उसे आपकी अगुवाई करने के लिए, उसे आमंत्रित करने में कुछ समय लें ।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इन अवधारणाओं को सुनेंगे और उन पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • परमेश्वर आम लोगों को इस्तेमाल करता है
  • शिष्य और कलीसिया की एक साधारण परिभाषा
  • आत्मिक सांस लेना परमेश्वर की सुनना और आज्ञा पालन करना है
  • सोप्स (SOAPS) बाइबल पठन
  • जवाबदेही समूह

READ

(5 min)

परमेश्वर आम लोगों को इस्तेमाल करता है

ZÚME प्रशिक्षण में आपका स्वागत है। Zume 'खमीर' के लिए ग्रीक शब्द है ।

प्रभु यीशु हमें बताते हैं कि परमेश्वर का राज्य उस स्त्री की तरह है जिसने थोड़ा सा ' Zume ' लेकर बहुत सारे आटे में मिला दिया।

जैसे ही उसने मिश्रण में खमीर मिलाया, तो पूरा आटा खमीरा हो गया।

प्रभु यीशु हमें बता रहे थे कि एक साधारण व्यक्ति एक छोटा सी चीज को लेकर, बहुत बड़ा प्रभाव बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है!

हमारा सपना है वह करना जो प्रभु यीशु ने कहा है -दुनियाभर में साधारण लोगों की सहायता करना, परमेश्वर के राज्य में प्रभाव बनाने के लिए छोटे उपकरणों का इस्तेमाल करना!

प्रभु यीशु का अंतिम निर्देश उनके चेलों के लिए सरल था। उन्होंने कहा -- स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये---तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को शिष्य बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ और देखो मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ।

प्रभु यीशु की आज्ञा सरल थी - शिष्य बनाओ

यह कैसे करना है, इस बारे में उनका निर्देश बिल्कुल सरल है - जहॉं कही जाओ शिष्य बनाओ

  • उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम में बपतिस्मा देकर शिष्य बनाओ
  • उन्हें प्रभु यीशु की सब आज्ञाओं को मानना सीखाओ।

तो शिष्य बनाने के लिए क्या - क्या करना है?

  • हम हर समय शिष्य बनाते है - हम जहाँ कहीं और जब भी जाते हैं
  • जब कोई प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय लेता है - तो उन्हें बपतिस्मा देना चाहिए
  • जब वे बढ़ते हैं - तो हमें हर शिष्य को सिखाना चाहिए कि प्रभु यीशु की सभी आज्ञाओं को कैसे मानना है।

क्योंकि उन्होंने शिष्य बनाने की एक आज्ञा दी है, इसका अर्थ है कि प्रभु यीशु के पीछे चलनेवाले हर शिष्य को यह सीखना जरूरी है कि शिष्य कैसे बनाया जाए।

उन चेलों ने शिष्य बनाना है। और उन चेलों ने भी शिष्य बनाना है।

चेलों को बढ़ाना। Zume इसी तरह से काम करता है।

यह खमीर की तरह है - जो सारे आंटे को खमीर बना देता है।

जब प्रभु यीशु ने आज्ञा दी की जाकर शिष्य बनाओ, तो उन्होंने यह वायदा भी किया है।

प्रभु यीशु ने कहा है - मैं हमेशा तुम्हारे संग रहूँगा। जगत के अंत तक।

प्रभु यीशु के हर चेलों को इस वायदे पर विश्वास करना चाहिए कि प्रभु यीशु हमेशा हमारे संग हैं। क्योंकि वह संग हैं।

लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि प्रभु यीशु के हर शिष्य को इस तथ्य के प्रति समर्पित होना चाहिये कि प्रभु यीशु चाहते हैं कि हम सब शिष्य बनाएं। क्योंकि वह ऐसा ही करते हैं।

प्रभु यीशु ने कहा - स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओ और शिष्य बनाओ।

जब प्रभु यीशु हमें भेजते है तब जिस अधिकार पर वह यकीन करते हैं - वह उनका अधिकार है।

प्रभु यीशु कहते हैं कि इससे बड़ा कोई अधिकार नहीं है।

किसी भी परंपरा में इससे बड़ा अधिकार नहीं है।

किसी भी संस्कृति में इससे बड़ा अधिकार नहीं है।

पृथ्वी पर किसी भी नियम में इससे बड़ा अधिकार नहीं है।

प्रभु यीशु ने कहा - जाओ और शिष्य बनाओ।

और Zume की तरह - खमीर की तरह - हम लगातार बढ़ते रहेंगे, जब तक कि काम पूरा न हो जाए।

चर्चा करें

(10 min)

  1. यदि यीशु चाहते है की उसके हर अनुयायी उसके महान आदेश (ग्रेट कमीशन) का पालन करें, तो फिर वास्तव में क्यों कुछ थोड़े ही लोग शिष्य बनाते हैं?

READ

(5 min)

शिष्य और चर्च

Zume प्रशिक्षण में आपका स्वागत है। इस सभा में, हम शिष्य और चर्च के बारे में बात करेंगे। शिष्य कौन है? और आप शिष्य बनाते कैसे हैं?

प्रभु यीशु के शिष्य को आप उनकी सभी आज्ञाएँ कैसे मानना सीखाओगे?

आप एक ऐसे व्यक्ति को परमेश्वर के राज्य का नागरिक बनने के लिए सक्षम बनाते हैं जो दुनिया के बंधन में जी रहा था?

'शिष्य' शब्द का अर्थ है - एक अनुयायी। तो एक शिष्य परमेश्वर का अनुयायी होता है। प्रभु यीशु ने कहा - स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। तो परमेश्वर के राज्य में, प्रभु यीशु हमारे राजा हैं। हम उनके नागरिक हैं, और उनकी इच्छा के अधीन हैं। उनकी इच्छा, उद्देश्य, अभिप्राय, प्राथमिकताएँ और मूल्य उच्चतम और सर्वश्रेष्ठ हैं। उनका वचन नियम है। तो राज्य का नियम क्या है? प्रभु यीशु अपने नागरिकों को क्या करने के लिए कहते हैं?

प्रभु यीशु ने कहा - अपने पूरे मन, प्राण और शक्ति से अपने प्रभु परमेश्वर से प्रेम करना। प्रभु यीशु ने कहा - अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना। प्रभु यीशु ने कहा कि पुराने नियम में परमेश्वर की आज्ञाएँ - सारे नियम और भविष्यवक्ता - इन दो चीजों में समाविष्ट हो सकते हैं - परमेश्वर से प्रेम करो और लोगों से प्रेम करो। प्रभु यीशु ने कहा - शिष्य बनाओ। प्रभु यीशु ने कहा - जो कुछ मैंने आज्ञा दी है उन्हें मानना सिखाओ।

शिष्य बनाते समय उन्हें प्रभु यीशु की सभी आज्ञाओं को सिखाना पड़ता है - नया नियम इस एक चीज में समाविष्ट हो सकता है - शिष्य बनाओ।

एक शिष्य प्रभु यीशु का एक अनुयायी है जो परमेश्वर से प्रेम करता है, लोगों से प्रेम करता है और शिष्य बनाता है ।

तो एक चर्च क्या है?

शायद आप चर्च को एक इमारत समझते हैं - एक ऐसा स्थान जहाँ आप जाते हैं। लेकिन परमेश्वर का वचन चर्च को लोगों का इकट्ठा होना कहता है - ऐसे लोग जिसमें आप शामिल हैं।

बाईबल में "चर्च" शब्द का इस्तेमाल तीन अलग-अलग तरीकों से किया गया है:

  • सार्वभौमिक चर्च - सभी लोग जो प्रभु यीशु के शिष्य थे, हैं और बनेंगे।
  • शहर या क्षेत्रीय चर्च - सभी लोग जो प्रभु यीशु के शिष्य हैं और दुनिया के किसी भी क्षेत्र में या इसके आस-पास रहते हैं।
  • घर पर चर्च - जो प्रभु यीशु के शिष्य हैं वे सभी लोग और वहाँ पर मिलते हैं जहाँ उनके बीच एक या एक से ज्यादा लोग रहते हैं।

एक आत्मिक परिवार - प्रभु यीशु के शिष्य जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं, लोगों से प्रेम करते हैं और शिष्य बनाते हैं और जो स्थानीय रूप से मिलते हैं, वह यह अंतिम चर्च है - घर पर चर्च या साधारण चर्च।

जब इन साधारण चर्च के समूह कुछ बड़ा करने के लिए इकट्ठा होते हैं, तो वे साथ मिलकर एक शहर या क्षेत्रीय चर्च बना सकते हैं।

ये सभी साधारण चर्च जो इस क्षेत्र से जुडे होते हैं और पूरे इतिहास में फैले हुए हैं, ये सभी मिलकर सार्वभौमिक चर्च बनाते हैं।

इस चर्च को अंग्रेजी अक्षर "C" से दर्शाते हैं

**साधारण चर्च आत्मिक परिवार है, प्रभु यीशु उनके केंद्र और उनके राजा हैं। **

साधारण चर्च आत्मिक परिवार है जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं, दूसरों से प्रेम करते हैं और शिष्य बनाते हैं, जो बढ़ाते हैं। कुछ चर्च के पास ईमारतें और प्रोग्राम और पैसा और कर्मचारी हैं। लेकिन साधारण चर्च को परमेश्वर से प्रेम करने, दूसरों से प्रेम करने और शिष्य बनाने - जो बढ़ते जाते हैं - इत्यादि के लिए इन चीजों की जरुरत नहीं है। क्योंकि कुछ भी अतिरिक्त चीजें किसी चर्च को और ज्यादा जटिल बना देती हैं और इसका बढ़ना मुश्किल कर देती है, इसलिए हमारा प्रशिक्षण ईमारतों, प्रोग्राम और पैसा और कर्मचारी को शहर या प्रदेश चर्च तक सीमित रखता है, जो कि साधारण चर्च के बढ़ने से बना है।

याद रखिये "Zume" का अर्थ है 'खमीर"एक सरल एवं एकमात्र घटक जो तुरंत अपने जैसा उत्पन्न करता है।

Zume प्रशिक्षण के साथ - हम उस खमीर की तरह बन जाएँगे - जो सरल और बढ़नेवाला हो। लेकिन आईये बढ़ने से पहले इस बात पर ध्यान देते हैं कि परमेश्वर क्या उत्पन्न करवाना चाहते हैं। क्योंकि बढ़ोत्तरी अच्छी हो सकती है - लेकिन हमेशा नहीं होती। कैंसर बढ़ोत्तरी है। और यह प्राणघातक है। तो हम कैसे जीवन को उत्पन्न करते हैं और मृत्यु को नहीं? और हम कैसे सुनिश्चित करते हैं कि हम दोबारा उत्पन्न करने वाले योग्य शिष्य हैं?

चर्चा करें

(10 min)

  1. जब आप एक चर्च के बारे में सोचते हैं, तो आपके मन में क्या आता है?
  2. उस चित्र और इस वीडियो में वर्णित जो “साधारण चर्च” है, इन दोनों में क्या अंतर हैं?
  3. आपके विचारानुसार गुणात्मक रीती से बढ़ने के लिए कौन सा आसान रहेगा और क्यों?

READ

(5 min)

परमेश्वर की सुनना और उसका आज्ञा पालन करना

Zume प्रशिक्षण में आपका स्वागत है। हम इस सत्र में परमेश्वर से सुनने और जो सुनते हैं उसे करने के बारे में बात करेंगे।

श्वास लेना जीवन है। हम श्वास अंदर लेते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते हैं। जीवन।

श्वास लेना परमेश्वर के राज्य में उतना ही महत्वपूर्ण है। वास्तव में परमेश्वर अपने आत्मा को - "श्वास" कहते हैं

परमेश्वर राज्य में, जब हम परमेश्वर की बात सुनते हैं, तो श्वास अंदर लेते हैं। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम उनके वचन के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - बाईबल। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - उनके साथ हमारी बातचीत। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम उनकी देह के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - चर्च, प्रभु यीशु के अन्य शिष्य। हम श्वास अंदर लेते हैं जब हम उनके कामों के द्वारा परमेश्वर की बात सुनते हैं - घटनाऍं, अनुभव और सताव और कष्ट जिनसे वह अपने बच्चों को गुजरने देते हैं।

परमेश्वर के राज्य में हम श्वास बाहर छोड़ते हैं, जब हम परमेश्वर की बात पर कार्य करते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते हैं जब हम आज्ञा मानते हैं।

कभी कभी आज्ञा मानने के लिए श्वास बाहर छोड़ने का अर्थ है अपने विचारों, अपने शब्दों या अपने कार्यों को बदलना, उन्हें प्रभु यीशु और उनकी इच्छा के साथ मेल में लाने के लिए।

कभी कभी आज्ञा मानने के लिए श्वास बाहर छोड़ने का अर्थ है उसे बाँटना जो प्रभु यीशु ने हमारे साथ बाँटा है - उसे देना जो उन्होंने हमें दिया है - ताकि दूसरे भी आशीष पाएं, जैसा कि परमेश्वर हमें आशीष देते हैं।

प्रभु यीशु के एक शिष्य के लिए - इस श्वास अंदर लेना और बाहर छोड़ना महत्वपूर्ण है। यह हमारा जीवन है।

प्रभु यीशु ने कहा - पुत्र अपने आपसे कुछ नहीं कर सकता। जो वह पिता को करते हुए देखता है, वही करता है। जो कुछ पिता करता है, वही पुत्र भी करता है।

प्रभु यीशु ने कहा - मैं अपने अधिकार से बात नहीं करता। पिता जिसने मुझे भेजा है, उसने मुझे आज्ञा दी है कि क्या कहना है और कैसे कहना है।

प्रभु यीशु ने कहा है कि जो शब्द उन्होंने कहे और हर कार्य जो उन्होंने किया, वह परमेश्वर से सुनने और उनकी आज्ञा मानने पर आधारित है।

श्वास अंदर लेना - परमेश्वर की बात सुनना। श्वास बाहर छोड़ना - जो आप सुनते हैं उसकी आज्ञा मानना और दूसरों के साथ इसे बाँटना।

प्रभु यीशु ने कहा कि उनके शिष्य भी परमेश्वर की बातें सुनेंगे, उनके पवित्र आत्मा की सहायता से - उनका श्वास - जो उनके हर शिष्य को दिया जाएगा।

प्रभु यीशु ने कहा - सहायक, पवित्र आत्मा, जिसे पिता मेरे नाम में भेजेंगे, वह तुम्हें सारी बातें सीखाएगा और मेरी सारी बातें स्मरण कराएगा।

श्वास अंदर लेना - परमेश्वर की बात सुनना। श्वास बाहर छोड़ना - जो आप सुनते हैं उसकी आज्ञा मानना और दूसरों के साथ इसे बाँटना।

प्रभु यीशु हमें दिखा रहे थे कि कैसे जीते हैं।

तो हम परमेश्वर की आवाज को कैसे सुनते हैं? हम कैसे जानेंगे कि आज्ञा कैसे माननी है?

प्रभु यीशु ने अपने आपको "अच्छा चरवाह" कहा है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को उनकी "भेंड़" कहा है। प्रभु यीशु ने कहा - मेरी भेंड़ मेरी आवाज सुनती है, और मैं उन्हें जानता हूँ और वे मेरे पीछे चलती हैं। प्रभु यीशु ने कहा - जो कोई परमेश्वर का है वह परमेश्वर की बातें सुनता है। तुम नहीं सुनते क्योंकि तुम परमेश्वर के नहीं हो।

प्रभु यीशु के शिष्यों के रूप में, हमें उनकी आवाज सुनने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिये।

  • हम शांत रहकर उनकी आवाज को सुनते हैं।
  • प्रभु यीशु पर ध्यान केंद्रित करने के द्वारा हम उनकी आवाज को सुनते हैं।
  • हम अपने विचारों में, अपने दर्शन में, अपनी भावनाओं में और प्रभाव में उनकी आवाज को सुनते हैं।
  • जब हम सुनकर लिखते हैं और परखते हैं तब हम उनकी आवाज को सुनते हैं।

हर आवाज, हर विचार, हर दर्शन, भावना या प्रभाव परमेश्वर की आवाज नहीं है। कभी कभी यह शत्रु की आवाज होती है। प्रभु यीशु ने कहा हमारा शत्रु झूठा है और झूठ का बाप है। प्रभु यीशु ने कहा हमारा शत्रु चुराने, घात करने और नष्ट करने के लिए आता है।

लेकिन परमेश्वर कहते हैं कि हम उनकी आवाज सुनेंगे और हमें पता होगा जब वह हमसे बात करते हैं। अभ्यास और प्रार्थना के द्वारा, हम परमेश्वर की आवाज को बेहतर जान सकते हैं। हम यह जानना सीख सकते हैं कि जो हम सुनते हैं वह परमेश्वर की आवाज है या कोई दूसरी आवाज है।

जो हम सुनते हैं उसे परखने के कुछ तरीके हैः

  • जब प्रभु यीशु बोलते हैं - तब उनकी आवाज हमेशा उनके लिखे वचनों - यानि बाईबल - के साथ मेल खाएगी जिसे हमें पहले ही बता दिया गाया है। उनकी बोली गई आवाज उनकी लिखी हुई आवाज के विरोध में कभी नहीं होगी।
  • जब प्रभु यीशु बात करते हैं - तब उनकी आवाज हमारे हृदय को आशा और शांति का एक एहसास प्रदान करेगी। उनकी आवाज हमपर दोष नहीं लगाएगी या हमें निराश नहीं करेगी। प्रभु यीशु दोष नहीं लगाते हैं। प्रभु यीशु प्रेम में सुधारते हैं।
  • प्रभु यीशु की आवाज शरीर के कामों को नहीं दर्शायेगी - शारिरिक के दुष्कर्म और अशुद्धता, व्यभिचार, मूर्तिपूजा और काला जादू, नफरत और झगड़ा, ईष्या और क्रोध, स्वार्थ, असहमति, गुटबाजी और द्वेष, पिय्यकड़पन और रंगरेलियॉं। यें बातें परमेश्वर की आवाज की ओर से नहीं हैं।
  • जब प्रभु यीशु बोलते हैं - तब उनकी आवाज परमेश्वर के आत्मा के फल को प्रकट करेगी - प्रेम और आनंद, शांति और धीरज, दया और भलाई, विश्वासयोग्यता, नम्रता और आत्म-संयम।
  • जब प्रभु यीशु बोलते हैं - तो उनकी आवाज हमें आत्मविश्वास देती है ना कि संदेह। हम अपने अंदर ज्ञान और शांति का अनुभव करते हैं कि जो हम सुन रहे हैं, वह परमेश्वर की ओर से है। शायद हम एक ही बार में सबकुछ न सुन पायें। शायद हम उसका सिर्फ एक भाग सुन पायें जो हमें जानने की आवश्यकता है। लेकिन जो हम सुनते हैं वह दृढ़ होगा -वह बदलेगा नहीं।

प्रभु यीशु के हर शिष्य के लिए शुभ समाचार यह है कि जब हम श्वास अंदर लेते हैं और परमेश्वर से सुनते हैं और जब हम श्वास बाहर छोड़ते हैं और जो हम सुनते हैं उसकी आज्ञा मानते हैं और दूसरों को बताते हैं - तब परमेश्वर और भी स्पष्ट रूप से बात करेंगे।

उनकी श्वास हमसे भी ज्यादा निकलेगी।

तब हम और स्पष्ट रूप से उनकी आवाज सुन पाएंगे। हम उनकी आवाज को पहचानेंगे ना कि दूसरों की। हम दुनिया में उनके काम को देखेंगे और उनके साथ जुड़कर काम कर पायेंगे।

हम श्वास अंदर लेते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते हैं। जीवन।

चर्चा करें

(10 min)

  1. परमेश्वर की वाणी को सुनना और पहचानना सीखना क्यों जरूरी है?
  2. क्या प्रभु से सुनना और उसे प्रतिक्रिया देना वास्तव में श्वसन की तरह है? क्यों या क्यों नहीं?

READ

(5 min)

S.O.A.P.S. बाइबल पठन

प्रभु यीशु ने कहा था - "तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हे पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।"

यदि प्रभु यीशु के सभी अनुयायी, प्रभु यीशु के आदेशों का अनुसरण कर रहे हैं, तो उन्हे जानने की जरूरत है कि प्रभु यीशु के आदेश क्या है।

एक बड़ी परमेश्वर की आज्ञा और विशाल समिति एक बड़ा सार है कि परमेश्वर हमें क्या कहना चाहते है, पर यदि एक अनुयायी पूरें प्रमाणों में बढ़ रहा है कि परमेश्वर ने उनका निर्माण क्यो किया, तब उन्हे उनके आदेशों केा और भी अधिक जानना और उनका अनुसरण करना होगा।

सोप्स के अंश

  • धर्मपुस्तिका
  • अवलोकन
  • आवेदन
  • प्रार्थना और
  • बांटना

ये एक आसाना तरीका है बाईबल अध्ययन करने के तरीके को सीखने और उसे याद करने का जिसे प्रभु यीशु का कोई भी अनुयायी इस्तेमाल कर सकता है। चलिये प्रत्येक अंश को थोड़ा और देखते हैः

ज्ब आप बाइबल को पढते या सुनते हैंः

  • धर्म पुस्तिका: एक या उससे ज्यादा वचनों को लिखे जो आज विशेषकर आपके लिये अर्थपूर्ण हो।
  • अवलोकनः वचनों कोपुनः लिखे या उन पुस्तिकाओं से विशेष बिंदुओ अपने शब्दो में लिखे जिससे आप उनका अर्थ बेहतर समझ सके।
  • आवेदनः उन आदेशो और सिद्धांतो के बारें में सोचें कि उनका अनुसरण करने का आपके अपने जीवन में क्या अर्थ है। आपको क्या करना होगा? आप को अलग तरीके से क्या करना होगा? औरउन्हे लिखे।
  • प्रार्थनाः एक प्रार्थना लिखो जो परमेष्वर को बताती है कि आपने उनके षब्दों में क्या पढ़ा और आपने उनके आदेशों के अनुसरण के बारें में क्या समझा और लिखे आपने इससे क्या सीखा।
  • बांटना / बतानाः परमेश्वर से पूछे वो कौन है जिसके साथ वो आपको बांटने को कहते है जो आपने सीखा और कैसे आप उसे लागू कर रहे है।

ते चलिये सोप्स का कार्य लिखते हैः

  • धर्मपुस्तिका - बाईबिल में लिखा है - "मेरे विचार और और तुम्हारे विचार एक समान नही है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है।" परमेष्वर घोषणा करते है। "क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।" यशयाह 55:8-9
  • अवलोकन - एक मनुष्य के रूपमें, मुझे अधिकजानकारी नही हैना ये पता है कि मुझे क्य करना है। परमेश्वर हर प्रकार से असीमित है। वो सब कुछ देखते है औरजानते है। वो कुछ भी कर सकते है।
  • आवेदन - क्योंकि परमेश्वर सब कुछ जानत है और उनकी शैली सबसे अच्छी है, तो मैं अपने जीवन में और अधिक सफलता प्राप्त करूंगा अगर मैं उनका अनुसरण करूंगा बजाय अपने तरीकों से कार्य करने के।
  • प्रार्थना - परमेश्वर, मुझे नही पता एक अच्छा जीवन कैसे जीते हैं जो आपको प्रसन्न करने और दूसरों की सहायता करे। मेरे तरीके गलतियां करते है। मेरे विचार कष्टदायी है। कृप्या मुझे अपनी शैली और अपने विचार सीखायें। आपकी पवित्र आत्मा को मेरा मार्गदर्शन करने दीजिये ताकि मैं आपका अनुसरण करूं।
  • बांटना - मैं इन अध्यायों और इस आवेदन को अपने मित्र स्टीव के साथ बांटूंगा, जो एक मुश्किल दौर से गुजर रहा हैं और उसे महत्वपूर्ण निर्णयों के लिये मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

सोप्स बाईबिल अध्ययन। Zume Toolkit के सबसे आसान साधनों में से एक है।

गतिविधि

(30 min)

S.O.A.P.S. बाइबल पढ़ना

QR कोड को स्कैन करें।

मत्ती 6:9-13 का उपयोग करते हुए SOAPS बाइबल अध्ययन पैटर्न के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से कार्य करें। (20 मिनट)

एक साथ वापस आएँ और अपना S.O.A.P.S. दो या तीन के समूहों में साझा करें। (10 मिनट)

बाइबल।

बाइबल से दो या तीन छंद लिखे जो आपके लिए बहुत सार्थक हैं।

अवलोकन।

उन छंद को अपने शब्दों में फिर से लिखें, ताकि आप उन्हें बेहतर समझ सकें।

अनुप्रयोग।

इस आदेश को अपने स्वयं के जीवन में पालन करने का क्या अर्थ है इसके बारे में सोचें।

प्रार्थना।

आप एक प्रार्थना लिखें जिसमें आप परमेश्वर को बताते हैं कि आपने क्या सीखा है और आप दूसरों के साथ इसे कैसे साझा करेंगे।

साझा करना।

ईश्वर से यह पूछें कि आप जो कुछ भी सीख चुके हैं उसे आप कैसे साझा कर सकते हैं।

यहां S.O.A.P.S. का एक उदाहरण:

S - "मेरे विचार आपके विचार नहीं हैं, न ही आपके तरीके मेरे तरीके हैं," परमेश्वर कहते हैं। "जैसे स्वर्ग पृथ्वी की तुलना में ऊंचा है, वैसे ही मेरा मार्ग आपके मार्गों से और मेरे विचारों से आपके विचारों से अधिक है। यशायाह 55: 8-9

O - एक इंसान के रूप में, मैं जो कुछ जानता हूं और मुझे क्या करना है, इसमें सीमित हूं, परमेश्वर किसी भी तरह से सीमित नहीं है। परमेश्वर सब देखता है और सब कुछ जानता है। परमेश्वर कुछ भी कर सकता है।

A - चूंकि परमेश्वर सबकुछ जानता है और उनके तरीके सबसे अच्छे हैं, अगर मैं अपने काम के तरीके पर निर्भर होने के बजाय उसके पीछे चलता हूं, तो मुझे जीवन में और अधिक सफलता मिलेगी।

P - प्रिय परमेश्वर, मुझे एक ऐसे जीवन जीने के लिए सिखाए जो आपको प्रसन्न करता है और दूसरों के लिए उपयोगी है क्योंकि मुझे नहीं पता कि इस तरह के जीवन को कैसे जीना है। मेरे तरीके मुझे गलतियों की ओर ले जाते हैं। मेरे विचार मुझे दुख की ओर ले जाते हैं कृपया मुझे अपने तरीके और अपने विचार सिखाएं। आपका पवित्र आत्मा मेरा मार्गदर्शन करे, जब मैं आप का अनुसरण करता हूं।

S - मैं इन छंदों और इस आवेदन को अपने मित्र, स्टीव के साथ साझा करूँगा, जो कठिन समय से गुजर रहा है और महत्वपूर्ण निर्णय लेने की दिशा की आवश्यकता है।

READ

(5 min)

जवाबदेही समूह

प्रभु यीशु ने कहा था - "इसलिये जिसे बहुत दिया गया है, उस से बहुत मांगा जाएगा, और जिसे बहुत, बहुत सौंपा गया है, उससे बहुत मांगेंगे।"

प्रभु यीशु ने जवाब देही की कई उपकथायें सुनाई थी और हमें कई सच्चाईयां बतायी है कि कैसे हमें जिम्मेदार बनाया गया है जो हम करते और कहते है।

प्रभु यीशु ने हमें ये बाते अब बताई, ताकि हम बाद में इसके लिये तैयार हो सके। और क्योंकि एक दिन हम उनके जवाबदेही बनाये जायेंगे, बेहतर होगा कि हम एक दूसरे के लिये जवाबदेही बनने का अभ्यास करे।

जवाबदेही दल समान लिंग वाले दो या तीन लोगों से बनता है - पुरूष, पुरूष के साथ, महिलायें, महिलाओं के साथ -जो सप्ताह में एक बार मिलते है ढेर सारे प्रश्नों के बारे में विचार विमर्श करने के लिये, जो ये जानने में सहायता करते है कि कौन सी चीजें सही है और किसमें सुधार की आवश्यकता है।

प्रभु यीशु के प्रत्येक अनुयायी को जवाबदेह बनाया जायेगा, इसलिये प्रभु यीशु के प्रत्येक अनुयाायी को दुसरों के साथ जवाबदेही का अभ्यास करना चाहिये।

जवाबदेहीदल Zume Toolkit में एक और आसान साधन।

गतिविधि

(20 min)

जवाबदेही समूह

QR कोड को स्कैन करें।

दो और तीन लोगों के समूह में बट जाएं (महिला और पुरुष अलग-अलग)।

अगले 20 मिनिट जवाबदेही प्रश्नों द्वारा मिलजुलकर कार्य करने में बिताएं।

  1. परमेश्वर आपके लिए कैसे काम कर रहे हैं?
  2. किस तरह से आप अपने शब्दों और कामों के माध्यम से यीशु मसीह की महानता की गवाही बनने के लिए सक्षम रहें?
  3. क्या आप यौन आकर्षक सामग्री के संपर्क में थे या अपने दिमाग को अनुचित यौन विचारों को सोचने के लिए अनुमति दी थी?
  4. क्या आपने अपने पैसे के इस्तेमाल में परमेश्वर की स्वामित्व स्वीकार की है?
  5. क्या आप कुछ चीज़ों के बारे में लालची हैं?
  6. क्या आपने किसी की प्रतिष्ठा या भावनाओं को अपने शब्दों से चोट पहुंचाई है?
  7. क्या आप अपने शब्दों या कार्यों में बेईमान हैं या आप चीजों के बारे में अतिरंजित हैं?
  8. क्या आप एक व्यवहार [या आलसी या अनुशंसित हो] के आदी हो गए हैं?
  9. क्या आप कपड़े, दोस्तों, काम या संपत्ति का दास रहे हैं?
  10. क्या आप किसी को क्षमा करने में नाकाम रहे हैं?
  11. आपकी चिंताएं क्या हैं?
  12. क्या आपने शिकायत की है?
  13. क्या आपका एक आभारी दिल है?
  14. क्या आप अपने महत्वपूर्ण संबंधों में सम्मान, समझ और उदार हैं?
  15. सोचा, शब्द या क्रिया में क्या प्रलोभन का सामना करना पड़ा है और आप उनसे कैसे निकल गए?
  16. आप अन्य लोगों को कैसे आशीष देते हैं, और उनकी सेवा करते हैं- खासकर विश्वासियों
  17. क्या आपने प्रार्थना के विशिष्ट उत्तर देखा है?

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणाएँ:

इस सत्र में सुने गए उपकरण:

  • परमेश्वर आम लोगों को इस्तेमाल करता है
  • शिष्य और कलीसिया की एक साधारण परिभाषा
  • आत्मिक सांस लेना परमेश्वर की सुनना और आज्ञा पालन करना है
  • सोप्स (SOAPS) बाइबल पठन
  • जवाबदेही समूह

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

अभी और अपनी अगली बैठक (मीटिंग) के बीच S.O.A.P.S. बाइबल पठन का अभ्यास शुरू करें । मत्ती 5-7 पर ध्यान दें, कम से कम दिन में एक बार इसे अवश्य पढ़ें । S.O.A.P.S. स्वरूप का उपयोग करते हुए एक दैनंदिनी रखें ।

साझा करें

एक जवाबदेही साथी (समान लिंग) खोजें और उनके साथ साप्ताहिक आधार पर मिलना शुरू करें।

सत्र 2

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 2468

प्रार्थना करें

(5 min)

पूछें कि क्या समूह में किसी की कोई विशेष ज़रूरत है जिसके लिए वे चाहते हैं कि समूह प्रार्थना करे।

परमेश्वर को धन्यवाद दें कि उसने अपने वचन में वादा किया है कि जब उसके लोग प्रार्थना करेंगे तो वह सुनेगा और कार्य करेगा।

परमेश्वर के पवित्र आत्मा से प्रार्थना करें कि वह आपके मिलकर साथ बिताए समय का मार्गदर्शन करे।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • उपभोगता बनाम उत्पादक जीवनशैली
  • प्रार्थना में एक घंटा कैसे बिताएं
  • संबंधात्मक भंडारी - 100 की सूची

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(5 min)

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इस सत्र में, हम इस बारे में बात करेंगे कि हम प्रभु यीशु के अनुनायी को एक परमेश्वर के राज्य में सिर्फ उपयोग करने वाला बनने के बजाय उत्पन्न करनेवाला भी कैसे बना सकते हैं।

उनकी सिद्ध योजना में, परमेश्वर ने हमें संतुलन में रहने के लिए रचा है - उत्पन्न करने और उपयोग करने के लिए, बनाने और इस्तेमाल किये जाने के लिए, उंडेलने और भरने के लिए, ताकि हम फिर से उंडेल सकें। लेकिन हमारी टूटी हुई दुनिया में, लोगों ने परमेश्वर की योजना को नकारा है और कई लोगों ने अपनी शक्ति परमेश्वर के सिद्ध सूत्र में जीने के भाग के रूप में व्यर्थ कर दी है। उन्होंने इसे सीखा लेकिन बांटा नहीं। वे भरे हुए हैं लेकिन उन्होंने कभी उंडेला नहीं। वे उपयोग करते हैं लेकिन उत्पन्न नहीं करते।

यदि हम ऐसे शिष्य बनाएं जो बढ़ते जाएं, तो हमें उन्हें यह बताने की जरूरत है कि वे उत्पन्न करनेवाले कैसे बन सकते हैं ना कि सिर्फ उपयोग करनेवाले।

यह इस प्रकार है---हमें आत्मिक रूप से बढ़ाने के लिए परमेश्वर अपने लिखित वचन का उपयोग करते हैं - जिसे हम पवित्र शास्त्र या बाइबल कहते हैं। हरएक शिष्य को सीखने, अर्थ बताने और वचन को लागू करने के लिए तैयार रहना चाहिये।

हजारों सालों से भी ज्यादा और कई लेखकों के द्वारा, परमेश्वर ने अपने विश्वासयोग्य लोगों के दिलों में अपने वचन कहे हैं जिन्होंने इसे लिखा और उनके पास जो था उसे बांटा।

पवित्र शास्त्र हमें परमेश्वर की कहानी, योजना, उनके हृदय, और उनकी इच्छा के बारे में सिखाता है।

पहले के सत्र में, आपने दो सरल टूल्स सीखे - सोप्स यानि दैनिक बाइबल अध्ययन और जवाबदेही समूह। आनेवाले सत्रों में, आप एक और टूल सिखेंगे - 3/3 समूह। ये तीनों टूल्स साथ मिलकर एक नये शिष्य को परमेश्वर के लिखित वचन को सीखने, इनका अर्थ समझने और इन्हें लागू करने में मदद करते हैं।

वे परमेश्वर के वचन को सिर्फ सुननेवाले नहीं बल्कि इसे करनेवाले और बांटनेवाले भी बनेंगे। हमें आत्मिक रूप से बढ़ाने के लिए परमेश्वर अपने कहे गए वचन का उपयोग भी करते हैं - जिसका भेद हम प्रार्थना के द्वारा सीख सकते हैं। प्रार्थना यानि परमेश्वर की सुनना और उनसे कहना है। प्रार्थना हमें परमेश्वर के साथ घनिष्ठता में तथा उनके हृदय, उनकी इच्छा और उनके तरीकों को समझने में मदद करती है।

प्रार्थना हमें सेविकाई में और दूसरों की सेवा करने में, खास तरीकों को सीखने में और इसे बताने में मदद करती है जो किसी व्यक्ति या समूह को परमेश्वर को बेहतर रीति से समझने में मदद करती है।

दो सरल टूल्स - प्रार्थना चलन और प्रार्थना चक्र उन शिष्यों को व्यक्तिगत प्रार्थना जीवन को विकसित करने में और प्रार्थना में नये तरीकों को सीखने में मदद करता है जो दूसरों की सेवा करते हैं।

ये टूल्स निरंतर प्रार्थना करने की आदत को विकसित करने और दुनिया पर केवल नजर आने वाले कारणों पर भरोसा करने के बजाय दुनिया को आत्मिक दृष्टिकोण से देखने में मदद करते हैं।

इनका लगातार उपयोग करने से, ये प्रभु यीशु के शिष्यों को प्रार्थना करने में अपनी क्षमता बढ़ाने में तथा परमेश्वर से सुनने और इसे लोगों को बताने में मदद करते हैं।

हमें आत्मिकता में बढ़ने के लिए परमेश्वर विश्वासियों की अपनी देह का इस्तेमाल करते हैं - जिसे हम चर्च या प्रभु यीशु के शिष्य कहते हैं।

एकत्रित विश्वासियों के रूप में हम जुड़े हुए हैं। परमेश्वर का वचन कहता है कि प्रभु यीशु में - हम एक देह के कई हिस्से हैं, और हम एक दूसरे से संबंधित हैं। दूसरे शब्दों में, हम केवल परमेश्वर से जुड़े हुए नहीं हैं - बल्कि हम एक दूसरे से भी जुड़े हुए हैं।

परमेश्वर हमें एक दूसरे के अधीन रहने के लिए कहते हैं। परमेश्वर हमें एक दूसरे की सेवा करने के लिए कहते हैं।

हममें से हरएक की ताकत अलग-अलग है और हरएक की कमजोरियाँ हैं। परमेश्वर हम से अपेक्षा करते हैं कि हम अपनी ताकत का इस्तेमाल दूसरों की मदद के लिए करें जो शायद कमजोर हैं। और वह हमसे अपेक्षा करते हैं कि हम अपनी कमजोरियों में दूसरों को उनकी ताकत का इस्तेमाल करने दें जो परमेश्वर ने उन्हें दी हैं।

परमेश्वर का वचन कहता है कि परमेश्वर ने आपको कुछ विशेष योग्यताएं दी हैं; यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे एक दूसरे की मदद करें, और उन्हें परमेश्वर की अनेक तरह की आशीषें प्रदान करें। सरल टूल जैसे 3/3 समूह, जवाबदेही समूह और सहकर्मी सलाह - हमें एक दूसरे से प्रेम करने और भलाई के काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं; सिर्फ उसका पालन करने के द्वारा नहीं जो परमेश्वर ने हमें करने के लिए कहा है, बल्कि दूसरों से सीखे गए तरीकों को बताने के द्वारा भी।

हमें आत्मिक रूप से बढ़ाने के लिए परमेश्वर सताव और तकलीफों का उपयोग भी करते हैं - त्याग और नुकसान का जो हम प्रभु यीशु के लिए सहन करते हैं। जब लोग हमें निराश और दु:खी करते हैं, क्योंकि हम प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं और उनकी आज्ञा मानते हैं, और इस कारण जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है, तो परमेश्वर उन सतावों और कष्टों का उपयोग हमारे चरित्र को शुद्ध करने और हमें ज्यादा से ज्यादा प्रभु यीशु के जैसा बनाने के लिए करते हैं। वह सेविकाई के लिए हमारे चरित्र को बनाते हैं, शुद्ध करते हैं तथा हमारे विश्वास को मजबूत करते हैं और हमें उन लोगों की सेवा करने देते हैं जो खास तौर से तकलीफ में हैं - खुद को उन लोगों पर स्पष्ट रूप से प्रकट करते हुए जो हमें देख रखे हैं और हमारे दर्द को जानते हैं।

परमेश्वर हमें बताते हैं कि प्रभु यीशु के शिष्य के रूप में हमें सताव के लिए तैयार रहना चाहिये। प्रभु यीशु ने कहा है - धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। तब तुम आनन्दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था॥

3/3 समूह और जवाबदेही समूह जैसे सरल टूल प्रभु यीशु के शिष्यों को उनके द्वारा अनुभव किये गए सताव और कष्टों को बताने का अवसर प्रदान करते हैं।

ये समूह आपको शिष्यों को यह सिखाने का मौका देते हैं कि परमेश्वर का वचन कहता है कि हमें कठिन समय के लिए तैयार रहना चाहिये और जब चीजें बुरी हों तब भी परमेश्वर के प्रेम पर भरोसा करते हुए किस तरह से प्रतिक्रिया करनी चाहिये।

वचन. प्रार्थना. शारीरिक जीवन. सताव और कष्ट इन सब तरीकों से परमेश्वर हमें अपने सिद्ध पुत्र प्रभु यीशु के जैसा बनाते हैं।

ये सरल टूल्स हमें उन चीजों का केवल उपयोग करनेवाला ही नहीं बनाते जिन्हें परमेश्वर ने हमें दिया है, बल्कि हमें उत्पन्न करनेवाला और बांटने वाला भी बनाते हैं।

चर्चा करें

(10 min)

  1. चार क्षेत्र जो ऊपर विस्तृत में दिए गए है (प्रार्थना, परमेश्वर का वचन, आदि), इन में से कौनसे आप पहले से ही अभ्यास करते हैं?
  2. किसके बारे में आपको अनिश्चित लग रहा है?
  3. आप खुद को कितना तैयार महसूस करते है जब दूसरों को प्रशिक्षित करने की बात आती हैं?

READ

(5 min)

प्रार्थना चक्र

प्रभु यीशु अकसर अपने अनुयायियों को प्रार्थना के उद्येश्य, अभ्यास और वचनों के बारे में सिखाते है।

प्रभु यीशु ने कहा- "मांगों, तो तुम्हे दिया जायेगा, ढूंढो, तो तुम पाओगे, खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये द्वार खोला जायेगा। क्योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है, और जो ढूंढता है, वह पता है और जो खटखटाता है, उसके लिये द्वार खोला जायेगा।"

प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को सिखाया कि प्रार्थना समाज की स्तुति नही है, ना एक स्वार्थपूर्ण अभिलाषा या कोई भाषण जिसे हम बारबार दोहराते हैं।

प्रभु यीशु ने हमें बताया प्रार्थना में शक्ति होती है क्योंकि ये स्वर्गीय पिता के साथ हमारी एक सीधी और निरंतर होने वाली बातचीत है, जो हमें प्रेम करते है। किसी भी अच्छी बातचीत की तरह, एक अच्छी प्रार्थना का अर्थ है दोनो पक्षों को सुनने और बोलने का अवसर मिले। पर परमेश्वर से बात करना, जिसने ब्रहमाण्ड का निर्माण किया, भयावह लग सकता है। और वास्तव में वापसी में कुछ सुनना - कई व्यक्तियों की भलाई के लिये, वो पूरी तरह भयावह हो सकता है।

अच्छा समाचार ये है कि प्रार्थना में बेहतर करना - बेहतर होना और परमेश्वर के साथ गहन बातचीत करना, जो हम सें प्रेम करते है - ये केवल संभव ही नही - अपितु यही तो परमेश्वर चाहते है।

परन्तु जब प्रार्थना एक नई भाषा की तरह लगने लगे -तो आप बेहतर कैसे करते है? इसका जवाब आसान है- आपका अभ्यास। प्रार्थनाचक्र एक सरल तरीका है प्रार्थना के अभ्यास के लिये जिसे आप स्वयं इस्तेमाल कर सकते है और किसी भी अनुयायी के साथ बांट सकते है।

केवल 12 आसान चरणों में - प्रत्येक के लिये 5 मिनट -प्रार्थनाचक्र 12 तरीकों से आपका मार्गदर्शन करता है जो बाइबल हमें प्रार्थना करना सिखाती है।

अंततः आपको एक घंटा प्रार्थना करनी होगी। बाइबलल में लिखा है - "निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो" हममें से कई व्यक्ति ऐसा नही कह सकते कि हम करते है। परन्तु प्रार्थना के एक घंटे बाद - आप एक चरण आगे बढ़ाये जाओगे।

प्रार्थना चक्र - Zoom Toolkit का एक और आसान साधन है।

गतिविधि

(60 min)

प्रार्थना चक्र

QR कोड को स्कैन करें।

एक घंटे तक व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना चक्र की प्रार्थना करें

समूह के लौटने और पुन: कनेक्ट करने के लिए एक समय निर्धारित करें । सभी के लिए कुछ अतिरिक्त समय जोड़ने के लिए सुनिश्चित करें कि दोनों किसी शांत जगह को प्रार्थना के लिए ढूंढ सकें और वापस अपने समूह में लौट आएं ।

केवल 12 सरल चरणों में - 5 मिनट प्रत्येकी - प्रार्थना चक्र आपको उन 12 तरीकों से मार्गदर्शन करता है जैसे बाइबल हमें प्रार्थना करना सिखाती है। अंत में, आपने एक घंटे के लिए प्रार्थना की होगी।

prayer cycle


प्रशंसा। परमेश्वर की स्तुति करके अपनी प्रार्थना का समय शुरू करें। उन चीजों के लिए उसकी प्रशंसा करें जो अभी आपके दिमाग में हैं। एक विशेष बात के लिए उसकी स्तुति करें जो उसने पिछले हफ्ते आपके जीवन में किया है। अपने परिवार के प्रति उसकी भलाई के लिए उसकी प्रशंसा करें।

प्रतीक्षा। परमेश्वर की प्रतीक्षा में समय बिताएं चुप रहो और उसे आपके लिए प्रतिबिंब खींचने दें।

विश्वास। पवित्र आत्मा से अपने जीवन में ऐसी चीजें दिखाने के लिए कहें जो उसके लिए अप्रिय हो। उससे पूछो कि आप ऐसे ऐसे व्यवहारों को दिखाते हैं जो गलत हैं, साथ ही साथ उन विशिष्ट कृत्यों के लिए जो आपने अभी तक स्वीकार नहीं की है। अब यहोवा के सामने कबूल करें कि तुम शुद्ध हो जाओ।

वचन पढ़ें। भजन, भविष्यवक्ताओं आदि की किताबों में प्रार्थना के बारे में पढ़ने का समय व्यतीत करना।

पूछें। अपने आप की ओर से अनुरोध करें

मध्यस्थता। दूसरों की ओर से अनुरोध करें

बाइबल से शब्द प्रार्थना करें। प्रार्थना में विशिष्ट भागों की प्रार्थना करें। शास्त्रीय प्रार्थनाओं और कई भजन इस प्रयोजन को अच्छी तरह से पेश करते हैं.

धन्यवाद। अपने परिवार की ओर और अपने चर्च की ओर से, अपने जीवन की बातों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें।

गायान। स्तुति, पूजा, अन्य भजन या आध्यात्मिक गीतों के गाने गाएं

ध्यान। परमेश्वर से आपसे बात करने के लिए अनुरोध करें। उन चीजों को लिखने के लिए एक कलम और कागज़ तैयार रखें जो वह आपको बताएंगे।

सुनो। आपने जो चीजें पढ़ी हैं, उन चीजों के बारे में सोचने में समय व्यतीत करते हैं, जो आपने प्रार्थना की हैं और जिन बातों को आपने गाया है आप देखेंगे कि परमेश्वर आपसे बात करने के लिए सभी को एक साथ लाते हैं।

प्रशंसा। उस समय के लिए परमेश्वर की स्तुति करो, जा समय आपने उसके साथ बिताया है और इस समय के दौरान उसने आपको उन सभी चीजों के बारे में बताया है। उसकी गौरवशाली विशेषताओं के लिए उसकी प्रशंसा करें।

डिक ईस्टमैन की पुस्तक 'द ऑवर दैट चेंजेस द वर्ल्ड' से (C) 2002 डिक ईस्टमैन द्वारा, चोजन बुक्स, ग्रैंड रैपिड्स, एमआई, की अनुमति के साथ उपयोग किया गया है।

चर्चा करें

(10 min)

  1. प्रार्थना में एक घंटे बिताने के लिए आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
  2. आपको कैसा लगता है?
  3. क्या आपने कुछ सीखा या सुना?
  4. जीवन कैसे होगा अगर आप इस तरह की प्रार्थना को एक नियमित आदत बना ले तो?

READ

(5 min)

100 की सूची

प्रभु यीशु ने कहा- "जाओ और अनुयायी बनाओ़" और उनके अनुयायियोंने वैसाही किया था।

वे अपने परिवार के पास गये। वे अपने मित्रों के पास गये। वे उन व्यक्तियो के पास गये जिन्हे वो नगरमें जानते थे। वे उन व्यक्तियों के पास गये जिनके साथ उन्होने काम किया। वे चले गये।

प्रभु यीशु ने कहा "जाओ" और उन्होने अनुसरण किया। और परमेश्वर का परिवार बढ़ गया।

परमेश्वर ने पहले ही हमारी जरूरत के संबंध दे दिये थें "जाओ और अनुयायी बनाओ।" वो सब है हमारा परिवार, मित्र, पड़ौसी, साथ काम करने वाले और सहपाठी-वे लोग जो हमारे जीवन में है, जिनसे हम अभी मिले हैं।

उन व्यक्तियों के साथ विश्वास पात्र होना जिन्हे परमेश्वरने पहलेही हमारे जीवन में रखा है, एक बड़ा प्रथम चरण है अनुयायियों को बढ़ानेका। और इसे आसान चरणसे शुरू कर सकते है उनकी एक सुची बनाकर।

100 की एक सुची Zoom Toolkit का एक आसान साधन है जो अनुयायियों की संख्या बढ़ाती है।

गतिविधि

(30 min)

100 की अपनी खुद की सूची बनाएँ

QR कोड स्कैन करें या कागज़ का एक टुकड़ा इस्तेमाल करें।

अपने समूह के सभी लोगों से अगले 30 मिनट में अपने रिश्तों की सूची भरने को कहें। जितने हो सके उतने लोगों की सूची बनाएँ।

फिर परमेश्वर के साथ उनके रिश्ते के बारे में आपकी सबसे अच्छी समझ को चिह्नित करें: शिष्य, अविश्वासी या अज्ञात।

अपने संबंधों के भंडारी की सूची बनाएँ: अपने प्रभाव के दायरों में आने वाले लोगों के नाम लिखें। चिह्नित करें कि प्रत्येक व्यक्ति शिष्य है, अभी तक विश्वासी नहीं है, या अज्ञात है।

समूह के रूप में समय निकालें ताकि हर व्यक्ति अपनी खुद की सूची बना सके। आप कागज़ या अपनी प्रशिक्षण सामग्री में दिए गए डिजिटल साधनों का उपयोग कर सकते हैं।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणा:

इस सत्र में सुने गए उपकरण:

  • उपभोगता बनाम उत्पादक जीवनशैली
  • प्रार्थना में एक घंटा कैसे बिताएं
  • संबंधात्मक भंडारी - 100 की सूची

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

इस सप्ताह अपनी 100 की सूची से पांच लोगों के लिए प्रार्थना करने में समय बिताएं जो आपने “अविश्वासी” या "अज्ञात” के रूप में चिह्नित किए है । परमेश्वर से मांगे उनके दिलों को तैयार करने के लिए ताकि उसकी कहानी की तरफ वे खुले रहें ।

साझा करें

परमेश्वर से पूछें कि आप 100 की सूची उपकरण किसके साथ साझा करें ऐसे उसकी इच्छा है। जाने से पहले इस व्यक्ति का नाम समूह के साथ साझा करें और अगले सत्र से पहले उनसे संपर्क करें।

सत्र 3

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 6543

प्रार्थना करें

(5 min)

पिछले सत्र में आपने जिस तरह से परमेश्वर का अनुभव किया उसके लिए प्रार्थना करें और उसका धन्यवाद करें तथा आपके समय को साथ बिताने में अगुवाई के लिए उसकी पवित्र आत्मा को आमंत्रित करें।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • राज्य का अर्थप्रबंध
  • सुसमाचार और इसे कैसे साझा करें
  • बपतिस्मा और यह कैसे करना है

READ

(5 min)

आत्मिक अर्थव्यवस्था

इस सत्र में, हम परमेश्वर की आत्मिक व्यवस्था के बारे में बात करेंगे। इस टूटे विश्व में, लोग पुरस्कृत महसूस करते हैं जब वे लेते हैं, ग्रहण करते हैं और जब उन्हें आस-पास के लोगों से ज्यादा मिलता है।

पवित्रशास्त्र में, परमेश्वर अपने लोगों से कहते हैं - मेरे विचार तुम्हारे विचार नहीं हैं, ना ही तुम्हारे तरीके मेरे तरीके हैं। परमेश्वर अपने राज्य की व्यवस्था में बताते हैं - हमारा सम्मान इस बात में नहीं कि हमें क्या मिलता है - बल्कि हम क्या देते हैं। परमेश्वर कहते हैं - मैं तुम्हारा उद्धार करॅंगा, और तुम एक आशीष होगे। प्रभु यीशु ने कहा है - लेने से अच्छा देना है। परमेश्वर हमें जो देते हैं, उसे देना और परमेश्वर की आशीषों को दूसरों को आशीष देना, यह आत्मिक श्वास की नींव है इसे हमने पहले सीखा है। हम श्वास अंदर लेते हैं और परमेश्वर से सुनते हैं। हम श्वास बाहर छोड़ते और हमने जो सुना उसका पालन करते हैं तथा दूसरों को बताते हैं।

परमेश्वर ने हमसे जो कहा है उसका पालन करने और दूसरों को बताने में जब हम विश्वासयोग्य रहते हैं, तब वह और भी बातें बताने का वायदा करते हैं। प्रभु यीशु ने कहा है - जो कोई थोड़े में विश्वासी है वह बहुत में भी विश्वासी है।

ये गहरे अंतर्ज्ञान, महान आत्मियता और बहुतायत का जीवन जीने का मार्ग है जिसे जीने के लिए परमेश्वर ने हमें सृजा है। इस तरह से हम भले कार्य कर सकते हैं जिसे करने के लिए परमेश्वर ने योजना बनाई है। यदि हमें परमेश्वर का महान प्रतिफल पाना है, तो हमें दो चीजों का अभ्यास करना जरुरी है, जिससे वह आशीषित करने का वायदा करते हैं।

हम अवश्य ही -

  • आज्ञा मानें और बताएं
  • करें और सिखाएं
  • अभ्यास करें और दूसरों को बतायें

- जो कुछ परमेश्वर हमसे करने के लिए कहते हैं।

यदि हम चाहते हैं कि अन्य लोग भी परमेश्वर से महान प्रतिफल पाएं, तो हमें उन्हें दिखाना पड़ेगा कि ये चीजें कैसे करनी हैं। यह शिष्य बनने और शिष्य बनाने का महत्वपूर्ण भाग है।

  • हम शिष्य और अगुए हैं
  • हम विद्यार्थी और शिक्षक हैं
  • हम आशीषित हैं और आशीष हैं

परमेश्वर नही चाहते कि हम आज्ञा मानने और दूसरों को बताने से पहले इन्हें जानने तक इंतजार करें। जो कभी नहीं होगा। परमेश्वर यह आशा नहीं करते कि बढ़ने से पहले हम वयस्क हो जाएँ। वह चाहते हैं कि हम इसी वक्त बढ़ना शुरु करें।

परमेश्वर चाहते हैं जो हम जानते उसका पालन करें हैं और जो हमने सुना है उसे दूसरों को बतायें । और परमेश्वर चाहते हैं कि हम दूसरों को भी यही सिखाएं। जैसे आज्ञा मानना और परमेश्वर ने हमें जो करने के लिए कहा है उसे दूसरों को बताना। यह वयस्कता और वृद्धि का मार्ग है।

चर्चा करें

(10 min)

  1. आप परमेश्वर की आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था और हमारे सांसारिक तरीके से काम करने के बीच क्या अंतर देखते हैं?

यीशु ने कहा, “परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।"

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या मन में आता है जब आप परमेश्वर की आज्ञा सुनते हैं उसके “गवाह” बनने और उसकी कहानी को बताने के लिए?
  2. आपको क्यों लगता है कि यीशु ने अपने सुसमाचार को साझा करने के लिए किसी अन्य तरीके के बजाय आम लोगों को चुना?
  3. इससे क्या अधिक सुखकर आप महसूस करेंगे, परमेश्वर की कहानी को साझा करते हुए?

सुसमाचार

कोई ऐसा "सबसे अच्छा तरीका" नहीं है परमेश्वर की कहानी बताने के लिए (जिसे सुसमाचार भी कहा जाता है), क्योंकि सबसे अच्छा तरीका इस पर निर्भर करेगा की आप इसे किसके साथ साझा करते हैं । हर शिष्य को परमेश्वर की कहानी बताना सीखना चाहिए जो शास्त्र के तौर पर सही है और उन दर्शकों के साथ जोड़ती है जिनके साथ वे साझा करते हैं ।

निम्नलिखित दो प्रस्तुतियों की समीक्षा करें और अभ्यास के लिए एक का चयन करें।

READ

(5 min)

प्रस्तुति 1

इस सत्र में, हम सीखेंगे कि परमेश्वर की कहानी को कैसे बताना है - सुसमाचार - सृष्टि की रचना से न्याय के दिन तक, मानवजाति की शुरुवात से दुनिया के अंत तक। परमेश्वर की कहानी सुनाने के बहुत से तरीके हैं।

सर्वश्रेष्ठ तरीका उस व्यक्ति पर निर्भर होगा जिसे आप बता रहे हैं और दुनिया के प्रति उनका नजरिया और जीवन में उनका अनुभव।

परमेश्वर प्रचार करने के लिए सुनने के लिए इच्छुक व्यक्ति का इस्तेमाल करते हैं।

ये उनका कार्य है। इसमें जुड़ने के लिए वह हमें बुलाते हैं।

परमेश्वर की कहानी को बताने का एक तरीका यह बताना है कि सृष्टि की रचना से लेकर परमेश्वर के न्याय के दिन तक क्या हुआ।

जब हम इस तरह से परमेश्वर की कहानी सुनाते हैं, तो हम इसे लंबा या छोटा बना सकते हैं, विस्तार में या सन्क्षिप्त में लेकिन हमेशा सुननेवाले की संस्कृति से जुड़े रहकर। विभिन्न संस्कृतियों और दुनिया के नजरिये से उनकी कहानी को बताने में, आप अपने हाथों को हिला सकते हैं, जो सीखना और सीखाना आसान बनाता है।

ये परमेश्वर के शुभ समाचार की कहानी है -

आरंभ में, परमेश्वर ने पूरी दुनिया और इसमें की वस्तुओं को बनाया। उन्होंने पहले पुरुष और पहली स्त्री को बनाया। उन्होंने उसे एक सुंदर बगीचे में रखा। परमेश्वर ने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा बनाया और उनके साथ एक नजदीकी संबंध रखा। सदा जीवित रहने के लिए परमेश्वर ने उन्हें सृजा। तब मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं थी। ऐसे सिद्ध स्थान में भी, मनुष्य ने परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह किया और दुनिया में पाप और कष्ट को लाया। परमेश्वर ने मनुष्य को बगीचे में से निकाल दिया। मनुष्य उनके बीच का संबंध टूट गया। अब मनुष्य को मृत्यु का सामना करना था।

सैकड़ो सालों से, परमेश्वर विश्व में दूतों को लगातार भेजते रहे। उन्होंने मनुष्य को उसके पापों का स्मरण कराया लेकिन उसे परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और वायदे के बारे में भी बताया कि वह दुनिया में एक उद्धारकर्ता भेजेंगे।

उद्धारकर्ता परमेश्वर और मनुष्य के बीच संबंध को सुधारेंगे। उद्धारकर्ता मनुष्य को मृत्यु से छुड़ायेंगे। उद्धारकर्ता अनंत जीवन देंगे और मनुष्य के साथ सदा सर्वदा रहेंगे।

परमेश्वर हमसे इतना प्रेम करते हैं कि जब सही समय आया तो उन्होंने जगत में अपने पुत्र को उद्धारकर्ता के रूप में भेजा। प्रभु यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं। उन्होंने एक कुँआरी के द्वारा इस दुनिया में जन्म लिया। उन्होंने एक सिद्ध जीवन जीया। उन्होंने कभी पाप नहीं किया।

प्रभु यीशु ने लोगों को परमेश्वर के बारे में सीखाया। उन्होंने अपनी महान सामर्थ को दिखाते हुए बहुत से चमत्कार किए। उन्होंने बहुत सी दुष्टात्माओं को निकाला, बहुतों को चंगा किया और अंधो की आँखे खोलीं तथा बहरों के कान खोले और लंगड़ो को चलाया। प्रभु यीशु ने मरे हुओं को भी जिलाया। बहुत से धार्मिक गुरू प्रभु यीशु से डरते थे और ईर्ष्या करते थे। वे उन्हें मार डालना चाहते थे।

उन्होंने कभी पाप नहीं किया था, इसलिए प्रभु यीशु को मरने की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन उन्होंने हम सभी के लिए एक बलिदान के रूप में मरना चुना। उनकी दर्दनाक मृत्यु ने मनुष्यो के पापों को हटा दिया।

इसके बाद, प्रभु यीशु को एक कब्र में गाड़ दिया गया। परमेश्वर ने प्रभु यीशु के बलिदान को देखा और इसे स्वीकार किया। तीसरे दिन प्रभु यीशु को मृत्यु में से जिलाने के द्वारा परमेश्वर ने अपनी स्वीकारिता को दर्शाय।

परमेश्वर ने कहा कि यदि हम विश्वास करें और अपने पापों के लिए प्रभु यीशु के बलिदान को ग्रहण करें - यदि हम अपने पापों से फिरें और प्रभु यीशु के पीछे चलें, तो परमेश्वर हमें सभी पाप से शुद्ध कर देंगे और अपने परिवार में हमारा स्वागत करेंगे।

परमेश्वर, पवित्र आत्मा को भेजते हैं हमारे अंदर रहने के लिए और प्रभु यीशु के पीछे चलने के लिए हमें सक्षम बनाते हैं। इस सुधरे हुए संबंध को दर्शाने और इसपर मोहर लगाने के लिए हमें पानी में बपतिस्मा दिया जाता है । मृत्यु के चिन्ह के रूप में हम पानी में गाड़े जाते हैं। नये जीवन के चिन्ह के रूप में हमें पानी में से जिलाया जाता है - प्रभु यीशु के पीछे चलने के लिए। मृत्यु में से जी उठने पर प्रभु यीशु ने पृथ्वी पर 40 दिन बिताए।

प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को सीखाया कि पूरी दुनिया में जाकर सभी लोगों को उनके उद्धार का सुसमाचार सुनाओ। प्रभु यीशु ने कहा - इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को शिष्य बनाओ; और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें मानना सिखाओ जिसकी आज्ञा मैंने तुम्हें दी है, और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ।

प्रभु यीशु उनकी आँखों के सामने स्वर्ग में उठा लिए गए। प्रभु यीशु एक दिन, इसी तरह से वापस आयेंगे। जिन्होंने उनसे प्रेम नहीं किया और उनकी आज्ञा नहीं मानी, उन्हे वह अनंत दंड देंगे। जिन्होंने उनसे प्रेम किया और उनकी आज्ञा मानी, उन्हें वह सदा के लिए ग्रहण करेंगे और प्रतिफल देंगे। म नये स्वर्ग में और नई पृथ्वी में सदा जीवित रहेंगे। मेरे पापों के लिए प्रभु यीशु ने जो बलिदान दिया उसपर मैंने विश्वास किया है और इसे ग्रहण किया है।

उन्होंने मुझे शुद्ध किया और परमेश्वर के परिवार के सदस्य के रूप में लौटा लिया। वह मुझसे प्रेम करते हैं, मैं उनसे प्रेम करता हूँ और उनके राज्य में सदा जीवित रहूँगा।

परमेश्वर आपसे प्रेम करते हैं और वह चाहते हैं कि आप इस उपहार को ग्रहण करें। क्या आप अब इसे ग्रहण करना चाहेंगे?

READ

(5 min)

3-सर्कल्स (वृत्त)

परमेश्वर की कहानी को साझा करने के कई तरीके हैं।

इस अगले भाग में, हम सीखेंगे कि "तीन सर्कल्स (वृत्त)" नामक उपकरण का उपयोग करके परमेश्वर की कहानी - सुसमाचार - को कैसे साझा किया जाए।

सबसे अच्छा तरीका इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किस व्यक्ति के साथ साझा कर रहे हैं और दुनिया के बारे में उनका दृष्टिकोण तथा उनके जीवन के अनुभव क्या हैं। परमेश्वर उन दिलों का उपयोग करता है जो साझा करने के लिए तैयार हैं ताकि सुनने के लिए तैयार दिलों में काम किया जा सके। यह उसका काम है। वह बस हमें इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।

परमेश्वर की कहानी को साझा करने का एक तरीका एक सरल चित्र को साझा करना और उसका वर्णन करना है जिसे हम तीन सर्कल्स (वृत्त) कहते हैं।

हम सभी एक बहुत ही टूटी हुई (दुखी) दुनिया में रहते हैं।

हम दुख, मृत्यु, युद्ध, बीमारी, व्यसनों की कहानियाँ देखते और सुनते हैं। यह हर जगह है। लेकिन यह परमेश्वर की मूल रचना नहीं है।

परमेश्वर की उत्तम रचना प्रेम, आनंद, एकता और शांति से भरी दुनिया है।

जिस तरह से हमने खुद को परमेश्वर की उत्तम रचना से बाहर निकाला और टूटन भरे जीवन में आ गए, वह कुछ ऐसा है जिसे बाइबल "पाप" कहती है।

पाप का मतलब परमेश्वर के मार्ग से दूर हो जाना और अपने तरीके से चलना है। पाप हमें परमेश्वर से अलग करता है। पाप हमें टूटन भरे जीवन में फेंक देता है। पाप हमें आध्यात्मिक मृत्यु की ओर ले जाता है।

लोग टूटन भरे जीवन से बाहर निकलना चाहते हैं। हम बाहर निकलने के लिए हर तरह की अलग-अलग कोशिश करते हैं। हममें से कुछ लोग ड्रग्स और शराब सेवन करके कोशिश करते हैं। हममें से कुछ लोग अच्छी नौकरी करके या बहुत सारा पैसा कमाकर बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। हममें से कुछ लोग सोचते हैं कि कोई रिश्ता उन्हें इसमें से बाहर निकाल लेगा। कुछ लोग धर्म से भी कोशिश करते हैं - हमें लगता है कि अच्छा व्यवहार या दूसरों की मदद करने से हम आज़ाद हो जाएँगे।

इनमें से कोई भी चीज़ वास्तव में टूटन की समस्या को ठीक नहीं करती है। यहाँ तक कि जब हमें लगता है कि हम एक पल के लिए दूर चले गए हैं... तब हम वहीं वापस आ जाते हैं जहाँ से हमने शुरुआत की थी। यहाँ एक कठिन सत्य है। अगर हम अभी भी वहाँ हैं - अभी भी टूटन में हैं - जब यह जीवन समाप्त होता है, तो बाइबल कहती है कि हम हमेशा के लिए परमेश्वर से अलग हो जाते हैं। सदा के लिए।

बाइबल उस जगह को "नरक" कहती है।

लेकिन परमेश्वर नहीं चाहता कि हम टूटन में जीवन जियें।

बाइबल कहती है - परमेश्वर ने हमसे इतना प्रेम किया कि उसने हमारे लिए एक रास्ता बनाने के लिए अपने पुत्र को भेजा। यीशु हमारे पापों को मिटाने और हमें टूटन से दूर ले जाने के लिए धरती पर आया।

इसलिए यीशु, जो परमेश्वर का पुत्र है, ने अपनी मृत्यु के साथ हमारे पाप को रद्द कर दिया।

यीशु के मरने और दफनाए जाने के तीन दिन बाद, वह मृतकों में से जी उठा। उसके महान बलिदान के कारण, परमेश्वर ने यीशु को स्वर्ग और पृथ्वी पर की हर चीज का राजा बनाया।

राजा यीशु ने हमारे लिए टूटन से बाहर निकलने का रास्ता बनाया। परमेश्वर ने कहा कि अगर…

हम अपने पापों से दूर हो जाएं…

और विश्वास करें कि यीशु हमारे लिए मरा…

और पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा लें…

फिर परमेश्वर हमें जिलाते हैं -- ठीक यीशु की तरह -- ताकि हम हमेशा के लिए परमेश्वर के परिवार के हिस्से के रूप में एक नए तरह के जीवन में चलें।

फिर हम टूटी हुई दुनिया में इस नए जीवन का मॉडल बनते हैं, और यीशु की वापसी का इंतजार करते हैं जब वह एक नया स्वर्ग और नई पृथ्वी बनाएगा जहाँ हम हमेशा के लिए उसके साथ सिद्ध पूर्णता में रह सकते हैं।

परमेश्वर चाहता है कि हम उसके साथ के अपने रिश्ते में बढ़ें। परमेश्वर चाहता है कि हम उसके मूल सिद्ध डिजाइन में वापस आएँ।

परमेश्वर के परिवार के हिस्से के रूप में, यीशु हमें एक मिशन देते हैं -- जीने का एक कारण -- और सबसे अच्छा संभव जीवन जीने का एक तरीका।

हमारे लिए यीशु का मिशन है जाओ।

यीशु हमें -- ठीक वैसे ही जैसे उसके पिता परमेश्वर ने उसे भेजा था -- वापस टूटेपन में भेजते हैं ताकि दूसरों को भी मुक्त होने में मदद मिल सके और वे भी परमेश्वर के हमेशा के परिवार का हिस्सा बन सकें।

इस तीन सर्कल्स (वृत्त) दुनिया में, केवल दो तरह के लोग हैं -

वे लोग जो ... परमेश्वर के सिद्ध डिजाइन का हिस्सा हैं और परमेश्वर के बचाव मिशन को जी रहे हैं ... परमेश्वर को उसके हमेशा के परिवार से फिर से जोड़ने में मदद कर रहे हैं।

या...

वे लोग जो ... अभी भी टूटे हुए हैं ... मुक्त होने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं ... उम्मीद कर रहे हैं कि कोई उन्हें बचा लेगा।

  • क्या आप जानते हैं कि आप अभी कहाँ हैं?
  • क्या आप जानते हैं कि आप कहाँ होना चाहते हैं?

परमेश्वर की कहानी को साझा करने के कई तरीके हैं। महत्वपूर्ण बात है साझा करना। परमेश्वर साझा करने के इच्छुक दिलों का उपयोग सुनने के इच्छुक दिलों पर काम करने के लिए करता है। यह उसका काम है। वह बस हमें इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।

गतिविधि

(45 min)

सुसमाचार साझा करना

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आपके द्वारा देखी गई दो प्रस्तुतियों में से एक चुनें।

दो या तीन लोगों के समूह में बंट जाएँ।

बारी-बारी से एक-दूसरे को सुसमाचार सुनाएँ।

परमेश्वर की कहानी: उत्पत्ति से न्याय की शैली तक

"शुरुआत में, परमेश्वर ने पूरी दुनिया और उसमें सब कुछ बनाया।

उसने पहले आदमी और प्रथम महिला को बनाया। उसने उन्हें एक सुंदर बगीचे में रखा उन्होंने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा बना दिया और उनके साथ एक सम्बन्ध था।

उसने उन्हें हमेशा के लिए जीवित बनाया मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं थी। "यहां तक कि इस सही जगह पर, मनुष्य ने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया और पाप और पीड़ा दुनिया में आए। परमेश्वर ने बगीचे से मनुष्य को हटा दिया। मनुष्य और परमेश्वर के बीच संबंध टूट गया था। अब मनुष्य को मृत्यु का सामना करना पडा। "सैकड़ों वर्षों से, परमेश्वर ने अपने दूतों को दुनिया में भेजा। उन्होंने मनुष्य को अपने पापों को याद दिलाया, लेकिन उन्हें परमेश्वर की सत्यता और उसे उद्धारकर्ता को दुनिया में भेजने का वादा किया था उसे याद दिलाया। उद्धारकर्ता परमेश्वर और मनुष्य के बीच घनिष्ठ संबंध को पुनर्स्थापित करेगा।

उद्धारकर्ता मृत्यु से मनुष्य का बचाव करेगा उद्धारकर्ता आखिरकाल जीवन देगा और हमेशा के लिए मनुष्य के साथ होगा। "परमेश्वर हमें इतना प्यार करता है कि जब समय सही था, उसने अपने बेटे को उस उद्धारकर्ता होने के लिए दुनिया में भेजा।

"यीशु परमेश्वर का पुत्र था वह एक कुंवारी के माध्यम से दुनिया में पैदा हुआ था। वह एक परिपूर्ण जीवन जी रहे थे। उसने कभी पाप नहीं किया। यीशु ने लोगों को परमेश्वर के बारे में सिखाया। उन्होंने अपनी महान शक्ति दिखा चमत्कार प्रदर्शन किया। उसने कई बुरी आत्माओं को निकाल दिया। उसने कई लोगों को चंगा किया। उसने अंधे लोगों को दृष्टि दी। उसने बहिरों लोगों को सुनने की शक्ति दी। उसने लंगड़े लोगों को चलाया। यीशु ने मरे हुओं को जिंदा किया। यीशु के कारण कई धार्मिक नेताओं को डर और ईर्ष्या हो रही थी।

वे उसे मारना चाहते थे। चूंकि उसने कभी पाप नहीं किया, इसलिए यीशु को मरना नहीं पड़ा।

लेकिन उन्होंने हमारे सभी के लिए एक प्रत्याशा के रूप में मरने का फैसला किया। उनकी दर्दनाक मौत ने मानव जाति के पापों को कवर किया। इसके बाद, यीशु को एक कब्र में दफना दिया गया। "परमेश्वर ने यीशु के बलिदान को देखा और स्वीकार कर लिया। परमेश्वर ने तीसरे दिन मृतकों से यीशु को जिला कर स्वीकृति को दिखाया।

यदि हम अपने दिलों में विश्वास करते हैं कि परमेश्वर ने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया है, और हम उसे अपने प्रभु के रूप में स्वीकार करते हैं - हमारे शासक और राजा - हम बचेंगे। विश्वासियों के रूप में, हम अपने पापपूर्ण जीवन से दूर हो जाते हैं और यीशु के नाम से बपतिस्मा लेते हैं, पानी में दफन होते हैं, हमारे पुराने जीवन के लिए मर चुके हैं, और पानी से जिलाए गए हैं जैसे यीशु को मृतकों से जिलाया गया था, एक नई जिंदगी जीने के लिए उसके बाद परमेश्वर ने हमारे सभी पापों को माफ कर दिया और हमारे भीतर रहने के लिए पवित्र आत्मा को भेज दिया ताकि हम परमेश्वर का अनुसरण करने में सक्षम हो, और हमें फिर से अपने परिवार में वापस लाने के लिए।

"जब यीशु को मरे हुओं में से जी उठाया गया था, उसने पृथ्वी पर 40 दिन बिताए।

यीशु ने अपने अनुयायियों को हर जगह जाना सिखाया और कि उद्धार की अच्छी खबर बताएं। "यीशु ने कहा - जाओ और हर देश के लोगों को अपने चेलों बनाओ, उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर बपतिस्मा दें; और उन्हें उन सभी का पालन करने के लिए सिखाओ जो मैंने आज्ञा दी है। मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा- यहां तक कि इस युग के अंत तक।

तब यीशु को उनकी आंखों के सामने स्वर्ग में ले जाया गया। "एक दिन, यीशु फिर से उसी तरह आएगा जैसे वह चला गया। वह उन लोगों को दंडित करेगा, जिन्होंने उसे प्यार नहीं किया और उसका पालन नहीं किया। वह उन लोगों को प्रतिफल देगा जिन्होंने प्रेम किया और उसकी आज्ञा मानी। हम उसके साथ हमेशा एक नई स्वर्ग और नई पृथ्वी पर रहेंगे।

"मैं विश्वास करता हूं और अपने पापों के लिए यीशु के बलिदान को स्वीकार करता हूं। उसने मुझे परमेश्वर के परिवार के हिस्से के रूप में स्वच्छ और बहाल किया है। वह मुझे प्यार करता है, और मैं उससे प्यार करता हूं और हमेशा उसके राज्य में उनके साथ रहूंगा। "परमेश्वर तुम्हें प्यार करता है और चाहता है कि आप इस उपहार को प्राप्त करें, साथ ही साथ। क्या आप अभी ऐसा करना चाहते हैं?

जब तक आप इस कहानी को बताने में सहज महसूस न करें, तब तक सुसमाचार की इस प्रस्तुति का अभ्यास करें।

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(5 min)

बपतिस्मा

प्रभु यीशुने कहा -- "तुम जाकर सब जातियों के लोगोंको चेला बनाओ, और उन्हे पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नामसे बपतिस्मा दो…" बपतिस्मा देना-या करना का मूल भाषामेंअर्थ है डूबोना या भिगोना-जैसे कि जब आप एक कपड़े को रंगते है तो उसे रंगमें डूबोते है और उसको बाहर निकालने पर उसका रंग बदला हुआ होता है।

बपतिस्मा हमारे नये जीवन की एक तसवीर है, जो प्रभु यीशु की छविमें डूबोदी गई, और परमेश्वर की आज्ञाकारिता में बदली गई है। ये हमारे पापो के नष्ट होने की तसवीर है, जैसेकि प्रभु यीशु हमारे पापों के लिये मर गये थे, हमारे पुराने जीवन की मृत्यु है। जैसे कि प्रभु यीशु मरेथे, मसीहमें नये जीवन का एक पुर्नजन्म है, जैसेकि प्रभु यीशु जिलाये गये थे और आज भी है।

यदि आप आपने पहले कभी किसीको बपतिस्मा नही किया, ये शायद थोड़ा भयावह लगे, पर ऐसा होना नही चाहिये। यहॉ कुछ सरल चरण है। कुछ जमाकिया हुआ पानी लिजिये, जो इतना गहरा हो जिसमें एक नया अनुयायी डूबसके। जैसे कि एक तालाब, नदी, झील या समुद्र हो। ये एक बाथटब भी होसकता है या ऐसा कुछ भी जिसमे पानी जमा होसके।

अनुयायीका एक हाथ अपने हाथ में पकडे और दूसरे हाथ ये उसे पीछेसे सहारा दे।

उनसे दो सवाल पूछे जो ये सुनिश्चित करे कि वो उनके निर्णय को समझ गये।

  • "क्या तुमने प्रभु यीशु मसीह को अपने परमेश्वर या संरक्षक के रूपमें प्राप्त किया है?"
  • "क्या तुम जीवन भर उनको अपने राजा के रूपमें सेवा और आज्ञा का पालन करोगे?"

यदि दोनो सवालो का जवाब "हॉ" है, तो कुछ इस तरह कहेः

  • "क्योकि तुमने प्रभु प्रभु यीशु में अपने विष्वास को जाहिर कर दिया, तो मैं अब तुम्हे पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर, बपतिस्मा देता हूँ।"

पानी के अन्दर तक जानेमें उनकी सहायता करे, उन्हे पूरी तरह डूबोये और वापस उपर उठाये।

आपने प्रभु यीशु के एक नये अनुयायी को बपतिस्मा करदिया-स्वर्गका एक नया नागरिक-परमेश्वर के एक नये शिशु के रूप्में। समय है उत्सव मनानेका।

बपतिस्मा-प्रभु यीशु द्वारा अपने अनुयायियों को दिया गया पहला उत्सव और Zume Toolkit का एक निर्माण।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या आपने कभी किसी को बपतिस्मा दिया?
  2. क्या आप कभी इसका विचार करोगे?
  3. यदि यीशु का महान आदेश हर अनुयायी के लिए है, तो क्या इसका मतलब यह है की हर अनुयायी को दूसरों को बपतिस्मा देने की अनुमति दी गई है? क्यों या क्यों नहीं?

महत्वपूर्ण अनुस्मारक - आपने बपतिस्मा लिया है?

यदि नहीं, तो हम आपको इस प्रशिक्षण के एक और सत्र से पहले इस योजना के लिए प्रोत्साहित करते हैं । अपने समूह को आमंत्रित करें इस महत्वपूर्ण दिन का एक हिस्सा बनने के लिए जब आप यीशु को “हां” कहने के द्वारा ख़ुशी मनाते हैं ।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणा:

इस सत्र में सुने गए उपकरण:

  • राज्य का अर्थप्रबंध
  • सुसमाचार और इसे कैसे साझा करें
  • बपतिस्मा और यह कैसे करना है

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

परमेश्वर से पूछें की वह उत्पत्ति से अंतिम निर्णय की कहानी को किसके साथ साझा करने के लिए चाहता हैं (या किसी अन्य तरह से परमेश्वर की कहानी साझा करने के लिए) । जाने से पहले समूह के साथ इस व्यक्ति का नाम साझा करें ।

साझा करें

समय बिताएं इस सप्ताह परमेश्वर की कहानी का अभ्यास करते हुए, और फिर इसे अपनी 100 की सूची में से कम से कम एक व्यक्ति के साथ साझा करें जिन्हें आपने “अविश्वासी” या "अज्ञात” के रूप में चिह्नित किया है।

महत्वपूर्ण अनुस्मारक-आपका समूह अगले सत्र में प्रभु भोज का अनुष्ठान करेंगे । सुनिश्चित हो आपूर्ति के लिए (रोटी और दाखरस / जूस)।

सत्र 4

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 8764

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना करें और परमेश्वर को धन्यवाद दें कि वह हमें दूसरों के साथ उसका सुसमाचार साझा करने के लिए आमंत्रित करता है।

अपने समूह के प्रत्येक सदस्य को मसीह का मन देने के लिए उससे प्रार्थना करें - और प्रत्येक को अपनी आत्मा से भर दें।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इन अवधारणाओं को सुनेंगे और उन पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • सबसे महान आशीष को प्रक्षेपित करने का दर्शन
  • डकलिंग (बत्तख के चूजे) शिष्यत्व - तुरंत अगुवाई करना
  • आंखें यह देखने के लिए कि राज्य कहां नहीं है
  • 3-मिनट की गवाही तैयार करें
  • प्रभु भोज और इसकी अगुवाई कैसे की जाएं

READ

(5 min)

तीन मिनट की गवाही

प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को कहा - "तुम इन सब बातों के गवाह हो।" प्रभु यीशु के एक अनुयायी के रूपमें, हम "गवाह" भी है, प्रभु यीशुका हमारे जीवनों में जो प्रभाव पड़ा उस बारेमें "गवाही देने वाले" परमेश्वर के साथ आप के सबंध की कहानी को आप की गवाही कहा गया है। प्रत्येक के पास एक कहानी है। ये आपके अभ्यास करनेका एक अवसर है।

एक या दो अनुयायियों को चुनकर उनके साथ अभ्यास करें और फिर आपकी 100 की सुची में से 5 नाम निकाले। ध्यान रहें आपके चुने हुयें व्यक्ति "अविश्वासी" या "आधत्मिक स्थितिसे अज्ञात" की श्रेणी के हों। अपनी गवाही का अभ्यास करें-आपकी प्रभु यीशु के बारे में उपकथा-आपकी 100 की सूची में से चुनेहुये 5 व्यक्तियों मे से एक के साथ अभ्यास करते हुये। पांचों में प्रत्येक व्यक्ति के लिये इसे विशेष बनाने के लिये अपनी उपकथा को आकार देने का अभ्यास करें। आपको अपनी अपकथा तीन मिनट में बताने के लिये उसे छोटे संस्करण में बताने में सक्षम होना होगा।

आपकी उपकथा को आकार देने के लिये अनगिनत तरीके है, परन्तु कुछ तरीके है जिन्हे हमने दुसरो के साथ सही कार्य करते देखा थाः आप एक साधारण वचन बता सकते है कि आप प्रभु यीशु के अनुयायी क्यो बने। ये एक नये विश्वासी के लिये उचित होगा। आप अपनी "पहले" और "बाद" की उपकथा बता सकते हैं-आपका जीवन कैसा था प्रभु यीशुको जानने से पहले और अब आपका जीवन कैसा है। सरल और प्रभाव कारी। आप अपनी "प्रभु यीशु के साथ" और "प्रभु यीशु के बिना" उपकथा बता सकते हैं, कि "प्रभु यीशु के साथ" आपका जीवन कैसा है और "उनके बिना" कैसा हो जायेगा। आपकी कहानी का ये संस्करण जरूर काम करेगा यदि आप युवावस्था में ही विश्वासी बन गये थे।

जब आप बतादें, तो आपके साथ अभ्यास करने वाले साथीको बताने का अवसर दें। आगे पीछे बताते रहे जबतक आप दोनों, पांचो की कहानी नही बतादें। क्या आप एक इससे भी अधिक प्रभाव डालना चाहते हैं?

अपनी उपकथा बताते हुये, ये सोचना उपयोगी है, कि यह तीन भागों की प्रक्रियाका एक भाग है।

  • उनकी उपकथा - जिस व्यक्ति के साथ आप बात कर रहे है उनसे उनके आध्यात्मिक अनुभव के बारे में पूछे।
  • आप की उपकथा - फिर आप उनके अनुभव के आधार पर अपनी गवाही बतायें।
  • परमेश्वर की उपकथा - अंततः परमेश्वर की उपकथा बताये ऐसे तरीके से जो उनके सांसारिक नजरिये, मूल्यों और प्राथमिकताओं से जुड़े है।

और यदि आप चिंतित है कि इसे आरंभ कैसे करना है-इसे सरल रखे।

बस एक अभिव्यक्ति बतायें कि क्यो आपने प्रभु यीशुका अनुसरण करनेका निर्णय लिया। परमेश्वर जीवन को बदलने के लिये आपकी कहानी का उपयोग कर सकते है पर याद रहें - केवल आपही है जिसे इसे बताना है।

आपकी तीन मिनट की गवाही, ZumeToolkit का एक और सरल साधन है।

गतिविधि

(30 min)

3 मिनट की गवाही

QR कोड को स्कैन करें।

अपनी कहानी लिखने और इसे केवल तीन मिनट तक सीमित रखने पर काम करें। (10 मिनट)

दो से तीन के समूह में विभाजित हो जाएँ और साझा करने का अभ्यास करें। (20 मिनट)

गवाही के तीन बुनियादी प्रकार

आपकी कहानी को आकार देने के अंतहीन तरीके हैं, लेकिन यहां कुछ तरीके हैं जो अच्छी तरह से काम करते हैं।

  • एक सरल वक्तव्य - आप एक साधारण बयान साझा कर सकते हैं कि आपने यीशु को क्यों चुना। यह एक नए विश्वासी के लिए अच्छी तरह से काम करेगा।
  • पहले और बाद में - आप अपने "पहले" और "बाद" को साझा कर सकते हैं। उनको बताएं कि इससे पहले कि आप यीशु को जानते हैं और आपके जीवन में बदलाव क्या हुआ, आपकी ज़िंदगी कैसी थी? सरल और शक्तिशाली।
  • साथ और बिना - आप अपनी "साथ" और "बिना" कहानी साझा कर सकते हैं आप अपने जीवन के बारे में बता सकते हैं कि "यीशु के साथ" क्या है और यह "उसके बिना" जैसा होगा। आपकी कहानी का यह संस्करण अच्छी तरह से काम करता है यदि आप एक युवा उम्र में विश्वास करना शुरू कर चुके हैं।

आपकी गवाही साझा करने के तीन भाग

जब आप अपनी कहानी साझा कर रहे हैं, तो यह वास्तव में सहायक है यदि आप उसे तीन-भाग की प्रक्रिया के भाग के रूप में लेते हैं।

  • उनकी कहानी - आप जिस व्यक्ति से बात कर रहे हैं उसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में बताएं।
  • आपकी कहानी - फिर अपनी गवाही को उस तरीके से साझा करें जो उनके अनुभव के साथ मिलती है।
  • परमेश्वर की कहानी - अंत में परमेश्वर की कहानी को उस तरीके से साझा करें कि यह उनकी विश्व-दृश्य, मूल्यों और प्राथमिकताओं से जुड़ा हो।

आपकी गवाही को प्रभावी होने के लिए लंबा या विस्तृत नहीं होना पड़ता है। वास्तव में, अपनी कहानी को 3-मिनट के भीतर रखने से आपको प्रश्न और गहरी बातचीत के लिए समय मिलेगा। यदि आप शुरू करने के बारे में चिंतित हैं, तो आप इसे सरल बना सकते हैं। इसे सरल रखें। परमेश्वर अपनी कहानी का उपयोग कई ज़िंदगी बदलने के लिए कर सकते हैं, लेकिन याद रखें कि केवल आप इसे बताने के लिए मिलेंगे।

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(5 min)

महान आशीष, महानतम आशीष, सबसे महान आशीष

इस सत्र में, हम परमेश्वर की महान, महानतम और सबसे महान आशीषों के बारे में और इन्हें दूसरों के साथ बांटने के बारे में बात करेंगे। जब कोई प्रभु यीशु का शिष्य बनने का निर्णय लेता है, तब आप सही मार्ग पर चलने के लिए उनकी सहायता कैसे करेंगे? आप उनकी सहायता कैसे करेंगे ताकि वे परमेश्वर के राज्य में उत्पन्न करनेवाले बनें ना कि एक और उपयोग करनेवाले? आप उनकी सहायता कैसे करेंगे - उन सभी आशीषों को ग्रहण करने के लिए जो परमेश्वर देना चाहते हैं?

मैं इन्हें बताकर आरंभ करता हूँ...

  • प्रभु यीशु का शिष्य बनना एक आशीष है।
  • दूसरों को प्रभु यीशु का शिष्य बनाना एक महान आशीष है।
  • एक नये आत्मिक परिवार की शुरुवात करना महानतम आशीष है।
  • नये आत्मिक परिवारों की शुरुवात करने के लिए दूसरों को तैयार करना सबसे महान आशीष है।

आपने प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय लिया है इसलिए परमेश्वर ने आपको आशीष दी है। मैं चाहता हूँ कि आप परमेश्वर की महान आशीष, महानतम आशीष और सबसे महान आशीषों को पायें। मैं आपको बताना चाहूँगा, कैसे?

यदि वे और ज्यादा जानना चाहते हैं, तो मैं उन्हें 100 पहचान वालों की सूची बनाने के लिए कहता हूँ। फिर मैं उन्हें उस सूची से पाँच लोगों को चुनने के लिए कहता हूँ - पाँच लोग जो प्रभु यीशु को जानते हैं - पाँच लोग जिन्हें वे सीधे बताना चाहते हैं।

प्रभु यीशु के पीछे चलना एक आशीष है। आप और इस आशीष को किसके साथ बाँटना चाहते हैं?

मैं उन्हें अपनी गवाही बताना सिखाता हूँ - परमेश्वर उनके जीवन में जो कर रहे हैं, उसकी कहानी। मैं उन्हें सुसमाचार बाँटना सिखाता हूँ - परमेश्वर दुनिया में जो कर रहे हैं उसकी कहानी। मैं उन्हें सिखाता हूँ कि परमेश्वर की महान, महानतम और सबसे महान आशीषों को कैसे बाँटना है। जिन पाँच लोगों को उन्होंने चुना है, उनके साथ मैं एक बार उन्हें अभ्यास करने के लिए कहता हूँ। पहले उनकी कहानी। फिर परमेश्वर की कहानी। फिर परमेश्वर की आशीषें।

हर बार, मैं उनकी सूची में से एक व्यक्ति बनने का नाटक करता हूँ। वे जब भी अपनी कहानी बताते हैं, तो वे परमेश्वर की कहानी बताते हैं। वे मुझे भी प्रभु यीशु का शिष्य बनने के लिए कहते हैं। वे परमेश्वर की महान, महानतम और सबसे महान आशीषों के बारे में सिखाते हैं। मैं हर बार उनसे प्रश्न पूछता हूँ या ऐसी टिप्पणी करता हूँ जो शायद से वह व्यक्ति करता। अभ्यास करने के बाद, मैं उनसे दो दिन बाद फिर मिलने के लिए कहता हूँ - यह देखने के लिए कि वे कैसा कर रहे हैं।

सूची में से पाँच लोगों से मिलने के लिए मैं उन्हें पर्याप्त समय देना चाहता हूँ, लेकिन मैं इतना ज्यादा समय नहीं देना चाहता कि वे इसे छोड़ दें या भूल जाएं।

मैं हमेशा फोन नंबर या ईमेल या संपर्क में बने रहने के दूसरे माध्यम भी मांगता हूँ। मैं उनके साथ प्रार्थना करता हूँ कि परमेश्वर उन्हें सही शब्द दें जैसे उन्होंने मुझे दिये हैं।

हम दो दिनों के बाद फिर मिलते हैं और बात करते हैं कि प्रचार कैसे चल रहा है।

यदि उन्होंने शुरुवात नहीं किया है, तो मैं उन्हें और अभ्यास करने के लिए कहता हूँ। मैं उनके साथ उन पाँच लोगों में से किसी के भी पास चलने के लिए कहता हूँ। प्रचार करने के लिए मैं उनकी हर संभव सहायता करता हूँ।

लेकिन मैं उन्हें नई चीजें नहीं बताता। उन्होंने जो सीखा है, उसके प्रति विश्वासयोग्य बनने के लिए मैं उन्हें अच्छा अवसर देना चाहता हूँ।

यदि वे मना करते हैं या बहाने बनाते हैं, तो मैं परमेश्वर से पूछता हूँ, क्या यह 'अच्छी भूमि' है जो उनके राज्य के लिए फलदायी होगी या मुझे कही और निवेश करना चाहिए।

यदि वे प्रचार करते हैं - तो हम उत्सव मनाते हैं!

उस सूची में से कोई भी विश्वास न करने पर भी मैं उत्साहित होता हूँ कि उन्होंने सुना, आज्ञा मानी और प्रचार किया। यह विश्वासयोग्य बनना है। वे थोड़े में विश्वासी रहे, इसलिए उन्हें और ज्यादा बताने में मुझे खुशी होती है।

मैं बपतिस्मा के बारे में बताता हूँ और उन्हें उपयोग करने के लिए दूसरे माध्यम देता हूँ जैसे -- या -- । उनकी 100 लोगों की सूची में से कुछ और लोगों को चुनने के लिए कहें - जो लोग प्रभु यीशु को नहीं जानते या उनके शिष्य नहीं हैं।

फिर मैं उनके साथ उनकी कहानी, परमेश्वर की कहानी और परमेश्वर की आशीषों लेकर पहले की तरह अभ्यास करता हूँ। और हम प्रार्थना करते हैं। अब उनकी सूची में से कोई विश्वास करता है, तो हम सच में उत्सव मनाते हैं!

परमेश्वर का परिवार बढ़ रहा है! मैं हमेशा पूछता हूँ क्या उन्होंने महान, महानतम और सबसे महान आशीषों के बारे में बताया, क्योंकि यही परमेश्वर के परिवार को लगातार बढ़ाता है।

यदि उन्होंने परमेश्वर की आशीषों के बारे में नहीं बताया, तो हम इसे दोबारा बताते हैं, प्रभु यीशु का एक नया शिष्य एक सूची कैसे बना सकता है, वे अपनी कहानी को और परमेश्वर की कहानी को और आशीषों को कैसे बता सकते हैं - ताकि प्रभु यीशु के नये विश्वासी भी प्रचार करना सीखें।

अभ्यास के बाद, मैं उन्हें नये विश्वासी के पास वापस भेजता हूँ ताकि वे प्रचार करना जारी रखें। लेकिन उनके बारे में क्या जिन्होंने प्रचार किया और उन्होंने आशीषों के बारे में बताया और किसी ने विश्वास किया?

जब ऐसा होता है तब मैं आनंद से भर जाता हूँ।

परमेश्वर का वचन ऐसे व्यक्ति को "अच्छी भूमि" कहता है - जो परमेश्वर के परिवार को उससे कहीं ज्यादा बढ़ा सकते हैं जिस तरह से मैंने देखा है! मुझे जब भी ऐसा व्यक्ति मिलता है, मैं अक्सर उनसे मिलने की योजना बनाता हूँ। मैं उनके आत्मिक विकास में बहुत निवेश करता हूँ।

मैं नई पाठ सिखाता हूँ जैसे बपतिस्मा और तीन-तीन का समूह कैसे शुरु करना है। अब वे आत्मिक परिवार को बढ़ा सकते हैं - प्रभु यीशु के नये विश्वासियों के साथ शुरु करते हुए।

क्योंकि वे विश्वासयोग्य हैं, मैं उन्हें ज्यादा से ज्यादा बताने में और परमेश्वर के अगले कार्य को देखने में उत्साहित रहता हूँ। हमेशा, एक बार में एक कदम। हमेशा उन्हें सीखने, आज्ञा मानने और वे जो जानते हैं, उसे बताने का एक मौका देते हुए।

परमेश्वर का धन्यवाद देते हुए मैं इस व्यक्ति के लिए भी प्रार्थना करता हूँ - कि उन्होंने मुझे उसके साथ बाँटने और सीखने का अवसर दिया और हमेशा उनसे माँगता हूँ कि उन्हें उनकी सबसे महान आशीष दें।

चर्चा करें

(10 min)

  1. जब आपने पहली बार यीशु के पीछे चलना शुरुवात किया क्या यही स्वरुप (पैटर्न) आपको सिखाया गया था? यदि नहीं, तो क्या अलग था?
  2. आपके विश्वास में आने के बाद, कितना लम्बा समय लगा इसके पहले की आप दूसरों को शिष्य बनाएं?
  3. आप क्या सोचते है क्या होगा अगर नए अनुयायी दूसरों के साथ साझा करने और शिष्य बनाना शुरू करें, तुरंत?

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(5 min)

डकलिंग (बत्तख के चूजे) शिष्‍यत्‍व

जुमे ट्रेनिंग पर वाफस स्वागत है। इस सत्र हम सीखेंगे कि कैसे बत्तखों के बच्चे जो बस तैरना सीख रहे हो हमारी मदद कर सकते है शिष्य बनाने के दो सबसे महत्वफूर्ण सिद्धांत समझने में।

क्या कभी आपने बत्तख के बच्चों को बाहर शैर करते हुये देखा है।

चाहे आफ दुनिया में कहाीं भी हो, ये हमेशा एक सा ही दिखता है। एक बत्तख माता नेतृत्व करती है और उसके बच्चे उसके फीछे चलते है, एक एक करके सभी एक कतार में। माता बत्तख आगे चलती है, छोटी बत्तखें फीछे आती है।

पर यदि आप नज़दीक से भी देखें, आफ देखेंगे कि कुछ और भी हो रहा है। हर छोटी बत्तख एक ही समय पर दो भूमिकायें निभा रही है। हर छोटी बत्तख अनुयायी है, क्योंकि वो माँ बत्तख का अनुसरण कर रही है या एक और किसी बत्तख का जो ठीक उसके आगे चल रही है।

और एक ही समय - हर छोटी बत्तख स्वयं में नेता है। क्योंकी वो बत्तख के बच्चों को नेतृत्व कर रही है। (या बत्तख के चुजों का) जो उसके ठीक उसके पीछे चल रही है।

तो क्या एक बत्तख का चुजा अनुयायी है या नेता. ये दोनों ही है। इसलिये शैर पर जाती बत्तखों का बहुत संबंध है शिष्य बनाने से।

परमेश्वर चाहते है कि उनका परिवार दूर सुदूर बढ़े. इसलिये वो अफेक्षा करते है हर अनुयायी से नेता बनने की। हर विश्वासी साझा करने वाला हो. और हर शिष्य, शिष्य बनाने वाला हो एक ही समय फर।

एक फंदा जिसमें हम फंसते है शिष्य और शिष्य निर्माता के रूप में वो है ये झूठा विश्वास कि हमें सबकुछ जानने की जरूरत है या बहुत सी बातें जानने की जरूरत है, इससे पहले कि हम कुछ साझा कर सकें।

पर शिष्यता इस तरह काम नहीं करती। शिष्य बत्तख के बच्चों की तरह होते है। नेता बनने के लिये उन्हें हर कुछ जानने की जरूरत नहाीं. उन्हें बस एक कदम आगे चलना है।

परमेश्वर चाहते है कि उनका फरिवार वफादारी में बढे़ । इसलिये वो अपेक्षा करते है कि हर नेता एक अनुयायी हो । हर साझा करने वाला विश्वासी हो. और हर शिष्य निर्माता एक शिष्य हो एक ही समय फर ही.

एक और फंदा जिसमें हम फंसते है शिष्य और शिष्य निर्माताओं के रूप में, ये झूठा विश्वास कि कोई कहीं सबकुछ जानता है. और यदि हम उन्हें ढूंढें और उनके पीछे चलें फिर हमें सेट है.

पर इस तरह भी शिष्यता काम नहीं करती. परमेश्वर के राज्य में केवल एक ही माँ बत्तख है जिसका हम सब अनुसरण करते है और वो है प्रभु यीशु मसीह। कोई मिशनरी नहाीं, कोई पॉस्टर नहीं, कोई सेमिनरी प्रोफेसर नहीं, केवल प्रभु यीशु ही हमारे विश्वास की पूरी मात्रा के हकदार है।

बाकी के हम सब प्रक्रिया में है। हमेशा कोई न कोई प्रभु यीशु के करीब होगा जिसके फीछे हम चल सकते है। और कोई बहुत ही दूर होगा जिसका हम नेतृत्व कर सकते है। पर चाहे हमारी स्थिति कोई भी हो फर हमारे आंखें, हमारे हृदय हमेशा पूरी तरह प्रभु यीशु फर लगी रहनी चाहिये।

बाईबल में पौलुस जिसने नये नियम का ज्यादातर भाग लिखा है। और उसने ही बहुत ही प्रथम कलीसियायें शुरू की। उसने बस ये ही नहीं लिखा - मेरे फीछे हो लो। उसने लिखा - मेरे फीछे हो लो जैसे मैं प्रभु यीशु के फीछे चलता हूं। पौलुस वो जानता था जो हर स्थान फर बत्तख के बच्चे जानते है। और जिसे हर शिष्य को जानने की जरूरत है। परमेश्वर के राज्य में हर नेता को एक अनुसरणकर्ता होने की जरूरत है। और हम सब प्रभु यीशु का अनुसरण करते है।

बाईबल में पौलुस ने ये भी लिखा - जो बातें तूने बहुत से गवाहों के सामने मुझसे सुनी है उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दें जो दूसरो को भी सिखाने के योग्य हो। पौलुस वो जानता था जो सब जगह की बत्तखों के चूजे जानते हो और जिसे हर शिष्य को भी जानने की जरूरत है। परमेश्वर के राज्य में हर अनुयायी को नेता होने की जरूरत है। हर हम सबको प्रभु यीशु की तरह नेतृत्व करना चाहिये। दूसरों के लिये अपना जीवन कुर्बान करके।

यदि आफ परमेश्वर के परिवार को दूर तक बढ़ते रहना देखना चाहते है और विश्वास में बढ़ना तब शिष्यों को बनाने के बारे में सोचिये बत्तख के चूजों की तरह। बन जाईये अनुयायी और नेता एक ही समय फर।

चर्चा करें

(10 min)

  1. शिष्यत्व का वह कौन सा एक क्षेत्र है (बाइबल को पढ़ने/समझने, प्रार्थना करना, परमेश्वर की कहानी साझा करना, आदि) जिसके बारे में आप अधिक जानना चाहते हैं? वह कौन है जो आपको सीखने में मदद कर सकता हैं?
  2. वह कौन सा शिष्यत्व का क्षेत्र है जो आपको लगता हैं की आप दूसरों के साथ साझा कर सकते हैं? वह कौन हैं जिसके साथ आप साझा कर सकते हैं?

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(5 min)

आंखें यह देखने के लिए कि राज्य कहां नहीं है

इस सत्र में, हम सीखेंगे कि शिष्य दूर तक और तेजी से कैसे बढ़ते हैं, जब वे देखना शुरु कर देते हैं कि परमेश्वर का राज्य कहाँ नहीं है।

मनुष्य के रूप में, हम उन चीजों को सोचते हैं, ध्यान देते हैं और उनके लिए काम करते हैं जिसे हम देखते हैं। जिस तरह से चीजें हैं उसे हम वास्तविकता कहते हैं। लेकिन जब हम उन चीजों पर ध्यान देते हैं जिन्हें हम नहीं देख सकते, तो राज्य तेजी से बढ़ता है। चीजें जो वहाँ पर नहीं हैं या अब तक वहाँ नहीं हैं।

हमारे आस-पास ऐसी जगहें हैं जहाँ परमेश्वर की इच्छा उस तरह से पूरी नहीं होती जैसे स्वर्ग में होती है - विशाल रिक्त स्थान जहाँ टूटापन, दर्द, सताव, कष्ट और मृत्यु सामान्य रूप से प्रतिदिन के जीवन का हिस्सा हैं।

हर शिष्य - प्रभु यीशु के हर अनुयायी को - यह देखना जरूरी है कि परमेश्वर का राज्य कहाँ है, और कहाँ नहीं है।

राज्य का कार्य - रिक्त स्थानों और अंधेरे स्थानों में प्रवेश करने और गहरी खाई को भरने तथा पृथ्वी पर अपने समय के दौरान प्रकाश और जीवन लाने बारे में है।

दो तरीकों से हम देख सकते हैं कि परमेश्वर का राज्य कहाँ नहीं है - जिन्हें हम जानते हैं और जिनसे हम अब तक नहीं मिले हैं।

पहला तरीका है जिन्हें हम पहले से जानते हैं, उनके द्वारा - दोस्तों, परिवारवालों, सहकर्मियों, सहपाठियों, और पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध।

इस तरह से परमेश्वर की कहानी सबसे तेजी से आगे बढ़ती है। हम लोगों से प्रेम करते हैं और उनकी चिंता करते हैं क्योंकि हम पहले से ही उन्हें जानते हैं। यह स्वाभाविक है।

प्रभु यीशु ने एक स्वार्थी अमीर आदमी की कहानी बताई - जो जीवन में अक्खड़ था पर अब उसे नरक में दंड मिल रहा है। अमीर आदमी ने विनती की -"लाजर को मेरे पिता के मेरे घराने में भेज दिजिए। उसे मेरे पाँच भाईयों को चिताने के लिए कहें, ताकि वे इस भयानक जगह पर न पहुँचें।"

प्रभु यीशु ने हमें दर्शाया कि स्वार्थी और कष्ट उठानेवाले लोग भी अपने करीबी लोगों से कैसे प्रेम करते हैं और उनकी चिंता करते हैं।

जिन लोगों को हम जानते हैं वह हमारे जीवन में इसलिए है क्योंकि परमेश्वर हमसे प्रेम करते हैं और वह चाहते हैं कि हम उनसे प्रेम करें। प्रेम, धीरज और दृढ़ता के साथ हमें उन संबंधों का रखवाला होना चाहिए।

शिष्य तब बढ़ते हैं जब वे अपने आस-पास परमेश्वर के द्वारा रखे गए लोगों की चिंता करते हैं और इस बारे में कुछ करने के लिए उनके पास योजना है।

आप उनकी देखभाल को बढ़ाने में सहायता कर सकते हैं और कुछ तरीकों से बढ़ने की एक सरल योजना बना सकते हैं। इस तरह से - 100 लोगों की सूची बनाएं जिन्हें वे पहले से जानते हैं। उन सूची को 3 भागों में बाँटें :

  • जो प्रभु यीशु के शिष्य हैं।
  • जो प्रभु यीशु के शिष्य नहीं हैं।
  • जिनके बारे में वे पक्का नहीं जानते कि वे शिष्य हैं या नहीं।

अनुनायियों को और भी ज्यादा फलदायी और विश्वासयोग्य बनाने के लिए शिष्य उन्हें तैयार कर सकते हैं और उत्साहित कर सकते हैं। जो अनुयायी नहीं हैं, उनके लिए - शिष्य सीख सकते हैं कि उन्हें प्रेमी परमेश्वर के बारे में कैसे बताएं। जिनके बारे में वे निश्चित नहीं हैं - शिष्य उनके साथ अपना ज्यादा समय बितायें और उनके बारे में और ज्यादा जानें।

जिनसे हम नहीं मिले हैं उन में हम यह देखते हैं कि परमेश्वर का राज्य कहाँ नहीं है। हमारे संबंधों से बाहर भी लोग हैं - वे लोग जिन्हें हम नहीं जानते, पड़ोसी जिनसे "नमस्ते" से ज्यादा हमने कभी कुछ नहीं कहा, व्यवसायी और महिलाएँ जिन्हें हम सड़कों पर देखते हैं, हर गाँव, नगर या शहर में अजनबी, जिनसे हम अब तक नहीं मिले।

प्रभु यीशु ने कहा है - सभी देशों को शिष्य बनाओ। प्रभु यीशु ने कहा है - यरूशलेम, यहूदा, सामरिया और पृथ्वी की छोर तक तुम मेरे गवाह ठहरोगे। जिन लोगों को हम जानते हैं उन्हें बताने से परमेश्वर की कहानी बहुत तेजी से आगे बढ़ेगी। जिन लोगों को हम नहीं जानते उन्हें बताने से परमेश्वर की कहानी दूर तक पहुँचेगी।

जिन्हें हम नहीं जानते उनसे हम प्रेम करें और उनकी चिंता करें, तो यह स्वाभाविक नहीं, बल्कि दैवीय है और यह हमारे जीवन में पवित्र आत्मा का प्रमाण है। छोटे, आखिरी और खोए हुए परमेश्वर के प्रिय जन हैं। उनके लिए वह बार-बार अपना हृदय ऊँडेलते हैं।

यदि हमें परमेश्वर की तरह बनना है, तो हमें उनमें अपना जीवन निवेश करने की जरूरत है। परमेश्वर हमें जाने की आज्ञा देते हैं। और हमें केवल नजदीकी लोगों तक नहीं जाना है बल्कि उन लोगों तक भी पहुँचना है जो दुनिया के आत्मिक अंधकारमय क्षेत्रों में रहते हैं - ऐसे लोग जिन्होंने कभी प्रभु यीशु का नाम तक नहीं सुना है।

परमेश्वर का वचन कहता है - परमेश्वर घमंडी का विरोध करते हैं परंतु दीन पर अनुग्रह करते हैं। प्रभु यीशु के शिष्यों के रूप में हमें अवश्य ही - दीन, निराश और खोए हुए लोगों पर दया करनी चाहिये जैसे वह हम पर दया करते हैं। शिष्य तब बढ़ते हैं जब वे उन लोगों के बारे में चिंता करते हैं जिन्हें परमेश्वर ने उनके जीवन में रखा है। शिष्य तब और ज्यादा बढ़ते हैं जब वे उन लोगों की चिंता करते हैं जिन्हें परमेश्वर ने उनके करीब नहीं रखा है, लेकिन फिर भी उन्हें एक योजना बनाने की जरूरत है।

आप दूसरों के बारे में चिंता कराने के द्वारा एक शिष्य को बढ़ने में सहायता कर सकते हैं और इसके लिए सरल योजना भी बना सकते हैं - उन्हें प्रशिक्षित करने के द्वारा, उन लोगों को ढूँढने के लिए जिन्हें सुनने के लिए परमेश्वर ने पहले से तैयार कर रखा है।

प्रभु यीशु ने कहा है - जब तुम किसी घर में जाओ तो कहना, "परमेश्वर इस घर में शांति दें।" यदि वहाँ पर रहनेवाले लोग शांतिप्रिय हैं, तो तुम्हारी प्रार्थना से उन्हें शांति और आशीष मिलेगी। वरना तुम्हारी प्रार्थना तुम्हारे पास लौट आएगी।"

हम उस व्यक्ति को बुलाते हैं जिसे परमेश्वर ने पहले से तैयार किया है - शांति का व्यक्ति - जो परमेश्वर के संदेश के प्रति जिम्मेदार है और आज्ञा मानने तथा इसे दूसरों को बताने बांटने में विश्वासयोग्य है। जहाँ हम कुछ लोगों को ही जानते हैं, वहाँ अपने दोस्तों, परिवार वालों, सहकर्मीयों, सहपाठियों और पड़ासियों को इसे बॉंटने के बजाय, हम शांति के व्यक्ति को प्रशिक्षित करते हैं कि उसे दूसरों तक कैसे पहुँचना है।

लेकिन सबसे अच्छा परिणाम तब मिलता है जब हम विश्वासयोग्यता पर ध्यान देते हैं। याद रखिये परमेश्वर की आज्ञा मानने और इसे दूसरों को बताने के द्वारा विश्वासयोग्यता दिखाई देती हैं । विश्वासयोग्य लोग - आज्ञा मानते हैं और इसे दूसरों के साथ बाँटते हैं, वे अच्छी भूमि के समान है जिसके बारे में प्रभु यीशु ने बताया।

प्रभु यीशु ने कहा है - कुछ बीज अच्छी भूमि पर गिरे, जिससे तीस गुना या साठ गुना या सौ गुना फसल आयी।

  • विश्वासयोग्य लोगों के पास कठोर हृदय नहीं होता जो परमेश्वर के वचन को नकार दें।
  • जब उन पर सताव होता है या जब कठिन समय आता है, तो विश्वासयोग्य लोग पीछे नहीं हटते।
  • विश्वासयोग्य लोग इस विश्व की चिंता या नाश हो जानेवाले धन के द्वारा अपना ध्यान भटकने नहीं देते।
  • विश्वासयोग्य लोग गिरासेनियों के देश में दुष्टात्मा से ग्रस्त उस व्यक्ति के समान हैं जिसने आज्ञा मानी और प्रभु यीशु ने उसे जो दिखाया था उसे दूसरों को बताया।

एक विश्वासयोग्य व्यक्ति जिसने आज्ञा मानी और इसे दूसरों बताया, उसने बहुत से लोगों को उत्पन्न किया जो प्रभु यीशु को और ज्यादा जानना चाहते थे।

अपनी आँखे खोलकर यह देखने से कि राज्य कहाँ पर नहीं है तथा जिन्हें हम जानते हैं उनके द्वारा अनजान लोगों तक पहुचने से - शिष्य बढ़ते हैं और परमेश्वर का राज्य तेजी से दूर तक फैलता है।

चर्चा करें

(10 min)

  1. आप किसके साथ साझा करने में आरामदेह महसूस करते है — लोग जिन्हें आप पहले से जानते हैं या फिर लोग जिन्हें आप अभी तक नहीं मिले?
  2. आपको ऐसा क्यों लगता है?
  3. जिन लोगों के साथ आप सहज नहीं हैं उन लोगों के साथ शेयर (सांझा) करने में आप बेहतर कैसे हो सकते हैं?

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(5 min)

प्रभु भोज और इसकी अगुवाई कैसे की जाएं

प्रभु यीशुने कहा- " जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूँ। यदि कोई इस रोटी मेंसे खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।"

पवित्र समन्वय या "परमेश्वर का भोजन" हमारे आन्तरिक जुड़ाव और प्रभु यीशु के साथ संबंध के उत्सव का एक तरीका है।

यहॉ उत्सव मनानेका एक सरल तरीका है--

जब आप प्रभु यीशु के अनुयायी के रूपमें इकटठा होते है, शांति ध्यान में समय व्यतीत करे, चुपचाप विचार करे और अपने पापोंको स्वीकार करे।

किसीसे धर्म पुस्तिका से इस अध्याय को पढने को कहे-- " क्योकि यह बात मुझे प्रभुसे पहुंची, और मैने तुम्हे भी पहुंचादी, कि प्रभु प्रभु यीशुने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली, और धन्यवाद करके उसे तोड़ी और कहा, "कि ये मेरी देह है, तो तुम्हारे लिये है, मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।" (1 कुरिन्थियो-अध्याय 11:23-24)

वो रोटी निकाले जो आपने अपने और अपने दल के खाने के लिये अलग रखी थी।

पढ़ना जारी रखे--" इसी रीतिसे उसने बियारी के पीछे कटोरो भी लिया, और कहा, यह कटोरा मेरे लोहू में नईवाचा है, जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।" (1 कुरिन्थियों 11:25)

रस या वाइन बांटें जो आपने अपने और अपने दल के पीने के लिये अलग रखी थी।

पढ़ना समाप्त करे- " क्योंकि जब तुम सह रोटी खाते, और इस कटोरेमें से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जबतक वह न आए, प्रचार करते हो।" (1 कुरिन्थियो 11:26)

आपने परमेश्वर का भोजन बांट लिया।

प्रार्थना करके या गाना गाकर उत्सव मनाये-आप उनके है और वो आपके है।

परमेश्वर का भोजन-पहले कलुसियेका एक पवित्र अनुष्ठान और Zume Toolkit का एक अनिवार्य भाग है।

गतिविधि

(10 min)

प्रभु भोज

QR कोड को स्कैन करें।

अगले 10 मिनट अपने समूह के साथ प्रभु भोज को लेने में बिताएं ।

जब आप यीशु के अनुयायी के रूप में इकट्ठा होते हैं:

  1. तो शांत ध्यान में समय बिताएं, चुपचाप विचार करें और अपने पापों को कबूल करें।
  2. जब आप तैयार हों, तो किसी को इन छंदों को पढ़ने के लिए कहें - क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। और धन्यवाद करके उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है। मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 1 कुरिन्थियों 11:23-24
  3. जिस रोटी को आप अपने समूह के लिए अलग रखा है उसे पारित करें, और खाएं।
  4. पढ़ना जारी रखें - इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है। जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 1 कुरिन्थियों 11: 25
  5. अपने समूह के लिए जो रस आपने अलग रखा है उसे साझा करें, और पीयें।
  6. आखिरी भाग पढ़ें - क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 1 कुरिन्थियों 11:26

प्रार्थना या गायन में जश्न मनाएं। आपने प्रभु भोज में भाग लिया है। आप उसके हैं, और वह आपका है!

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणाएँ:

इस सत्र में सुने गए उपकरण:

  • सबसे महान आशीष को प्रक्षेपित करने का दर्शन
  • डकलिंग (बत्तख के चूजे) शिष्यत्व - तुरंत अगुवाई करना
  • आंखें यह देखने के लिए कि राज्य कहां नहीं है
  • 3-मिनट की गवाही तैयार करें
  • प्रभु भोज और इसकी अगुवाई कैसे की जाएं

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

इस सप्ताह अपनी 3 मिनट की गवाही का अभ्यास करने में समय बिताएं, और फिर इसे अपनी 100 की सूची में से कम से कम से एक व्यक्ति के साथ साझा करें जिन्हें आपने “अविश्वासी” या “अज्ञात” के रूप में चिन्हित किया हैं।

साझा करें

परमेश्वर से पूछे की वह आपको किसे 3 मिनट की गवाही उपकरण के द्वारा प्रशिक्षित करना चाहता है। जाने से पहले समूह के साथ इस व्यक्ति का नाम साझा करें।

सत्र 5

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 6542

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना करें और परमेश्वर को धन्यवाद दें कि वह अपने लोगों की गवाही के माध्यम से किस तरह काम करता है। आपके साथ बिताए हुए समय की अगुवाई करने के लिए उसके पवित्र आत्मा को आमंत्रित करें।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • शांति का मनुष्य और उसे कैसे खोजें
  • BLESS प्रार्थना पैटर्न
  • प्रार्थना चलन और इसे कैसे करना है

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(5 min)

प्रार्थना चलन

परमेश्वर के उपदेश कहते है कि हमे "याचिका प्रार्थना" करनी चाहिये, रक्षा के लिये और सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहिये, राजाओ के लिये और उन सभीअधिकारियो का--जिससे हम पूरी तरहसे धार्मिकता और पवित्रता में शांतिपूर्ण और संपूर्ण जीवन जी सके। ये अच्छा है, और हमारे उद्धारक परमेश्वर को प्रसन्न करता है, जो चाहते है कि समस्त लोग सुरक्षित रहे और सत्यता के ज्ञानको समझे''

प्रार्थना करते रहना एक सरल तरीका है दूसरों के लिये प्रार्थना के आदेशोंका पालन करने के लिये। घूमकर प्रार्थना करने का अर्थ बिल्कुल इसके नाम जैसाही है। -आसपास घूमते हुये परमेश्वर से प्रार्थना करना।

बजाय अपनी आंखे बंद करके और अपना सिर झुकाकर, हमें अपनी आंखे खुली रखनी है ताकि अपने आसपास देख सके और हमारे हृदय को झुकाकर विनम्रता से परमेश्वर के हस्तक्षेप के लिये कहना है।

आप दो या तीन छोटे समूहो में घूमकर प्रार्थना कर सकते है या आप स्वयंभी घूमकर प्रार्थना कर सकते है।

यदि आप एक समूह में जाते है-कोशिश करे कि हर एक जोरसे प्रार्थना करे, परमेश्वर के साथ बातचीत करे कि हर कोई क्या देख रहा है और क्या महसूस कर रहा है जो परमेश्वर उनके हृदय में लाते है।

यदि आप स्वंय जाते है-चुपचाप प्रार्थना करे या जोर से करे यदि आप किसीसे उस दौरान मिलते है।

यहॉ चार तरीके है जिससे आप जान सकते है कि घूमते हुये प्रार्थना करने के दौरान क्या प्रार्थना करनी है।

  • अवलोकन--आप क्या देखते है? यदि आप एक मैदान में एक बच्चे का खिलौना देखते है, तो आप पड़ौसी के बच्चे के लिये प्रार्थना करने के लिये प्रोत्साहित हो सकते है, या परिवार के लिये या उस जगह के विद्यालयों के लिये।
  • अनुसंधान--आप क्या जानते है? यदि आप अपने पड़ौसी के बारें में पढ़ें, तो आप वहाँ रहने वाले व्यक्तियों के बारे में कुछ जान सकते है, या ये कि वो जगह किसी अपराध या अन्याय से पीड़ित है इन वस्तुओं के बारे में प्रार्थना करे और परमेश्वर को कार्य करने को कहे।
  • उद्घोषणा--पवित्र आत्मा शायद आप के हृदय को हल्कासा धक्का दे या आप के मस्तिष्क में कोई विचार लाये एक विशेष जरूरत के लिये या उस स्थान की प्रार्थना करने के लिये। सुनो-और प्रार्थना करे।
  • धर्मपुस्तिका--हो सकता है आप परमेश्वर के शब्दों के अंश को पढ़े जब आप घूम रहे हों या जैसे ही आप घूमे, पवित्र आत्मा आप के विचारों में एक धर्म पुस्तिका लाये। उस अध्याय के बारे में प्रार्थना करे और हो सकता है इससे उस स्थान के व्यक्तियों पर इसका प्रभाव पड़े।

यहाँ प्रभाव डालने के पांच स्थान है जिन पर आप अपनी घूम कर प्रार्थना करने के दौरान ध्यान दे सकते हैः

  • सरकार--सरकारी केंद्रो को ढूंढे और उन में प्रार्थना करे जैसे कि अदालतें, आयोग सदन या कानून सस्ंथापक कार्यालयों में। प्रार्थना करे उस स्थान की सुरक्षा के लिये, न्याय के लिये और उनके अगुवाओं की धार्मिक बुद्धिमता के लिये।
  • व्यापार और लेखा जोखा-व्यापारिक केंद्रोंको ढूंढे और उनमें प्रार्थना करे जैसे कि वित्तीय जिले या बाजार क्षेत्रों में। प्रार्थना करें उन संसाधनों के धार्मिक निवेश और अच्छे प्रबन्ध के लिये। प्रार्थना करे आर्थिकन्याय और सुअवसरो और उदार और धार्मिक दाताओं के लिये जो लाभ से पहले व्यक्तियों को रखते है।
  • शिक्षा--शैक्षिक केन्द्रोको ढूंढे और उनमें प्रार्थना करे जैसे कि विद्याालय और प्रशासनिक भवन, व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द, सामुदायिक महाविद्यालय और विश्वविद्यालय। प्रार्थना करें न्याय परायण शिक्षको के लिये कि वो परमेश्वर की सत्यताको पढ़ायें और अपने विद्यार्थियों के विचारों की रक्षा करें। प्रार्थना करे कि परमेश्वर झूठ और दुविधाको प्रोत्साहित करनेवाले प्रत्येक प्रयास में हस्तश्रेप हस्तश्पे करेंगें। प्रार्थना करें कि इन समस्त स्थानोंसे बु़ध्दिमान नागरिक निकलेंगें जिनके पास सेवा और अगुवाई करने के लिये एक हृदय हो।
  • संपर्क--संचार केन्द्रो को ढूंढे और उनमें प्रार्थना करे जैसे रेडियोस्टेशन, टेलीविजन और समाचारपत्र प्रकाषक। प्रार्थना करे परमेश्वर के उपदेशों और उनके अनुयायियों की गवाहियों के लिये कि उनका शहर और विश्वभर में प्रसार हो। प्रार्थना करे कि उनका संदेश उनके माध्यम से लोगों के पहुँचे ताकि हर एक स्थान पर परमेश्वर के लोग परमेश्वर के कार्यको देखेंगें ।
  • आध्यात्मिकता-- धार्मिक केन्द्रोंको ढूंढे और उनमें प्रार्थना करे जैसे कलुसिया भवर, मस्जिद या मंदिर। प्रार्थना करे कि प्रत्येक धार्मिक साधक प्रभु यीशुमें शांति और सुख को प्राप्त करेंगें और किसीभी झूठे धर्म द्वारा असंमजस या विचलित नाहो पायें।

अंततः ये है पांच तरीके जिससे आप व्यक्तियों के लिये प्रार्थना कर सकते है जिनसे आप घूमते हुये प्रार्थना करने के दौरान मिलते है।

जब आप घूमते है और प्रार्थना करते है, तो सुअवसरो के लिये तैयार रहे और सुने परमेश्वर की आत्मा द्वारा व्यक्तिगत और समूह में प्रार्थना करते हुये प्रोत्साहन पाने के लिये, जिनसे आप रास्तेमें मिलते है। आप कह सकते है, "हम इस समुदाय के लिये प्रार्थना कररहें हैं, क्या इसमें कोई विशेष मुद्दा है जिसके लिये हम आपके बारें में प्रार्थना कर सकें?" या कहे, "मैं इस स्थाान के लिये प्रार्थना कर रहा हूँ। क्या आप इसके बारे कुछ विशेष बात जानते है जिसके लिये हमें प्रार्थना करनी चाहिये?" उनके प्रतिक्रिया सुनने के बाद उनसे उनकी अपनी जरूरतों के बारेमें पूछ सकते है। यदि वो बताते है, उसी समय उनके लिये प्रार्थना करे। यदि परमेश्वर अगवाई करते है, आप उसीतरह अन्य जरूरतो के बारेमें प्रार्थना करे।

प्रार्थना करने के पांच विभिन्न तरीको याद रखने के लिये BLESS शब्दका उपयोग करेः

  • Body (स्वास्थ्य)
  • Labor (कार्यऔरवित्त)
  • Emotional (मनोबल)
  • Social (संबंध)
  • Spiritual (आध्यात्मिकता)

अधिकतर मामलो में, लोग आभारी है कि आप प्रार्थना करने में पर्याप्त ध्यान रखते है।

यदि कोई व्यक्ति इसाई नही है, हो सकता है आपकी प्रार्थना एक आध्यात्मिक संपर्क करनेका द्धारा खोलदें और आपकी और परमेश्वर की कहानी बताने का सुवअसर प्रदान करे। आप उन्हे बाइबल अध्ययन के लिये आमंत्रित कर सकते है या उनमें से किसी के घर भी जा सकते है।

यदि व्यक्ति एक ईसाई है आप उन्हे अपनी घूमतेहुये प्रार्थना करने में सम्मिलित होने के लिये आमंतित्र कर सकते है या उन्हे प्रशिक्षित कर सकते है कि कैसे वो घूमकर प्रार्थना कर सकते और सरल तरीको के इस्तेमाल कर सकते है जैसे कि प्रोत्साहित क्षेत्रों के लिये प्रार्थना करना या BLESS प्रार्थना कर परमेश्वर के परिवारको और भी अधिक बढ़ाना।

घूमकर प्रार्थना करना Zume Toolkit का एक और अन्य सरल साधन है।

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(5 min)

शांति का मनुष्य

वाफस स्वागत है जुमे ट्रेनिंग पर एक कल्याणकारी व्याक्ति तेजी से मदद कर सकता है शिष्य बनाने में एसी जगह भी जहां प्रभु यीशु के अनुयायी बहुत ही कम या एक्का दुक्का हों ।

जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को नये क्षेत्रों में भेजा शिष्य बनाने के लिये, उन्होंने उन्हें एक सरल और बहुत ही महत्वफूर्ण आज्ञा दी ।

प्रभु यीशु ने कहा - इसलिये न बटुआ, न झोली, न जूते लो, और न मार्ग में किसी को नमस्कार करो । जिस किसी घर में जाओ पहले कहो - इस घर फर कल्याण हो यदि वहां कोई कल्याण के योग्य होगा तो तुम्हारा कल्याण उस फर ठहरेगा न ही तो तुम्हारे पास लौट आयेगा । उसी घर में रहो और जो कुछ उनसे मिले वही खाओ पीओ । क्योंकि मजदूर को अपनी मजदूरी मिलनी चाहिये । घर घर न फिरना ।

पर इस सबका क्या मतलब है ?

जब हम शिष्य बनाने की सोचते है । हमारा पहला विचार शायद हो । बेहतर होगा हम अपनी आर्थिक स्थिति सही कर लें । एक जाहिर लक्ष्य को चुनें, और एक स्पष्ट कार्यप्रकिया रखें । यदि प्रभु यीशु ने कहा - जाओ, तो बेहतर है आप जायें और चलते रहें । सबको बताएं! सब जगह! सारा समय.

पर प्रभु यीशु अपने निर्देश देते समय लगता था कम ही चिंता करते है रूपयें पैसे की और उत्साह की । और उन्हें कहीं ज्यादा ख्याल था केंद्रित होने का ।

प्रभु यीशु चाहते थे कि उनके चेले ढूंढें और निवेश करें एक कल्याणकारी व्याक्ति में ।

यदि आफ ऐसे स्थान फर शिष्य बनाना चाहें जहां ज्यादा या कोई भी ना हो । फिर एक कल्याणकारी व्याक्ति की तलाश आपके लिये सबसे महत्वपूर्ण बात होगी ।

एक कल्याणकारी व्याक्ति वो है ।

  • जो आपकी कहानी, परमेश्वर की कहानी और प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनने का इच्छुक हो ।
  • कोई जो अतिथि सत्कार करने वाला हो, और आपका अपने घर में स्वागत करे या अपने कार्यस्थल पर या अफने परिवार और मित्रों के साथ आपके समारोह में शामिल हो ।
  • कोई जो अन्य लोगों को जानता हो । (या दूसरों में प्रसिद्ध हो) और जो उत्साहित हो एक छोटे से समूह को या भीड़ को भी इकट्ठा करने में ।
  • कोई जो वफादार है उसे साझा करने में अन्य लोगों के साथ जो भी वो सिखता है । आपके जाने के बाद भी ।

बाईबल में हम पाते है कि प्रभु यीशु और उसके चेले कल्याणकारी व्याक्तियों से मिलते है जो थोड़े अफेक्षारहित है ।

गन्नेसरत के क्षेत्र में प्रभु यीशु मिलते है दुष्टात्माग्रस्त व्याक्ति से जो अकेला रहता था और जंजीरों में बंधा था । हम कभी भी उसके बारे में कल्याणकारी व्याक्ति के रूफ में सोच भी नहाीं सकते । पर वो प्रभु यीशु को सुनने के प्रति उत्सुक था । वो उसने अतिथि सत्कार किया और प्रभु यीशु को जहां वो रहता था स्वागत सहित बुलाया । वो मशहूर था और वो आसानी से भीड़ को खाींच सकता था । चाहे वो अपने उपद्रवी व्यवहार के कारण ही । और प्रभु यीशु ने पाया कि वो वफादार है और उसने वो सब साझा किया जो मायने प्रभु यीशु उसके लिये रखते थे अपने फरिवार के साथ, अपने समुदाय के साथ, और अपने पूरी जाति के साथ । असल में जब प्रभु यीशु उस क्षेत्र में वापस लौटे, एक बड़ी भीड़ जमा हो गई, और वो बहुत उत्साहित थे उस व्याक्ति को देखने को जिसके बारे में उन्होंने इतना सुना था ।

सामरिया में प्रभु यीशु कुएं फर एक स्त्री से मिले. वो प्रभु यीशु के प्रति उत्सुक थी और राजी थी अतिथि सत्कार के लिये और पानी पीने के उनके अनुरोध को पूरा करने के लिये । हम पाते हैं कि उसके पांच पति थे और वो अभी भी एक किसी और मनुष्य के साथ रह रही थी । तो एक छोटे से शहर में यकीनन दूसरे लोग उसे जरूर जानते । और उसके साथ यीशु के वार्तालाफ के बाद, वो वफादार रही और उसने साझा किया इतना ज्यादा और इतना जल्दी कि पूरा शहर ने प्रभु यीशु से कहा कि उनके पास रहे और उनके साथ भी साझा करें । और उन्होंने ऐसा किया ।

इसलिये यदि एक कल्याणकारी व्याक्ति कहीं भी रह सकता है, कुछ भी कर सकता है । और शायद वो कोई भी हो सकता है जिसे हम जानते हों या हम मिलें. हम उसे कैसे ढूंढें ?

यहां तीन सरल तरीकें है ।

हम समाज के लोगों से उसकी सिफारिश मांगें । यहां भरोसे के लायक कौन है ? क्या इस जगह ऐसा कोई है जो अपने से पहले दूसरों के बारे में सोचता है ? यदि हम एक ही नाम बार बार सुनें, तो हम उन्हें मिलने की कोशिश करें, उनके साथ आात्मिक विचार साझा करें. और देखें कि क्या वो सुनने और साझा करने को उत्सुक है ।

हम स्वयं को पेश कर सकते है किसी के लिये प्रार्थना करने के लिये. तब जब हम प्रार्थना के चलन में हो । या काम के स्थान पर या किसी खेल के समय । जहां कहीं भी अवसर हो और फिर उस प्रार्थना को बदल दें एक आात्मिक वार्तालाप में ।

हम आात्मिक विचारों को प्रस्तुत करें हर वार्तालाफ में ये देखने के लिये कि क्या परमेश्वर किसी व्याक्ति के जीवन में कार्य कर रहे हैं । यदि वो उत्सुक है और इच्छुक है फिर हम उनसे पूछें कि क्या वो राजी होंगे एक समूह को इकट्ठा करने के लिये ताकि और विचार विमर्श किया जा सके ।

सिफारिशें मांगें । प्रार्थाना का प्रस्ताव रखें । आात्मिक विचारों का समावेश करें । ये सब वो तरीकें है जिन्हें आफ आरंभ कर सकते है कल्याणकारी व्याक्ति ढूंढने के लिये ।

चाहें हम कैसे भी ढूंढें । याद रखें प्रभु यीशु ने कहा - कल्याणकारी व्याक्ति वो व्याक्ति है जिसके साथ हमें ज्यादा से ज्यादा अपना शिष्य बनाने का समय बिताना चाहिये ।

आसानी से ये सोचा जा सकता है कि हमारे लिये अपने समय का वाजिब इस्तेमाल सबसे ज्यादा ये है कि हर एक को अपना स्वयं बराबर अर्पित करें. पर प्रभु यीशु ने कहा और दिखाया कि वो नहाीं चाहते कि हम सबके साथ उथले रूफ में रहे फर कुछ को गहराई से दें ।

प्रभु यीशु अकसर भीड़ को आकर्षित करते थे । पर बाइबल हमें बार बार बताती है - प्रभु यीशु उस भीड़ से अलग हट जाते अपना ज्यादातर समय अपने बारह सबसे करीबी अनुवायियों के साथ बिताने के लिये । बहुत बार ऐसा होता जहां प्रभु यीशु अपना ज्यादा समय निवेश करते उससे भी छोटे तीन के समूह के साथ ।

प्रभु यीशु जिनके पास कहीं ज्यादा सामर्थ, कहीं ज्यादा ऊर्जा, कहीं ज्यादा अधिकार, अनुशासन, बुध्दिमत्ता, ज्ञान, समझ और करूणा थी, उन्होंने चुना कि अपना समय बस कुछ के साथ ही गहराई से निवेश करे । और उन्होंने अपने शिष्यों को ऐसा ही करने को कहा । क्या इससे तुक नहाीं बनता कि हम उनका अनुसरण करें और उनकी इस विशुध्द शैली को साझा करें ?

कल्याणकारी व्याक्ति ।

उनका मिलना आसान नहीं । शायद हजारों में एक हो । फर एक छुपे हुये खजाने की तरह जिसकी तलाश वाजिब है । उनका मूल्य परमेश्वर के परिवार को बढ़ाने के लिये मांपा नहीं जा सकता ।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या कोई जिसकी “बुरी प्रतिष्ठा है" (सामरी औरत या दुष्ट-आत्मा ग्रस्त गिरासेनियों का व्यक्ति) वास्तव में कल्याणकारी व्यक्ति हो सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
  2. आपके नजदीक में कौनसा समुदाय या समाज का वर्ग है जिसमें परमेश्वर के राज्य की उपस्थिति बहुत कम (या नहीं) दिखाई देती हैं?
  3. कैसे एक शांति का व्यक्ति (जो खुला दिल है, मेहमाननवाज है, दूसरों को जानता है और साझा करता हैं) उस समुदाय में सुसमाचार के प्रसार में तेजी लाते हैं?

गतिविधि

(10 min)

BLESS प्रार्थना

QR कोड को स्कैन करें।

दो या तीन के समूह में विभाजित हो जाएँ और एक दूसरे के लिए B.L.E.S.S. प्रार्थना के पाँच क्षेत्रों की प्रार्थना करने का अभ्यास करें।

BLESS प्रार्थना पैटर्न

BLESS प्रार्थना पैटर्न ऐसे पांच तरीके प्रदान करता है जिनके द्वारा आप किसी भी समय आपको मिलने वाले लोगों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं, लेकिन विशेष रूप से प्रार्थना चलन के समय।

  • BODY शारीरिक स्वास्थ्य]
  • LABOUR श्रम [नौकरी और वित्त]
  • Emotional भावनात्मक [मनोदशा]
  • Social सामाजिक [रिश्ते]
  • Spiritual आध्यात्मिक [अधिक जानने और परमेश्वर को प्यार]

गतिविधि

(90 min)

प्रार्थना यात्रा

QR कोड को स्कैन करें।

दो या तीन के समूह में विभाजित हो जाएँ और प्रार्थना चलन अभ्यास करने के लिए समुदाय में जाएँ।

एक स्थान का चयन करना बहुत ही सरल है जैसे ही आप अब जहां हैं वहां से बाहर चलना शुरुवात करते हैं, या आप एक विशिष्ट गंतव्य के लिए जाने की योजना बना सकते हैं।

जैसे परमेश्वर अगुवाई करें वैसा ही करें, और इस गतिविधि पर 60-90 मिनिट बिताने की योजना बनायें ।

सत्र एक प्रार्थना चलन गतिविधि के साथ समाप्त होता है ।

चार स्रोत जो आपकी प्रार्थना का मार्गदर्शन कर सकते हैं:

  1. निरीक्षण - आप क्या देखते हैं? यदि आप किसी बच्चे का खिलौना देखते हैं, तो आपको पड़ोस के बच्चों, परिवारों के लिए या क्षेत्र के स्कूलों के लिए प्रार्थना करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
  2. अनुसंधान - तुम्हें क्या पता है? यदि आपने पड़ोस के बारे में पढ़ा है, तो आप वहां रहने वाले लोगों के बारे में कुछ जानते हैं या वह क्षेत्र अपराध या अन्याय से ग्रस्त है। इन बातों के बारे में प्रार्थना करो और परमेश्वर से कार्य करने के लिए कहें।
  3. प्रकाशन - पवित्र आत्मा आपके दिल से बात कर सकता है या वह किसी विशेष ज़रूरत या प्रार्थना क्षेत्र के बारे में सोचने के लिए एक विचार ले सकता है। सुनो - और प्रार्थना करो!
  4. अनुच्छेद - जब आप पैदल चलने की तैयारी कर रहे थे, तो पवित्र आत्मा ने बाइबल से आपके मन में हिस्सा लिया हो। उस छंद के बारे में प्रार्थना करें और उस क्षेत्र में लोगों पर इसका प्रभाव कैसे हो सकता है।

प्रभाव के पाँच क्षेत्र जिन पर प्रार्थना को केंद्रित करना है:

  1. सरकार - ऐसे न्यायालयों, कमीशन भवनों या कानून प्रवर्तन कार्यालयों जैसे सरकारी केंद्रों की तलाश करें और उनके लिए प्रार्थना करें। क्षेत्र के संरक्षण, न्याय के लिए और उसके नेताओं के लिए ईश्वरीय ज्ञान के लिए प्रार्थना करो।
  2. व्यवसाय और वाणिज्य - वित्तीय जिलों या शॉपिंग क्षेत्र जैसे वाणिज्यिक केंद्रों की तलाश करें और उनके लिए प्रार्थना करें। धर्मार्थ निवेश और संसाधनों के अच्छे प्रबंधन के लिए प्रार्थना करें। आर्थिक न्याय और अवसर और उदारता और उपहार देने वालों के लिए प्रार्थना करें जो ईश्वरीय हैं और जिनके मुनाफे की तुलना में लोग अधिक महत्वपूर्ण हैं।
  3. शिक्षा - स्कूलों और प्रशासनिक इमारतों, व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों, सामुदायिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों जैसे शैक्षणिक केंद्रों की तलाश करें और उनके लिए प्रार्थना करें। परमेश्वर की सच्चाई को सिखाने और अपने छात्रों के दिलों की रक्षा के लिए धर्मार्थ शिक्षकों के लिए प्रार्थना करो। प्रार्थना करें कि परमेश्वर झूठ या भ्रम को बढ़ावा देने के हर प्रयास में हस्तक्षेप करेगा। प्रार्थना करें कि ये स्थान ऐसे बुद्धिमान नागरिकों को भेजेंगे जिनके पास सेवा करने और नेतृत्व करने के लिए दिल है।
  4. संचार - रेडियो स्टेशनों, टीवी स्टेशनों और समाचारपत्र प्रकाशकों जैसे संचार केंद्रों की तलाश करें और उनके लिए प्रार्थना करें। प्रार्थना करो कि परमेश्वर की कहानी और उनके अनुयायियों की गवाही पूरे शहर और दुनिया भर में फैल जाए। प्रार्थना करें कि उनका संदेश उनके माध्यम से उनके बहुसंख्यक लोगों तक पहुंचाया जाता है। ताकि हर जगह परमेश्वर के लोग परमेश्वर के काम देखेंगे।
  5. आध्यात्मिकता - चर्च की इमारतों, मस्जिदों या मंदिरों जैसे आध्यात्मिक केंद्रों की तलाश करें और उनके लिए प्रार्थना करें। प्रार्थना करें कि हर आध्यात्मिक साधक को यीशु में शांति और आराम मिल जाएगा। और किसी भी झूठे धर्म से विचलित या भ्रमित नहीं हो।

प्रार्थना करें

(5 min)

अपनी प्रार्थना चलन गतिविधि पर जाने से पहले, अपने समूह के साथ मिलकर अपना समय समाप्त करने के लिए प्रार्थना करना सुनिश्चित करें।

परमेश्वर का धन्यवाद करें कि वह खोए हुए, अंतिम और सबसे कमतर लोगों से प्रेम करता है - जिसमें हम भी शामिल हैं!

उससे कहें अपने हृदय और उन लोगों के हृदय को तैयार करने के लिए जिनसे आप अपनी यात्रा के दौरान मिलेंगे ताकि वे उसके कार्य के लिए खुले रहें।

सत्र 6

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 1235

प्रार्थना करें

(5 min)

पिछले सत्र में परमेश्वर ने जो कुछ किया उसके लिए प्रार्थना करें और उसको धन्यवाद दें, जब आपको आज्ञा पालन करना कठिन लगे तो उससे मदद माँगें, और आपके साथ मिलकर बिताए समय की अगुवाई करने के लिए उसके पवित्र आत्मा को आमंत्रित करें।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इस उपकरण को अपने टूलकिट में जोड़ेंगे:

  • विश्वासयोग्यता ज्ञान से बेहतर है
  • 3/3 समूह बैठक (मीटिंग) पैटर्न

READ

(5 min)

विश्वासयोग्यता

इस सत्र में हम सीखेंगे कि ज्ञान और प्रशिक्षण की तुलना में आत्मिक वयस्कता विश्वासयोग्यता का बेहतर मापदंड कैसे है। दो विचार हैं जिसने आज चर्च में बहुत सी परेशानियाँ खड़ी कर दी है।

पहला विचार की किसी व्यक्ति की आत्मिक वयस्कता इस बात से जुड़ी है कि वे परमेश्वर के वचन के बारे में कितना जानते हैं। वे ऐसे जताते हैं जैसे सही धारणा - या रूढिवादी मत - किसी के विश्वास का अच्छा मापदंड है।

दूसरा विचार यह है कि सेवकाई में अगुआई की शुरुवात करने से पहले किसी व्यक्ति को "पूर्ण प्रशिक्षण" की आवश्यकता है। वे ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे सेवकाई करने के लिए किसी व्यक्ति की योग्यता का सही मापदंड संपूर्ण ज्ञान है।

पहले विचार के साथ परेशानी - रूढ़िवादी मत पर - या "सही धारणा" पर निर्भर रहना है कि शैतान वचन का ज्ञान किसी व्यक्ति से है। परमेश्वर का वचन कहता है - तुम विश्वास करते हो कि एक ही परमेश्वर है। अच्छा है! शैतान भी यह विश्वास करते हैं और काँपते हैं।

किसी व्यक्ति की आत्मिक वयस्कता का एक बेहतर मापदंड है ORTHOPRAXY -"सही अभ्यास"।

जो हम जानते हैं उस आधार पर वयस्कता को मापने के बजाय हमें आज्ञा मानने में और इसे बताने के प्रति विश्वासयोग्यता के बारे में ज्यादा चिंता करनी चाहिए।

नेतृत्व करने से पहले उस व्यक्ति को पूरी तरह से प्रशिक्षित होना चाहिए, इस दूसरे विचार के साथ परेशानी यह है कि कोई पूरी तरह से भी कभी प्रशिक्षित नहीं होता।

प्रभु यीशु ने युवा अगुओं को भेजने के द्वारा उदाहरण दिखाया जिन्हें राज्य में महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए अब भी बहुत सी बातें सीखनी बाकी थीं।

परमेश्वर का वचन कहता है - प्रभु यीशु ने अपने बारह प्रेरितों को बुलाया और उन्हें दुष्टात्माओं और बीमारियों के ऊपर पूर्ण सामर्थ दी। फिर उन्होंने परमेश्वर के राज्य के बारे में बताने और बीमारों को चंगा करने के लिए उन्हें भेजा।

पतरस द्वारा अपने विश्वास के बताये जाने से पहले इन मनुष्यों को भेजा गया था कि प्रभु यीशु उद्धारकर्ता हैं - हम इसे विश्वास का पहला कदम मानते हैं। और भेजे जाने के बाद भी प्रभु यीशु ने कई बार गलतियों की वजह से पतरस को डाँटा और बाद में पतरस ने प्रभु यीशु को पूरी तरह से नकारा। दूसरे चेले विवाद करने लगे कि परमेश्वर के आनेवाले राज्य में सबसे महान कौन है और किसे कौन सा काम मिलेगा।

उन्हें अब भी बहुत कुछ सीखना बाकी था लेकिन प्रभु यीशु ने उन्हें काम दिया कि वे जो जानते हैं उसे दूसरों बतायें।

ज्ञान से ज्यादा - विश्वासयोग्यता ऐसी चीज है जो तब शुरु हो सकती है जब कोई प्रभु यीशु के पीछे चलना शुरु करता है।

प्रशिक्षण से ज्यादा - विश्वासयोग्यता इस बात से मापी जा सकती है कि हमें जो दिया गया है उसके साथ हम क्या करते हैं।

यदि हम जो सुनते हैं उसका पालन करें और दूसरों को बतायें, तो हम विश्वासयोग्य हैं।

यदि हम सुनते हैं लेकिन उसका पालन नहीं करते और इसे दूसरों को नहीं बताते, तो हम विश्वासयोग्य नहीं हैं।

चेलों को बढ़ाते वक्त हम यह सुनिश्चित करें कि हम सही चीजों को माप रहे हैं।

चर्चा करें

(10 min)

  1. सोचें परमेश्वर की आज्ञाओं के बारे में जो आप पहले से ही जानते है । आप कितने “विश्वासयोग्य” हैं इन्हें पालन करने और साझा करने में?

READ

(75 min)

3/3 समूह मीटिंग

Zume ट्रेनिंग में आपका पुनः स्वागत है! इस सत्र में, हम सीखेंगे कि कैसे 3/3 (नोट: "तीन-तिहाई" के रूप में उच्चारण करें) समूह एक ऐसी बैठक पद्धति है जो यीशु के अनुयायियों को एक-दूसरे की मदद करके यीशु का अधिक निकटता से अनुसरण करने में मदद करती है।

यीशु ने कहा है - "जहाँ दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठा होते हैं, वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ।" यह एक प्रभावशाली प्रतिज्ञा है। एक ऐसी प्रतिज्ञा है जिसका के यीशु के हर एक शिष्य को लाभ उठाना चाहिए । जब आप एक समूह के रूप में इकट्ठा होते हैं तब आपको अपना समय कैसे व्यतीत करना जानिए?

एक 3/3 समूह (जिसे "तीन-तिहाई" के रूप में संबोधित किया जा सकता है) वह समूह है जो अपने समय को 3 भागों में विभाजित करता है, ताकि वे यीशु की आज्ञाओं की सबसे महत्वपूर्ण बातों का पालन करने का अभ्यास कर सकें ।

यह इस प्रकार कार्य करता है:

  • पीछे देखें (दृश्य - 1/3) - समूह का पहला तिहाई समय उन पिछली बातों पर गौर करते हुए बिताया जाता है जो घटित हुई है जब से वे मिलकर इकट्ठा हुए हैं।
  • ऊपर देखें (दृश्य - 2/3) - समूह का मध्य तिहाई समय ऊपर की ओर देखते हुए पवित्रशास्त्र के माध्यम से परमेश्वर का ज्ञान और मार्गदर्शन पाने, चर्चा और प्रार्थना करने के लिए बिताया जाता है।
  • आगे देखें(दृश्य - 3/3) - समूह का अंतिम तिहाई समय आगे देखते हुए बिताया जाता है कि जो बातें उन्होंने सीखी हैं वे उन बातों को कैसे अपना सकें और उनका आज्ञापालन कर सकें।

इस सत्र में आपके समूह की अगुवाई तीन तिहाई समूह के एक लघु संस्करण के द्वारा की जाएगी, ताकि आपको वास्तविक जीवन में पूर्ण संस्करण के लिए तैयार होने में मदद मिल सके। क्या आत्मिक साँस लेने का सत्र आपको याद है ? साँस लें, परमेश्वर को सुनें। सांस छोड़ें, मतलब आपने जो सुना, उसका पालन करें और दूसरों के साथ उसे साझा करें। यही तो एक 3/3 समूह का अभिप्राय हैं। 3/3 समूह एक ऐसा समूह है जिसका सामूहिक समय तीन भागों में बांटा जाता है, ताकि वे परमेश्वर की बात सुनने, यीशु की कुछ सबसे महत्वपूर्ण बातों का आज्ञापालन करने और उन्हें साझा करने का अभ्यास कर सकें।

अभ्यास का यह सत्र एक घंटे से थोड़ा सा ज्यादा चलेगा, और आगे बढ़ेगा। यदि आपका समूह बड़ा है या आप गहन चर्चाओं में रुचि रखते हैं, तो आप समूह के किसी एक सदस्य से घड़ी या टाइमर के माध्यम से आपको ट्रैक पर रखने में मदद के लिए कह सकते हैं।

वास्तविक जीवन में यह कदम धीमी गति से उठाए जाएंगे । लेकिन जब आप अभ्यास कर रहे हैं तो लगातार आगे बढ़ना तय करें ताकि आपका समय खत्म ना हो जाए। कृपया किसी भी कदम को ना छोड़े, सभी कदम महत्वपूर्ण है।

याद रखें, 3/3 समूह किसी सामान्य बाइबल अध्ययन की तरह नहीं है, इसका एक उद्देश्य है। इस अनुभव को एक नए तरीके से मिलने-जुलने का और यह देखने का अवसर मानें कि परमेश्वर ने आपके साथ बिताए समय के लिए क्या अच्छी योजना बनाई है। जानने के लिए तैयार हैं? चलिए शुरू करते हैं!


पीछे देखना

हम अपने समय का पहला तिहाई भाग एक-दूसरे की देखभाल करके, धन्यवाद देकर, अपने संघर्षों को साझा करके और अपने समूह के अन्य सदस्यों के लिए प्रार्थना करके पीछे देखने में बिताएंगे। हम यह भी देखेंगे कि समूह के प्रत्येक व्यक्ति को पिछली बार जब हम साथ थे, तब उन्होंने जो सीखा था, उसका आज्ञा पालन करने का और उसे साझा करने का अवसर मिला है या नहीं।

कदम एक - "धन्यवाद देना।"

प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ऐसा साझा करने के लिए जिसके लिए वे आभारी हैं कुछ समय निकालें। इस वीडियो को पॉज़ करें और अभी ऐसा करें... क्या आप अभी भी वहीं हैं? वास्तव में, हम चाहते हैं कि आप पॉज़ बटन दबाएं, और अपने समूह के प्रत्येक व्यक्ति से कुछ ऐसा साझा करने के लिए कहें जिसके लिए वे परमेश्वर के आभारी हैं। जब आप वापस आएँगे तो हम यहीं मिलेंगे। (2 मिनट)

कदम दो - "अपने संघर्षों को साझा करना" और "एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना।"

अब आपके समूह के प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ऐसा साझा करने के लिए कहें जिससे वे जूझ रहे हैं। किसी और को उनके द्वारा साझा की गयी बातों के लिए प्रार्थना करने के लिए कहें। पॉज़ बटन दबाएँ, फिर साझा करें और प्रार्थना करें। (8 मिनट)

कदम तीन - "समूह पर ध्यान केंद्रित करना।"

हर बार जब आप मिलते हैं, तब आप समय निकालकर याद करना चाहेंगे कि आप साथ क्यों हैं - परमेश्वर से प्रेम करने के लिए, दूसरों से प्रेम करने के लिए, यीशु को साझा करने के लिए, और दूसरों को भी उसे साझा करने में मदद करने के लिए। समूह को मिशन पर केंद्रित करने के बहुत से तरीके हैं, लेकिन इस अभ्यास सत्र के लिए किसी को समूह के सामने मत्ती 22:37-38 ज़ोर से पढ़ने के लिए कहें। पॉज़ करें, फिर पढ़ें। (2 मिनट)

**कदम चार - "चेक इन करना।" **

यह वह भाग है जिसे कुछ समूह छोड़ देना चाहते हैं, क्योंकि इसका मतलब है ऐसे सवाल पूछना जो कभी-कभी कठिन हो सकते हैं। कृपया इसे न छोड़ें।

यीशु ने अपने अनुयायियों से इतना प्रेम किया कि वे कठिन सवाल पूछ सकें। अगर हम यीशु की तरह बनना चाहते हैं, तो हमें भी एक-दूसरे से इतना प्रेम करना चाहिए कि हम भी ऐसा करें। इस कदम में, आप समूह के प्रत्येक व्यक्ति से रिपोर्ट लेंगे कि पिछली बार जब आप साथ थे, तब परमेश्वर ने उनसे जो करने के लिए कहा था ऐसा उन्होंने जो सुना था, उसका उन्होंने पालन किया या नहीं।

प्रत्येक Zume सत्र में, हमने अपने आगे की ओर देखने के कदम में इन प्रतिबद्धताओं को मॉडल किया है, जहाँ हम आपको आज्ञा मानने, साझा करने और प्रार्थना करने के लिए कहते हैं। हमारे पीछे देखने के कदम में हमने जवाबदेही का मॉडल बनाया है, जहाँ हम आपसे उन्हीं प्रतिबद्धताओं पर चेक-इन करने के लिए कहते हैं।

यदि आपने प्रशिक्षण में अब तक इन कदमों पर बहुत समय नहीं बिताया है, तो यह शुरू करने का एक अच्छा समय है। परमेश्वर से प्रेम करने का एक भाग वह जो हमें बताता है उसका आज्ञा पालन करना है। एक-दूसरे से प्रेम करने का एक भाग यह है कि परमेश्वर से सुनी गई बातों का पालन करने में किसी की मदद करना है। प्रेम का मतलब है किसी की प्रतिबद्धताओं को गंभीरता से लेना - और उन्हें अनुग्रहपूर्वक प्रेम दर्शाना - सब एक ही समय में।

पॉज़ दबाएँ और प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देने को कहें :

  • आपने अब तक जो सीखा है उसका पालन आपने कैसे किया है?
  • आपने जो सीखा है उसमें आपने किसे प्रशिक्षित किया है?
  • जब से हम एक समूह के रूप में साथ हैं, तब से आपने आपकी कहानी या परमेश्वर की कहानी किसके साथ साझा की है?

(12 मिनट)

जैसा कि हम अपने 3/3 समूह के पीछे देखना सत्र को समाप्त करते हैं, यहाँ आपके सत्रों को और भी बेहतर बनाने में मदद करने के लिए कुछ है:

Z ÚME कोचिंग टिप

कभी-कभी समूह में, एक व्यक्ति ऐसा हो सकता है जो सबसे ज़्यादा समय बात करता है। ऐसा न होने दें। समूह में हर किसी का महत्व है, इसलिए सुनिश्चित करें कि सभी को साझा करने का मौका मिले। अगर दूसरों को बात करने का मौका नहीं मिल रहा है, तो जो सबसे ज़्यादा बात कर रहा है उसे धीरे से याद दिलाएँ कि हर व्यक्ति की बात सुनना आवश्यक है।


ऊपर देखना

हमारे साथ बिताए गए समय के बीच के तीसरे भाग में, हम परमेश्वर के पवित्र आत्मा को आमंत्रित करते हैं कि वह हमारे समूह का परमेश्वर के वचन को बेहतर ढंग से समझने के लिए मार्गदर्शन करे। हम बाइबल से एक शास्त्रभाग जोर से पढ़ेंगे और फिर समूह के रूप में परमेश्वर के उद्देश्यों और योजनाओं को बेहतर ढंग से समझने और जानने में मदद करने के लिए कुछ सरल प्रश्न पूछेंगे और उनका उत्तर देंगे।

कदम एक - अगुवाई करने के लिए परमेश्वर के पवित्र आत्मा को आमंत्रित करें

प्रार्थना करने के लिए कुछ समय निकालें। परमेश्वर से सरल और संक्षिप्त रूप से बात करें। उसके पवित्र आत्मा को कहें कि आप जिस शास्त्रभाग को पढ़ने वाले हैं वह भाग वो आपको सिखाए। पॉज़ दबाएँ और प्रार्थना करें। (2 मिनट)

कदम दो - परमेश्वर का वचन पढ़ें और प्रश्न पूछें

समूह में से किसी को बाइबल से पढ़ने के लिए कहें। इस अभ्यास सत्र के लिए, लूका 18:9-14 पढ़ें। जब आप पढ़ना समाप्त कर लें, तब समूह को इन दो प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए:

  • इस शास्त्रभाग के बारे में आपको क्या पसंद आया?
  • आपको क्या चुनौतीपूर्ण या समझने में कठिन लगा?

यदि आपके समूह में मौखिक शिक्षार्थी हैं - जो लोग अच्छी तरह से नहीं पढ़ पाते हैं या सुनकर सीखना पसंद करते हैं - तो सुनिश्चित करें कि आप उस शास्त्रभाग को कम से कम दो बार पढ़ें।

पॉज़ दबाएँ, फिर प्रश्न पढ़ें और उत्तर दें। (10 मिनट)

अब किसी और को उसी शास्त्रभाग को दूसरी बार पढ़ने को कहें, और फिर समूह को इन दो प्रश्नों के जवाब देने को कहें :

  • इस शास्त्रभाग से हम लोगों के बारे में क्या सीख सकते हैं?
  • इस शास्त्रभाग से हम परमेश्वर के बारे में क्या सीख सकते हैं?

याद रखें कि शास्त्रभाग से जुड़े रहें और इसे सरल रखें! (10 मिनट)

यह हमारे 3/3 समूह के ऊपर देखना अनुभाग का अंत है, और यहाँ आपके सत्रों को और भी बेहतर बनाने में मदद करने के लिए कुछ है:

Z ÚME कोचिंग टिप

जब आप परमेश्वर के वचन का अध्ययन कर रहे हों, तो अन्य पुस्तकों, शिक्षकों या राय के बजाय परमेश्वर के वचनों पर ध्यान केंद्रित करें। यह पूछने के बजाय कि "आपको क्या लगता है इसका क्या मतलब है?" पूछें "यह शास्त्रभाग क्या कहता है?" अगर आपके समूह में कोई व्यक्ति पढ़ाना पसंद करता है, तो उसे धीरे से याद दिलाएँ कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा और सिद्ध वचन समूह को सिखा सकते हैं। हम सभी यहाँ एक साथ सीखने के लिए उपस्थित हैं। और चर्चा में चुप्पी या पॉज़ से न डरें। परमेश्वर तब भी काम कर रहा है जब सब शांत हो। उसके वचन पर ध्यान केंद्रित करें, शास्त्रभाग से चिपके रहें, और बाकी काम के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखें।

आगे देखना

अपने समय के आखिरी तीसरे भाग में, हम आगे की ओर देखने पर ध्यान केंद्रित करेंगे ताकि हमने परमेश्वर के वचन से जो सीखा है उसके द्वारा हम कैसे आज्ञा पालन सकते हैं और दूसरों को कैसे प्रशिक्षित कर सकते हैं यह जान सकें। समूह का प्रत्येक सदस्य परमेश्वर से कुछ सरल प्रश्न पूछता है और फिर प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा करता है। फिर हम अपनी प्रतिबद्धताओं को साझा करते हैं और उनका अभ्यास करते हैं और साथ मिलकर अपना समय समाप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं।

कदम 1 - परमेश्वर के उद्देश्य के लिए प्रार्थना करना

आपके समूह के प्रत्येक व्यक्ति को शांत प्रार्थना करने और परमेश्वर से ये प्रश्न पूछने को कहें:

  • हे परमेश्वर, मैं आपकी आज्ञा का पालन कैसे कर सकता हूँ और जो आप मुझे सिखा रहे हैं उसे कैसे लागू कर सकता हूँ?
  • मैं इस शास्त्रभाग से किसे प्रशिक्षित कर सकता हूँ ताकि वे आपकी आज्ञा का अधिक पालन करना और आपसे अधिक प्रेम करना सीख सकें?
  • मैं अपनी गवाही या यीशु के बारे में का आपका सुसमाचार किसके साथ साझा करूँ ऐसी आपकी इच्छा है?

पॉज़ दबाएँ और फिर प्रार्थना करें। (5 मिनट)

परमेश्वर के पवित्र आत्मा से आपको ऐसे विशिष्ट उत्तर, विशिष्ट नाम और विशिष्ट कदम बताने के लिए कहें जिन्हें आप अभी और जब आपका समूह फिर से मिलता है, के बीच के समय में उठा सकते हैं।

कदम 2 - प्रतिबद्धताएँ एकत्रित करना

आपके समूह के प्रत्येक व्यक्ति से पूछें कि उन्होंने प्रत्येक प्रश्न के लिए प्रभु से क्या सुना। हो सकता है कि किसी ने एक, दो या तीनों प्रश्नों पर प्रभु से कुछ भी न सुना हो। वे बस यह रिपोर्ट कर सकते हैं कि उन्होंने नहीं सुना।

लेकिन याद रखें, समूह को प्रभु से सुनना चाहिए। यीशु ने कहा - "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं।" और आपके आज्ञाकारिता के कदम जितने ज़्यादा स्पष्ट होंगे, हमारे फिर से मिलने से पहले उनका पालन करना उतना ही आसान होगा।

पॉज़ दबाएँ, और फिर जो आपने सुना है उसे साझा करें। (10 मिनट)

कदम 3 - अपनी योजना का अभ्यास करना

एक साथ अपना समय समाप्त करने से पहले, आपके 3/3 समूह को दो या तीन लोगों के छोटे समूहों में विभाजित करें और जो आपने सुना कि प्रभुने आपको करने के लिए कहा है उसका अभ्यास करें।

याद रखें - अभ्यास का मतलब आज्ञा पालन करना, प्रशिक्षण या साझा करना नहीं है, लेकिन यह आपको उन चीजों को बेहतर तरीके से करने के लिए तैयार करता है। प्रत्येक छोटे समूह को प्रार्थना में एक साथ अपना अभ्यास समय समाप्त करने दें। उन लोगों और योजनाओं के लिए विशेष रूप से प्रार्थना करें जिन्हें परमेश्वर ने आपके दिलों में डाला है।

यदि आपके समूह में मौखिक-शिक्षार्थी हैं, तो आपके अभ्यास समय का कुछ भाग परमेश्वर के वचन के उस शास्त्रभाग को फिर से पढ़ने के लिए अलग रखें जिसे आपने पहले पढ़ा था। इससे पूरे समूह को बैठकों के बीच मिलने वाले अन्य लोगों के साथ बातें साझा करने के लिए तैयार रहने में मदद मिलेगी।

पॉज़ दबाएँ, फिर अभ्यास और प्रार्थना करने के लिए समूहों में विभाजित हो जाएँ। जिन लोगों के पास विशिष्ट प्रतिबद्धताएँ नहीं हैं, उन्हें अपनी गवाही की कहानी या परमेश्वर की कहानी साझा करने का अभ्यास करना चाहिए। (10 मिनट)

एक साथ अपना समय पूरा करना

जब आप अपने समूह को फिर से एक साथ लाते हैं, तो जश्न मनाने के लिए एक पल निकालें! आपने आगे देखना अनुभाग को पूरा कर लिया है और अब पूरे 3/3 समूह प्रारूप का अभ्यास कर लिया है।

आपका समूह बाद के सत्रों में इस वीडियो गाइड के बिना अभ्यास करना जारी रखेगा। सुनिश्चित करें कि आप बारी-बारी से सभी को इस प्रक्रिया के माध्यम से समूह का मार्गदर्शन करने दें। आपको एक प्रतिभाशाली शिक्षक होने की आवश्यकता नहीं है, बस इन सरल कदमों का पालन करें। जाने से पहले, आपके सत्रों को और भी बेहतर बनाने में मदद करने के लिए यहाँ एक और सुझाव दिया गया है:

Z ÚME कोचिंग टिप

दुनिया भर में, 3/3 समूह अक्सर प्रभु भोज, या भोजन और अधिक अनौपचारिक बातचीत को अपने साथ मिलकर बिताये समय के हिस्से के रूप में साझा करते हैं। परमेश्वर ने हमें इस तरह की संगति दी है - उद्देश्यपूर्वक सीखना तथा विकास और उद्देश्यपूर्वक जीना तथा रिश्ता, हमें उसके पुत्र, यीशु की तरह बनने के लिए मजबूत, प्रोत्साहित और निर्माण करने में मदद करने के लिए।

और बस इतना ही - आपके समूह ने अब तीनों भागों का अभ्यास किया है - पिछली बार जब हम मिले थे, तब से हमने क्या हासिल किया है, यह देखने के लिए पीछे देखना, यह समझने के लिए ऊपर देखना कि मिलकर साथ बिताये इस समय में परमेश्वर ने हमारे लिए क्या रखा है, और आगे देखना ताकि हम समूह से अलग होकर समय बिताने के दौरान परमेश्वर ने हमारे दिलों में जो कुछ भी डाला है, उसे अमल में ला सकें।

3/3 समूह - मिलने का एक सरल और व्यावहारिक तरीका जो हमें यीशु के समान बनने में मदद करता है।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या आपने कोई अंतर महसूस किया है एक 3/3 समूह और एक बाइबल स्टडी या किसी छोट समूह में जिसके आप अतीत में भाग बने हों (या फिर आपने उसके बारे में सुना हों)? अगर ऐसा है, तो कैसे वह अंतर/भिनताएं आपके समूह को प्रभावित करेंगी?
  2. क्या 3/3 समूह एक साधारण चर्च माना जा सकता है? क्यों या क्यों नहीं?

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणा:

इस सत्र में सुना गया उपकरण:

  • विश्वासयोग्यता ज्ञान से बेहतर है
  • 3/3 समूह बैठक (मीटिंग) पैटर्न

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

इस सप्ताह समय बिताएं आज्ञापालन, प्रशिक्षण, और साझा करने में आपकी प्रतिबद्धताओं के आधार पर जो आपने 3/3 समूह के अभ्यास के दौरान की थी ।

साझा करें

प्रार्थना करें और परमेश्वर से पूछे कि आप 3/3 समूह प्रारूप किसके साथ साझा करें ऐसी उसकी इच्छा है। जाने से पहले समूह के साथ इस व्यक्ति का नाम साझा करें।

सत्र 7

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 4322

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना करें और परमेश्वर को धन्यवाद दें, समूह की यीशु के पीछे चलने की प्रतिबद्धताओं के लिए और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को आमंत्रित करें आपके समय की मिलजुलकर अगुवाई करने के लिए।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इस उपकरण को अपने टूलकिट में जोड़ेंगे:

  • परिपक्व शिष्यों के निर्माण हेतु साइकिल प्रशिक्षण
  • 3/3 समूह बैठक (मीटिंग) पैटर्न

READ

(5 min)

प्रशिक्षण चक्र

इस सत्र में, हम वह प्रशिक्षण लेंगे जो एक से बहुतों तक जाने में शिष्यों की सहायता करता है और एक मिशन को एक अभियान में बदल देता है।

क्या आपने कभी साईकिल पर चढ़ना सीखा है? क्या आपने सीखने में किसी दूसरे की सहायता की है? यदि ऐसा है, तो आप शायद प्रशिक्षण श्रृंखला के बारे में जानते हैं।

यें इतना सरल है नमूना, सहायता करना, देखना और छोड़ना

एक साईकिल पर चढ़ने से पहले, आपने शायद किसी दूसरे को इसपर चढ़ते हुए देखा होगा। यह नमूना है।

नमूना , सहायता करना, देखना और छोड़ना।

नमूना यानि किसी दूसरे को एक उदाहरण दिखाना कि इसे कैसे करते हैं। जब एक बच्चा पहली बार किसी दूसरे को बाईक चलाते हुए देखता है, तब वह उस विचार को पकड़ लेते हैं। नमूना इसी तरह से होता है - इसे बार-बार करने की जरुरत नहीं है, और सामान्यत: इसे केवल एक बार करने की जरुरत पड़ती है।

सोचिये जब आपने पहली बार बाईक चलाई थी। क्या आप सिर्फ देखना चाहते थे? या आप इसे चलाने के लिए उत्सुक थे? जब किसी ने आपको ऐसा करने का मौका नहीं दिया, तो क्या होगा?

बहुत ज्यादा नमूना दिखाना वास्तव में प्रशिक्षण प्रक्रिया को नुकसान पहुँचा सकता है। नमूना दिखाना यानि किसी को थोड़ा सा दिखाना - और फिर उसे करने देना। तो पहली बार सवारी करने पर क्या हुआ? क्या वे आपको साईकिल देने के बाद छोड़कर चले गए?

शायद नहीं जब बहुत से लोग बाईक चलाना सीखते हैं, तब आपके साथ बगल में कोई चल रहा होता है, आपको सही मार्ग पर रखते हुए।

यह सहायता करना है। नमूना दिखाना, सहायता करना, देखना और छोड़ना।

सहायता करना यानि सीखने वाले को किसी कौशल का अभ्यास करने देना लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना कि वह बुरी तरह से न गिरे।

सहायता करने में नमूना दिखाने से ज्यादा समय लगता है। लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। इसमें हाथों से पकड़ना, थोड़ी दिशा दिखाना और थोड़ा सिखाना पड़ता है, लेकिन ये सिर्फ मूलभूत चीजें बताना है। ये किसी को सिद्ध बनाना नहीं है। यह उन्हें पैडल मारना सीखाना है।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं, जब आपने तेजी से पैडल मारा और थोड़ी गति पकड़ ली तब भी कोई आपकी बगल में दौड़ रहा है? वे ज्यादा देर तक नहीं रह पायेंगे, और आप कभी भी संतुलन बनाए रखना नहीं सीख पायेंगे।

सहायता करना यानि किसी को आगे बढ़ाना और उन्हें खुद से थोड़ी मेहनत करने देना। और जब वे बढ़ना शुरु कर देते हैं, तब वे सीखनेवालों को नमूना बता रहे होते हैं।

जब किसी और का हाथ बाइक पर नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अकेले हैं। सामान्यत:किसी की नजर आप पर रहती है - लेकिन दूर से।

यह देखना है। नमूना, सहायता, देखना और छोड़ना।

देखना यानि अपने कौशल में सक्षम होने तक सीखनेवाले को प्रभावित करना, वह भी हस्तक्षेप के नियंत्रण करते हुए।

बाइक चलाने में, कोई उठकर जल्दी से जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें सड़क के सभी नियम मालूम हैं।

निगरानी करना यानि यह सुनिश्चित करना है कि वह व्यक्ति सुरक्षित है - जब आस-पास कोई नहीं होता है। और यह भी सुनिश्चित करना है कि उस व्यक्ति को पता है कि क्या करना है और वह इसे करेंगे भी - बल्कि जब उसे कोई देख रहा हो तब भी।

प्रशिक्षण श्रृंखला के इस चरण में, सीखनेवाला बढ़कर दूसरों को सीखायेगा कि कैसे बढ़ते हैं...फिर वे दूसरों को बढ़ना सीखायेंगे...फिर वे दूसरों को बढ़ना सीखायेंगे।

शिष्य जो शिष्य बनाते हैं, जो शिष्य बनाते हैं जो शिष्य बनाते हैं। तीसरी से चौथी पीढ़ी तक।

निगरानी रखना यानि यह सुनिश्चित करना है कि सीखनेवाला वयस्क हो रहा है और वह दूसरों की सहायता करने के लिए इच्छुक और सक्षम है। थोड़े समय तक निगरानी रखनी जरूरी है। नमूना दिखाने और सहायता करने, दोनों में दस गुना ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन इंतजार करना उचित होगा।

आखिरकार - सवार बाइक चलाता है।

छोड़ देना इसी विषय में है।

नमूना, सहायता करना, देखना और छोड़ना।

छोड़ देना स्नातक होने की तरह है। एक विद्यार्थी एक शिक्षक बन जाता है। एक कर्मचारी सहकर्मी बन जाता है। एक चेला एक मित्र बन जाता है। बाइक चलाने में, जो आपको चलाना सीखाता है, वह हर बार आपके साथ नहीं जाता। शायद कभी-कभी वह आपके साथ भी यात्रा करे। कभी कभी अलग से, या दूसरों के साथ, या अकेले यात्रा करे।

छोड़ाना यानि जिससे आप प्रेम करते हैं उस व्यक्ति को अंतिम उपहार देना - स्वतंत्रता का उपहार। छोड़ना यानि किसी को वहाँ जाने के लिए तैयार करना जहाँ आप पहले ही पहुँच चुके हैं लेकिन उन्हें वहॉं जाने के लिए भी उत्साहित करना जहाँ आप अब तक नहीं गए हैं।

नमूना, सहायता करना, देखना और**** छोड़ना।

प्रशिक्षण श्रृंखला।

एक से बहुतों तक। एक मिशन से एक अभियान तक।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या आप किसी प्रशिक्षण चक्र का कभी भाग बनें हैं?
  2. आपने किसे प्रशिक्षित किया? या आपको किसने प्रशिक्षित किया?
  3. क्या एक ही व्यक्ति प्रशिक्षण चक्र में अलग-अलग कौशल्य सीखते हुए विभिन्न भागों में हो सकता हैं?
  4. किसी को इस तरह प्रशिक्षित करना कैसा लगेगा?

गतिविधि

(90 min)

3/3 समूह बैठक

QR कोड को स्कैन करें।

पीछे देखें -पिछले सत्र के अनुसार आज्ञापालन, प्रशिक्षण, और शेयर (साझा) चुनौतियों को एक दूसरे के साथ जांच लें । (30 मिनट)

ऊपर देखें - आपके समूह शास्त्र भाग पठन के लिए मरकुस 5:1-20 का उपयोग करें और ऊपर देखें अनुभाग के दौरान 1-4 प्रश्नों के उत्तर दें । (30 मिनट)

आगे देखें - आगे देखें अनुभाग में 5, 6, और 7 प्रश्नों का उपयोग करें आज्ञापालन, प्रशिक्षण और साझा करना विकसित करने के लिए । (30 मिनट)

पीछे देखना

चरण 1 - धन्यवाद देना

प्रत्येक व्यक्ति को समय दें उन कुछ बातों को साझा करने के लिए जिसके लिए वे आभारी हैं।

चरण 2 - अपने संघर्षों को साझा करना और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना

अपने समूह के प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ऐसा साझा करने को कहें जिनके साथ वे संघर्ष कर रहे हैं। उनके द्वारा साझा की गई बातों के लिए किसी अन्य व्यक्ति को प्रार्थना करने के लिए कहें।

चरण 3 - समूह पर ध्यान केंद्रित करना

समय लें और याद रखें कि आप एक साथ क्यों हैं - परमेश्वर से प्रेम करने के लिए, दूसरों से प्रेम करने के लिए, यीशु को साझा करने के लिए, और दूसरों को भी उसे साझा करने में मदद करने के लिए।

चरण 4 - चेक-इन (जाँच करना)

प्रत्येक व्यक्ति से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहें:

  • आपने जो सीखा है क्या आपने उसका पालन किया है?
  • आपने जो सीखा है, उन बातों को लेकर आपने किसे प्रशिक्षित किया है?
  • जब से हम एक समूह के रूप में एक साथ हैं, तब से आपने आपकी कहानी या परमेश्वर की कहानी किसके साथ साझा की है?

ऊपर देखना

चरण 1 - परमेश्वर के पवित्र आत्मा को अगुवाई करने के लिए आमंत्रित करें

प्रार्थना करने के लिए कुछ समय निकालें। परमेश्वर से सरलता से और संक्षेप में बात करें। उसके पवित्र आत्मा से कहें कि वह आपको उस शास्त्रभाग से सिखाए जिसे आप पढ़ने वाले हैं।

चरण 2 - परमेश्वर का वचन पढ़ें और प्रश्न पूछें

समूह में से किसी को बाइबल से पढ़ने के लिए कहें। जब आप पढ़ना समाप्त कर लें, तब समूह को इन दो प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए:

  • आपको इस शास्त्रभाग के बारे में क्या अच्छा लगा?
  • इस शास्त्रभाग के बारे में समझने के लिए आपको क्या चुनौतीपूर्ण या कठिन लगा?

उसी शास्त्रभाग को दूसरी बार पढ़ें, और फिर समूह से इन दो प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहें:

  • इस शास्त्रभाग के द्वारा हम लोगों के बारे में क्या सीख सकते हैं?
  • इस शास्त्रभाग के द्वारा हम परमेश्वर के बारे में क्या सीख सकते हैं?

याद रखें कि शास्त्रभाग से जुड़े रहें और इसे सरल रखें!

आगे देखना

चरण 1 - परमेश्वर के उद्देश्य के लिए प्रार्थना करना

आपके समूह में के प्रत्येक व्यक्ति को चुपचाप प्रार्थना करने और परमेश्वर से ये प्रश्न पूछने के लिए कहें:

  • हे परमेश्वर, आप जो मुझे सिखा रहे हैं मैं उसका आज्ञा पालन कैसे कर सकता हूँ और उसे कैसे लागू कर सकता हूँ?
  • मैं इस शास्त्रभाग के द्वारा किसे प्रशिक्षित कर सकता हूँ ताकि वे आपकी आज्ञा का अधिक पालन करना और आपसे अधिक प्रेम करना सीख सकें?
  • मैं अपनी गवाही या यीशु के बारे में का आपका सुसमाचार किसके साथ साझा करूं ऐसी आपकी इच्छा है?

परमेश्वर के पवित्र आत्मा से आपको ऐसे विशिष्ट उत्तर, विशिष्ट नाम और विशिष्ट कदम दर्शाने के लिए प्रार्थना करें जिन्हें आप अभी से लेकर जब आपका समूह फिर से मिलेगा, तब तक के समय में कार्य में ला सकते हैं।

चरण 2 - प्रतिबद्धताएँ जुटाना

अपने समूह के प्रत्येक व्यक्ति से पूछें कि उन्होंने प्रत्येक प्रश्न के लिए प्रभु से क्या उत्तर सुना है। हो सकता है कि किसी ने एक, दो या सभी तीनों प्रश्नों के लिए प्रभु से कुछ भी न सुना हो। वे बस यह रिपोर्ट कर सकते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं सुना।

लेकिन याद रखें, समूह को प्रभु से सुनना चाहिए। यीशु ने कहा - "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं।" और आपके आज्ञाकारिता के कदम जितने अधिक विशिष्ट होंगे, हमारे फिर से मिलने से पहले तक उनका पालन करना उतना ही आसान होगा।

चरण 3 - अपनी योजना का अभ्यास करना

एक साथ अपना समय समाप्त करने से पहले, अपने 3/3 समूह को दो या तीन के छोटे समूहों में विभाजित करें और उन बातों का अभ्यास करें जो आपने सुना है कि प्रभु ने आपको करने के लिए कहीं हैं।

चर्चा करें

(10 min)

  1. 3/3 समूह के बारे में आपको सबसे अच्छा क्या लगा? क्यों?
  2. सबसे चुनौतीपूर्ण क्या था? क्यों?

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणा:

इस सत्र में सुना गया उपकरण:

  • परिपक्व शिष्यों के निर्माण हेतु साइकिल प्रशिक्षण
  • 3/3 समूह बैठक (मीटिंग) पैटर्न

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

Zúme में आपने जो एक कौशल या अवधारणा सीखी है उसे चुनें और किसी को इसे चौथी पीढ़ी तक बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दें।

साझा करें

आपने जिस व्यक्ति को मार्गदर्शन दिया है उसे एक अतिरिक्त (पांचवीं) पीढ़ी तक प्रक्रिया जारी रखने के लिए चुनौती दें।

सत्र 8

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 9870

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना करें और परमेश्वर को धन्यवाद दें आपके समूह को ऊर्जा देने, केंद्रित होने और वफ़ादारी देने के लिए जो अब तक इस सत्र में हैं । परमेश्वर से मांगे उसके पवित्र आत्मा के द्वारा आपके समूह के सभी को याद दिलाने की उसके बगैर हम कुछ नहीं कर सकते!

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इस उपकरण को अपने टूलकिट में जोड़ेंगे:

  • लीडरशिप (नेतृत्व) सेल्स
  • 3/3 समूह बैठक (मीटिंग) पैटर्न

READ

(5 min)

लीडरशिप सेल्स

इस सत्र में हम सीखेंगे कि लीडरशिप सेल्स शिष्यों को थोड़े समय में जीवनभर के लिए अगुआ बनने के लिए कैसे तैयार करती है।

एक से दो हो जाते हैं। दो से चार हो जाते हैं। चार से आठ हो जाते हैं। व्यक्तियों की बढ़ोत्तरी। पीढ़ी दर पीढ़ी बढोत्तरी। सिद्धांत में बढ़ोत्तरी।

इसे नमूने को परमेश्वर ने सृष्टि की रचना में बनाया है। परमेश्वर चाहते हैं कि उनका परिवार इसी तरह से बढ़े। हमने 3/3 नमूना पहले ही सीख लिया है जो ग्राहक को उत्पादक में, सीखनेवालों को अगुआ में और शिष्यों को शिष्य बनानेवालों में बदलता है।

पीछे देखें - ऊपर देखें - आगे देखें । सीखे - आज्ञा मानें - बतायें।

इस तरह से इकट्ठा होना विश्वासीयों को आत्मिकता में बढ़ाता है और प्रभु यीशु के शिष्यों के समूह में पुन:उत्पादन की क्षमता पैदा करता है। यह नमूना बढ़ने में शिष्यों की सहायता करता है।

लेकिन जब कोई समूह थोड़े समय के लिए एक साथ आता है तब क्या? क्या वे तब भी बढ़ सकते हैं और परमेश्वर के राज्य को बढ़ा सकते हैं? लीडरशिप सेल्स 3/3 नमूने को कार्यांवित करने का तरीका है जब आप जानते हैं कि कोई समूह कब तक एक साथ रह सकता है।

लीडरशिप सेल्स थोड़े ही समय में विश्वासीयों को तैयार करता है उस पुन:उत्पादन करनेवाले नमूने को सीखने में जो हमेशा बना रहता है। लीडरशिप सेल्स एक अगुआ बनने में सीखनेवालों की सहायता करता है, जो आगे नये समूह शुरु करेंगे, नये चर्च को प्रशिक्षित करेंगे, और परमेश्वर के परिवार को बढ़ाने के लिए और ज्यादा लीडरशिप सेल्स शुरु करेंगे। जब कोई समूह गतिशील होता है, तब लीडरशिप सेल्स काम करता है ।

अस्थिरवासी, विद्यार्थी, सैनिक, कर्मचारी जो प्रभु यीशु के शिष्य हैं, एक लीडरशिप सेल्स में महान काम करते हैं। उनकी संस्कृति, उनके पेशे या उनके जीवन के कारण - शायद एक समूह को स्थापित करने में उन्हें मेहनत करनी पडे, लेकिन उन्हें प्रशिक्षित किया जा सकता है कि हर जगह वे समूहों की शुरुवात कैसे कर सकते हैं।

लीडरशिप सेल्स तब काम करता है जब लोगों का एक समूह एक साथा विश्वास करता है। एक परिवार, मित्रों का एक नेटवर्क, या एक छोटे से गाँव को थोड़े समय में प्रशिक्षित किया जा सकता है - जीवनभर एक उत्पन्न करने वाला बनने के लिए - यहाँ तक कि फॉलो-अप या आत्मिक शिक्षा के बिना।

आरंभिक सभा में हमने 3/3 नमूने के अंतिम दो भागों को सीखा और इसका अभ्यास किया। अब हम संपूर्ण नमूने यानि सभी तीन भागों का अभ्यास करेंगे - पीछे देखना, ऊपर देखना, आगे देखना।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या यीशु के अनुयायियों का कोई समूह आपको पता है जो पहले से ही मिलते हो या मिलने के लिए उत्सुक हो और एक लीडरशिप सेल तैयार कर सकें Zúme प्रशिक्षण सीखने के लिए?
  2. उन्हें एक साथ लाने के लिए क्या करना होगा?

गतिविधि

(90 min)

3/3 समूह बैठक

QR कोड को स्कैन करें।

पीछे देखें -पिछले सत्र के अनुसार आज्ञापालन, प्रशिक्षण, और शेयर (साझा) चुनौतियों को एक दूसरे के साथ जांच लें । (30 मिनट)

ऊपर देखें - प्रेरितों के काम 2:42-47 का आपके समूह के शास्त्र भाग के पढ़ने के लिए उपयोग करें और 1 से 4 सवालों के जवाब दें।

आगे देखें - सवाल 5, 6 और 7 का प्रयोग करें यह विकसित करने के लिए की कैसे आप आज्ञापालन, प्रशिक्षण और साझा करेंगे।

पीछे देखना

चरण 1 - धन्यवाद देना

प्रत्येक व्यक्ति को समय दें उन कुछ बातों को साझा करने के लिए जिसके लिए वे आभारी हैं।

चरण 2 - अपने संघर्षों को साझा करना और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना

अपने समूह के प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ऐसा साझा करने को कहें जिनके साथ वे संघर्ष कर रहे हैं। उनके द्वारा साझा की गई बातों के लिए किसी अन्य व्यक्ति को प्रार्थना करने के लिए कहें।

चरण 3 - समूह पर ध्यान केंद्रित करना

समय लें और याद रखें कि आप एक साथ क्यों हैं - परमेश्वर से प्रेम करने के लिए, दूसरों से प्रेम करने के लिए, यीशु को साझा करने के लिए, और दूसरों को भी उसे साझा करने में मदद करने के लिए।

चरण 4 - चेक-इन (जाँच करना)

प्रत्येक व्यक्ति से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहें:

  • आपने जो सीखा है क्या आपने उसका पालन किया है?
  • आपने जो सीखा है, उन बातों को लेकर आपने किसे प्रशिक्षित किया है?
  • जब से हम एक समूह के रूप में एक साथ हैं, तब से आपने आपकी कहानी या परमेश्वर की कहानी किसके साथ साझा की है?

ऊपर देखना

चरण 1 - परमेश्वर के पवित्र आत्मा को अगुवाई करने के लिए आमंत्रित करें

प्रार्थना करने के लिए कुछ समय निकालें। परमेश्वर से सरलता से और संक्षेप में बात करें। उसके पवित्र आत्मा से कहें कि वह आपको उस शास्त्रभाग से सिखाए जिसे आप पढ़ने वाले हैं।

चरण 2 - परमेश्वर का वचन पढ़ें और प्रश्न पूछें

समूह में से किसी को बाइबल से पढ़ने के लिए कहें। जब आप पढ़ना समाप्त कर लें, तब समूह को इन दो प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए:

  • आपको इस शास्त्रभाग के बारे में क्या अच्छा लगा?
  • इस शास्त्रभाग के बारे में समझने के लिए आपको क्या चुनौतीपूर्ण या कठिन लगा?

उसी शास्त्रभाग को दूसरी बार पढ़ें, और फिर समूह से इन दो प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहें:

  • इस शास्त्रभाग के द्वारा हम लोगों के बारे में क्या सीख सकते हैं?
  • इस शास्त्रभाग के द्वारा हम परमेश्वर के बारे में क्या सीख सकते हैं?

याद रखें कि शास्त्रभाग से जुड़े रहें और इसे सरल रखें!

आगे देखना

चरण 1 - परमेश्वर के उद्देश्य के लिए प्रार्थना करना

आपके समूह में के प्रत्येक व्यक्ति को चुपचाप प्रार्थना करने और परमेश्वर से ये प्रश्न पूछने के लिए कहें:

  • हे परमेश्वर, आप जो मुझे सिखा रहे हैं मैं उसका आज्ञा पालन कैसे कर सकता हूँ और उसे कैसे लागू कर सकता हूँ?
  • मैं इस शास्त्रभाग के द्वारा किसे प्रशिक्षित कर सकता हूँ ताकि वे आपकी आज्ञा का अधिक पालन करना और आपसे अधिक प्रेम करना सीख सकें?
  • मैं अपनी गवाही या यीशु के बारे में का आपका सुसमाचार किसके साथ साझा करूं ऐसी आपकी इच्छा है?

परमेश्वर के पवित्र आत्मा से आपको ऐसे विशिष्ट उत्तर, विशिष्ट नाम और विशिष्ट कदम दर्शाने के लिए प्रार्थना करें जिन्हें आप अभी से लेकर जब आपका समूह फिर से मिलेगा, तब तक के समय में कार्य में ला सकते हैं।

चरण 2 - प्रतिबद्धताएँ जुटाना

अपने समूह के प्रत्येक व्यक्ति से पूछें कि उन्होंने प्रत्येक प्रश्न के लिए प्रभु से क्या उत्तर सुना है। हो सकता है कि किसी ने एक, दो या सभी तीनों प्रश्नों के लिए प्रभु से कुछ भी न सुना हो। वे बस यह रिपोर्ट कर सकते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं सुना।

लेकिन याद रखें, समूह को प्रभु से सुनना चाहिए। यीशु ने कहा - "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं।" और आपके आज्ञाकारिता के कदम जितने अधिक विशिष्ट होंगे, हमारे फिर से मिलने से पहले तक उनका पालन करना उतना ही आसान होगा।

चरण 3 - अपनी योजना का अभ्यास करना

एक साथ अपना समय समाप्त करने से पहले, अपने 3/3 समूह को दो या तीन के छोटे समूहों में विभाजित करें और उन बातों का अभ्यास करें जो आपने सुना है कि प्रभु ने आपको करने के लिए कहीं हैं।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणा:

इस सत्र में सुना गया उपकरण:

  • लीडरशिप (नेतृत्व) सेल्स
  • 3/3 समूह बैठक (मीटिंग) पैटर्न

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

अपनी 100 लोगों की सूची में से कुछ ऐसे लोगों को चुनें जो पहले से ही विश्वासी हैं। उन्हें लीडरशिप सेल्स के बारे में समझाएँ और देखें कि क्या वे इसका हिस्सा बनने में रुचि रखते हैं।

साझा करें

प्रार्थना करें और परमेश्वर से पूछें कि समूह फिर से मिलने से पहले किसके साथ आप लीडरशिप सेल उपकरण साझा करें ऐसी उसकी इच्छा है। उन्हें चुनौती दें कि वे इसे किसी और के साथ साझा करें।

सत्र 9

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 1355

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना करें और परमेश्वर को धन्यवाद दें क्योंकि उसके मार्ग हमारे मार्ग नहीं है और उसके विचार हमारे विचार नहीं हैं । उससे मांगे की वह आपके समूह के हर सदस्य को मसीह का मन दें - हमेशा उसके पिता के कार्य पर केंद्रित । पवित्र आत्मा से मांगे की वह आपके मिलजुलकर समय की अगुवाई करें और इसे अभी तक का बेहतरीन सत्र बनाएं।

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इन अवधारणाओं को सुनेंगे और उन पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • गैर-अनुक्रमिक बढ़ोतरी की उम्मीद रखें
  • गुणात्मक वृद्धि की गति अन्तर पैदा करती है।
  • सदैव दो चर्च (कलीसियाओं) का हिस्सा
  • कोचिंग चेकलिस्ट
  • चार फील्ड्स (क्षेत्र) साधन
  • जनरेशनल मैपिंग (पीढ़ी मानचित्रण)

READ

(5 min)

गैर-अनुक्रमिक बढ़ोतरी

इस सत्र में, हम सीखेंगे कि राज्य की बढ़ाने के लिए एक रेखीय तरीके से सोचने की आदत को कैसे तोड़ना है। ऐसे शिष्य बनाने के लिए जो तेजी से शिष्य बनाते हैं, हमें ध्यान रखने की जरुरत है कि एक ही समय में बहुत सी चीजें हो सकती है और जरुरी नहीं है कि वे एक क्रम में हो।

हमें बिना क्रम की वृद्धि की सामर्थ को सीखना पड़ेगा। जब लोग चेलों की बढ़ोत्तरी के बारे में सोचते हैं, तो वे अक्सर इसे एक के बाद एक होनेवाली प्रक्रिया समझते हैं।

पहले प्रार्थना। फिर तैयारी। फिर परमेश्वर का सुसमाचार बताना। फिर चेलों को बढ़ाना। फिर चर्च को बढ़ाना। फिर लीडर्स को विकसित करना। फिर पुन:उत्पादन।

जब हम इस तरह से सीखते हैं, तब राज्य में बढ़ोतरी आसान, रेखीय और क्रमानुसार प्रक्रिया लगती है। परेशानी यह है कि यह हमेशा इस तरह से काम नहीं करता है। बड़ी परेशानी यह है कि यह हमेशा इस तरह से सर्वश्रेष्ठ रीति से काम नहीं करता है।

यह रेखा एक व्यक्ति के जीवन को दर्शाती है। यहाँ जन्म है। यहाँ वे पहली बार परमेश्वर का सुसमाचार सुनते हैं। यहाँ वे प्रभु यीशु का शिष्य बनने का निर्णय लेते हैं। यहाँ वे अपनी कहानी को और परमेश्वर की कहानी को बताते हैं और बढ़ने लगते हैं। और यहीं जीवन का अंत है।

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तो यहाँ से यहॉं तक - पहली बार प्रभु यीशु के बारे में सुनने से लेकिर प्रभु यीशु के बारे में बताने तक, इसे हम एक आत्मिक पीढ़ी कहते हैं।

बढ़ने से पहले का समय। परमेश्वर के परिवार के बढ़ने से पहले का समय। सामान्यत शिष्यों को इसी तरह से सिखाया जाता है। लेकिन जब हम सबसे महान आशीष जैसे नमूने का इस्तेमाल करते हैं तो देखिये क्या होता है।

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अब एक नया शिष्य तुरंत बढ़ने लगता है। आत्मिक पीढ़ी संक्षिप्त हो जाती है। कोई परमेश्वर के सुसमाचार को जल्दी सुनता है। परमेश्वर का परिवार तेजी से बढ़ता है। बहुत से लोग अनंत काल के लिए बच जाते हैं।

और यह सब केवल आगे बढ़ने के द्वारा होता है जब वे बढ़ते हैं। लेकिन तब क्या जब हम लगातार आगे बढ़ते रहें? तब क्या जब कोई आरंभ में ही बढ़ने लगे? तब क्या जब वे पहली बार विश्वास करने के बजाय पहली बार सुनने के बाद ही प्रचार करने लगे?

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कुछ लोग प्रभु यीशु को "हाँ कहने से पहले ही एक समूह को इकट्ठा करने और परमेश्वर के वचन से जो सीखते हैं उसे दोस्तों और परिवार को बताने के लिए तैयार रहते हैं । यदि हम उन लोगों को दिखाएं कि एक समूह को कैसे इकट्ठा करना है और जो सीखा है उसे करने के लिए कैसे बताना है और सिखाना है, तो परमेश्वर का परिवार और भी तेजी से बढ़ेगा। अब शिष्य बनना प्रभु यीशु तक पहुँचने का एक मार्ग है ना कि उद्धार के बाद का जो हम प्रचार करते हैं।

इस तरह से एक परिवार या मित्र या एक गॉंव प्रभु यीशु के शिष्य बन सकते हैं। लेकिन तब क्या जब कोई इससे भी तेजी से बढ़ सकता है? तब क्या जब कोई परमेश्वर के पुत्र से मिलने से पहले ही परमेश्वर के तरीकों को बताने लगे?

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कभी कभी एक समूह शायद तुरंत परमेश्वर के सुसमाचार को सुनने में असक्षम हो या तैयार न हो। लेकिन फिर भी यह समूह परमेश्वर के नमूने को सीख सकता है - समुदाय के विकास या लीडरशिप प्रशिक्षण जैसे प्रयासों के द्वारा। यह समूह परमेश्वर के नमूने को बढ़ाना शुरु कर सकता है - सीखते हुए - आज्ञा मानते हुए - बाँटते हुए - और प्रभु यीशु के बारे में सुनने से पहले ही दूसरों को भी यही करना सीखाते हुए।

जब ऐसा होता है, तब परमेश्वर के तरीके इच्छुक के हृदय पर छप जाते हैं। उनके नमूने एक समुदाय और व्यक्ति के जीवन में बुन दिए जाते हैं। परमेश्वर का मार्ग तैयार हो जाने के बाद - परमेश्वर का सुसमाचार उस सच्चाई को प्रगट कर सकता है जिसे वे ग्रहण कर रहे थे। इस तरह से एक संस्था, एक समुदाय, या एक देश प्रभु यीशु का शिष्य बन सकता है।

बिना क्रम की वृद्धि में इस सोच की आवश्यकता है कि "क्या महत्वपूर्ण है?" प्रक्रिया चाहें जो भी हो - बड़ा प्रश्न हमेशा वही रहेगा - अच्छी भूमि कौन है जो विश्वासयोग्य ठहरेगा? कौन परमेश्वर के तरीकों को सीखेगा और अभ्यास करेगा और दूसरों को बताएगा?

अच्छी भूमि को खोलना - यानि अच्छे हृदयों को खोजना - हमारे सारे समय और ऊर्जा और प्रयास के योग्य हैं इनके लिए हम अपने हृदय को ऊँडेलते हैं। इनके लिए हम अपना जीवन ऊँडेलते हैं। यें लोग सर्वश्रेष्ठ रीति से परमेश्वर के राज्य को बढ़ाते हैं।

चर्चा करें

(10 min)

  1. इस वीडियो में सबसे ज्यादा अद्भुत विचार कौन सा है जो आपने सुना हो? क्यों?
  2. सबसे चुनौतीपूर्ण विचार क्या है? क्यों?

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(5 min)

गति

इस सत्र में हम सीखेंगे कि बढ़ना क्यों जरुरी है तथा जल्दी से बढ़ना और भी जरुरी क्यों है। यह सत्र गति के बारे में है। गति समय के बारे में है यानि चीजें कितनी तेजी से या धीमे से होती है। गति से फर्क पड़ता है क्योंकि जहाँ हम सब अपना अनंत बिताते हैं - एक अस्तित्व जो सदा तक बना रहेगा। यह छोटे से समय में निर्धारित होता है - जिसे हम "जीवन" कहते हैं।

परमेश्वर का वचन हमें बताता है कि परमेश्वर हमारे साथ धीरज धरते हैं - वह नहीं चाहते कि किसी का नाश हो, बल्कि हर एक का उद्धार हो। परमेश्वर हमें और समय देते हैं क्योंकि वह जानते हैं कि हमारे पास समय कम है जिसे करने के लिए उन्होंने हमें बुलाया है और उन सभी तक पहुँचने के लिए जिनतक पहुँचने के लिए उन्होंने बुलाया है।

प्रभु यीशु के पीछे नजदीकी से चलने के लिए, हमें उनके लोगों के पीछे और तेजी से जाना है। हम अपने समय से नहीं चल सकते हैं। हमें अपनी गति बढ़ानी होगी।

वैश्विक चर्च - प्रभु यीशु के सभी शिष्य, - पहले से और भी ज्यादा है। वैश्विक चर्च - प्रभु यीशु के सभी शिष्य - दुनिया की आबादी में अब तक और ज्यादा बड़ा हिस्सा। लेकिन इतनी बड़ी जनसंख्या के बावजूद - वैश्विक चर्च, वैश्विक जनसंख्या की तुलना में तेजी से नहीं बढ़ रहा है।

इसका अर्थ है कि जबकि प्रभु यीशु के शिष्यों की संख्या पहले से ज्यादा है, फिर भी बहुत से लोग हैं जो प्रभु यीशु के पीछे नहीं चल रहे हैं और अनंत काल तक उनसे अलग जीएंगे, पहले से कहीं ज्यादा।

ऐसे चेले बनाना जो बढ़ोत्तरी लाते हैं, जरुरी है। एक चेले से शुरुवात किजिए। यदि वे बढ़ते हैं यदि वे हर 18 महिने में एक नया शिष्य बनाते हैं और फिर वे शिष्य भी ऐसा ही करते हैं - तो 10 सालों में, प्रभु यीशु के 64 नये चेले बन जाएंगे।

64 लोग अपनी अनंत जीवन प्रेमी परमेश्वर के साथ बिताएँगे।

लेकिन यदि वे थोड़ी और तेजी से आगे बढ़ें तो? यदि वे अपनी गति बढ़ा लें तो?

यदि अब वे 18 महिनों के बजाय 4 महिनों में बढ़ जाएँ, और वे शिष्य भी ऐसा ही करें - तो 10 सालों में, प्रभु यीशु के एक करोड़ नये शिष्य बन जाएंगे।

इस बारे में सोचिये। 100 से कम होने के बजाय। 1000,000,000 से भी ज्यादा।

केवल गति बढाने के द्वारा।

18 महिने से 4 महिने में जाने का अर्थ है हम साढ़े चार गुना तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन 10 सालों में हर शिष्य पर इस बढ़ोतरी को लागू करने का अर्थ है परमेश्वर का परिवार डेढ़ करोड़ गुना तेजी से बढ़ रहा है। सौ से कम। करोड़ से भी ज्यादा।

गति जरुरी है।

अपनी और परमेश्वर की कहानी बताने से और किसी को प्रभु यीशु में लाने से परमेश्वर का परिवार बढ़ता है। एक नये शिष्य को बताना कि इसे इसी तरीके से कैसे किया जाए, यह परमेश्वर के परिवार को जंगल की आग की तरह बढ़ाता है। बहुत तेजी से।

एक आटे में खमीर की तरह।

Zume की तरह।

गति के द्वारा।

चर्चा करें

(10 min)

  1. गति महत्वपूर्ण क्यों है?
  2. आपकी सोच, आपके कार्य, या आपका स्वाभाव में किन चीजों के बदलाव की आपको जरूरत हैं ताकि आप गति प्राप्त करने के लिए परमेश्वर की प्राथमिकता से बेहतर तरीके से जुड़ सके?
  3. इस सप्ताह के शुरुआत में आप कौन सी ऐसी एक चीज कर सकते जिससे कुछ फर्क नजर आ सकता है?

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(5 min)

सदैव दो कलीसियाओं का हिस्सा

इस सत्र में, हम सीखेंगे प्रभु यीशु के शिष्य का बढ़ना और विश्वासयोग्य होना आत्मिक परिवार को बढ़ते हुए विश्वासीयों का शहर बनने में सहायता करने के लिए दो चर्च का भाग बन सकते हैं। परमेश्वर के वचन में - हम सीखते हैं कि हमारे लिए उनकी सिद्ध योजना है कि हम एक आत्मिक परिवार के रूप में जीएँ। बाईबल इस परिवार को एक चर्च के रूप में बताती है जिसके तीन प्रकार है।

  • सार्वभौमिक चर्च - सभी विश्वासीयों का इकट्ठा होना जो थे, जो हैं और जो होंगे।
  • क्षेत्रीय या शहर चर्च - एक शहर में या देश के किसी भाग में विश्वासियों का इकट्ठा होना।
  • साधारण चर्च -विश्वासियों का इकट्ठा होना जो एक छोटे समूह में मिलते हैं जैसे कि एक ईमारत में या घर में।

यह सबसे छोटा समूह - यानि शक्तिशाली चर्च एक आत्मिक परिवार है जो साथ जीवन जीता है और जब परिवार महिनों या सालों तक मिलकर साथ काम कर पायें यह सर्वश्रेष्ठ रीति से काम करता है । प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को निर्देश दिया कि लगातार नये आत्मिक परिवारों की शुरुवात करनी चाहिये और उन्हें बढ़ाना चाहिये ताकि वे प्रभु यीशु के जैसे बनें, और उन्हें यह सिखाना है कि नये आत्मिक परिवार की शुरुवात कैसे की जाए।

प्रभु यीशु ने हमसे कहा है - सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैंने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ। तो ये दो चीजें साथ में कैसे काम करती हैं -हम चर्च का एक भाग होकर एक और नया चर्च की शुरुवात करने की प्रक्रिया में कैसे जुड़ सकते हैं - वह भी एक ही समय में?

एक मौलिक चर्च की कल्पना किजिए - केवल चार परिवार। हर जोड़ा एक अलग पति-पत्नी को दर्शाता है जो अपना घर चलाते हैं। सभी पति-पत्नी एक चर्च का हिस्सा हैं - यह उनका आत्मिक परिवार है।

इनके साथ वे जीवन बिताते हैं - भाई और बहन जो उन्हें प्रेम से भले कामों में उत्साहित करते हैं। यें पति-पत्नी एक नये आत्मिक परिवार की शुरुवात करने के लिए भी काम करते हैं। जब नये आत्मिक परिवार की शुरुवात और वृद्धि होती है, तो वे अपने छोटे समूह परिवार की तरह हिस्सा नहीं लेते, बल्कि वे नमूना दिखाते हैं और सहायता करते हैं।

कल्पना किजिए - सिर्फ एक चर्च चार नये चर्च की शुरुवात करता है। परमेश्वर इस तरह से अपने परिवार को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इस तरह से चर्च अपनी गति को बढ़ा सकता है।

आरंभिक सत्र में हमने प्रशिक्षण श्रृंखला के बारे में सीखा - नमूना, सहायता करना, देखना और छोड़ना और हम जानते हैं कि ये पहले दो चरण - नमूना और सहायता करना जल्दी से किया जाना चाहिए - ताकि नये विश्वासी स्वस्थ रहें और अपने विश्वास में बढ़ें।

मुख्य चर्च और उन चार चर्च के साथ क्या होता है, जो उन्होंने शुरु किया है? नमूना दिखाने और सहायता करके शुरुवात करने करने के बाद, ये पति-पत्नी (मुख्य चर्च) पहले ही नये चर्च (पहली पीढ़ी) की मदद कर चुके हैं, ताकि वे इसे दोहराएं (दूसरी पीढ़ी के लिए)। इन नये चार चर्च के लिए (पहली पीढ़ी), हमारे पति-पत्नी (मुख्य चर्च) अब निगरानी रखते हैं - इन नये चर्च (पहली पीढ़ी) की उन्नति को देखते और सीखाते हुए - जब वे नये चर्च (दूसरी पीढ़ी) को नमूना दिखाते और उनकी सहायता करते हैं।

बहुत से लोग एक से ज्यादा आत्मिक परिवार को नमूना दिखाना और मदद करना नहीं कर सकते। किंतु वे उनके बढ़ने में बहुत से चर्च की निगरानी कर सकते हैं और उन्हें सिखा सकते हैं और अनुभवी लोगों से जुड़ने में उनकी मदद कर सकते हैं।

इसका अर्थ है एक आत्मिक परिवार यानि एक छोटे समूह वाला चर्च एक ही समय में बहुत से छोटे-छोटे समूह चर्च की शुरवात करने का हिस्सा बन सकता है। यह बहुत अधिक फल है। सभी चर्च के साथ क्या होता है - जब वे बढ़ते हैं और नये चर्च की शुरुवात करते हैं, फिर एक और नये चर्च की शुरुवात करते हैं? वे कैसे जुड़े रहते हैं? और एक बड़े आत्मिक परिवार के रूप में कैसे जीवन बिताते हैं?

इसका जवाब है ये साधारण चर्च शरीर में कोशिकाओं की तरह बढ़ते हैं और एक साथ जुड़ते हैं और शहर या क्षेत्रीय चर्च में नेटवर्क बनाते हैं। चर्च एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। उनमें एक जैसा आत्मिक डी.एन.ए होता है। ये सभी बढ़नेवाले प्रथम परिवार से जुड़े रहते हैं।

अब वे - थोड़ा मार्गदर्शन के साथ - और ज्यादा करने के लिए एक बड़े शरीर के रूप में एकसाथ आते हैं।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या फ़ायदे हैं एक निरंतर आत्मिक परिवार बनायें रखने के जो उन नए आत्मिक परिवारों को जन्म देता हैं जो बढ़ते और गुणा करते हैं, बजाय इसके कि परिवार को लगातार बढ़ाया जाए और बढ़ने के लिए उसे विभाजित किया जाए?

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(5 min)

कोचिंग चेकलिस्ट

प्रभु यीशुने कहा-"इससे बड़ा प्रेम किसी का नही, कि कोाई अपने मित्रो के लिये प्राण दे।" प्रभु यीशु ने हमें बताया हमें बारबार दिखाया कि परमेश्वर का परिवार अच्छे से बढता है जब हम परमेश्वर की अभिालाषा के लिये अपनी इच्छाये त्यागने के इच्छुक होते है।

प्रशिक्षण की जांचसूची एक सरल साधन है जिसे आप स्वयंको मागदर्शन देने में इस्तेमाल करसकते है जब आप Zume प्रशिक्षण के विभिन्न विभागों के माध्यम से दुसरों की सहायता करते है जैसे कि प्रशिक्षण / अभ्यासचक्र या उनकी 100 की सूची।

दुसरो के विकास में आप क्या कुशलता देख रहे है?

कौन से क्षेत्रों में अभी विकास की जरूरत है, एक प्रशिक्षण की जांच सूची का होना आप के ध्यान केन्द्रित करने में मदद करेगा और आप को परमेश्वर के परिवार में अगुवाओ के बीच प्रभु यीशु के विकसित अनुयायियों के रूप में बांधे रखेगा, चाहे आप कहीं भी जाओ।

हाँ, इस में प्रयास और समय लगता है। हाँ, इसका मतलब है त्याग और हमारी प्राथमिकताओ छोड़ना, परमेश्वर की उत्तम योजना के लिये। और हाँ, य अन्यो की तुलना में, ये करना उचित है।

प्रशिक्षण की जांच सूची Zume Toolkit का एक सरल साधन है जो आप को जीवन के सबसे बड़े खेल में टिके रहने में मदद करता है जो है - परमेश्वर का कार्य।

गतिविधि

(20 min)

Coaching Checklist

QR कोड को स्कैन करें या कागज का एक टुकड़ा खोजें।

पंक्ति 1 का उपयोग करके स्वयं का मूल्यांकन करें और कोचिंग चेकलिस्ट पर संबंधित कॉलम को चिह्नित करें।

चर्चा करें

(10 min)

  1. कौन से उपकरण और अवधारणाएँ अच्छी तरह से प्रशिक्षित करने में आपको सक्षम महसूस हुईं?
  2. कौन से उपकरण और अवधारणाएँ अच्छी तरह से प्रशिक्षित करने में आपको संघर्ष करना पड़ा?
  3. क्या कोई उपकरण या अवधारणाएँ हैं जिन्हें आप चेकलिस्ट में जोड़ना या उससे घटाना चाहेंगे? क्यों?

गतिविधि

(5 min)

Get a Coach

याद रखें-प्रशिक्षण साथी या अन्य परामर्शदाता के साथ अपने कोचिंग चेकलिस्ट परिणाम साझा करने के लिए सुनिश्चित करें।

यदि आपके पास कोई कोच या मेंटर नहीं है, तो QR कोड को स्कैन करें और अभी अनुरोध करें।

चार फील्ड्स (क्षेत्र) और जनरेशनल मैपिंग बढ़ते आंदोलन प्रयासों की सेवा के लिए डिज़ाइन किए गए उपकरण हैं।

अनुस्मारक: Zúme कोच आपके स्थानीय क्षेत्र में इन उपकरणों को लागू करने में आपकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं।

चार फील्ड्स (क्षेत्र)

यीशु अक्सर शिष्यों को सेवकाई से दूर शांत स्थानों पर ले जाते थे ताकि वे समीक्षा कर सकें कि काम कैसे चल रहा था।

चार फील्ड्स (क्षेत्र) का उपयोग लीडरशिप (नेतृत्व) सेल द्वारा वर्तमान प्रयासों और उनके आसपास राज्य गतिविधि पर विचार करने के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से अगुवों को प्रयासों को संतुलित करने में मदद करता है, ताकि कोई भी क्षेत्र अनदेखा न रहे।

अगली दो स्लाइडों की समीक्षा करें: फ़ील्ड विवरण और चार फील्ड्स उदाहरण

क्षेत्र विवरण

चर्चा करें

(10 min)

  1. अपने आस-पास के खाली क्षेत्र की पहचान करें। आप ऐसे कौनसे समुदायों या लोगों के समूहों से जुड़े हैं जिनमें कोई सुसमाचार गतिविधि नहीं है?
  2. यदि किसी एक क्षेत्र की उपेक्षा की जाती है, तो दीर्घकालिक विकास कैसे प्रभावित होता है? उदाहरण दें।
  3. कौन से Zúme उपकरण किस क्षेत्र में मदद कर सकते हैं?

जनरेशनल मैपिंग (पीढ़ी मानचित्रण)

जनरेशनल मैपिंग (पीढ़ी मानचित्रण) अगुवों को उनके आस-पास एक आंदोलन की वृद्धि को समझने में सहायता करने के लिए एक और साधारण साधन है।

एक जनरेशन ट्री मैप को कागज के किसी टुकड़े पर या कागज के कई टुकड़ों पर चित्रित किया जा सकता है। यह मानचित्र यह दिखाने में मदद करता है कि गुणात्मक वृद्धि कहां रूकती है और कहां प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है। गतिविधि का स्वास्थ्य अगुवों के लिए एक शीर्ष चिंता का विषय है और फलना-फूलना स्वास्थ्य को मापने का एक शीर्ष तरीका है।

अगली स्लाइड पर उदाहरण देखें।

चर्चा करें

(10 min)

जनरेशनल मैपिंग उदाहरण का उपयोग करके निम्नलिखित पर चर्चा करें:

  1. कौन से अगुवें गुणन देख रहे हैं?
  2. आप आगे किस समूह के गुणन की अपेक्षा करेंगे?
  3. कौन से अगुवें अन्य अगुवों की मदद कर सकते हैं और उन्हें मजबूत कर सकते हैं?
  4. क्या आप किसी भी पीढ़ी में कमज़ोर जवाबदेही का पैटर्न देखते हैं?

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणाएँ:

इस सत्र में सुने गए उपकरण:

  • गैर-अनुक्रमिक बढ़ोतरी की उम्मीद रखें
  • गुणात्मक वृद्धि की गति अन्तर पैदा करती है।
  • सदैव दो चर्च (कलीसियाओं) का हिस्सा
  • कोचिंग चेकलिस्ट
  • चार फील्ड्स (क्षेत्र) साधन
  • जनरेशनल मैपिंग (पीढ़ी मानचित्रण)

NEXT STEP

आज्ञा पालन करें

किसी मित्र के साथ “गति” की अवधारणा को साझा करने का अभ्यास करें और प्रभु से प्रार्थना करें कि वह इसे आपके हृदय और प्राण में गहराई से समाहित कर दे। प्रभु से पूछें कि आप किसके साथ यह साझा करें ऐसी उसकी इच्छा है।

साझा करें

यदि आपने पहले से ही अपना स्वयं का साधारण चर्च शुरू कर दिया है, तो उसमें मौजूद लोगों के साथ “सदैव दो चर्चेस का हिस्सा” की अवधारणा साझा करें। यदि नहीं, तो इसे अपने किसी अन्य विश्वासी के साथ साझा करें जिसे आप जानते हैं।

सत्र 10

चेक-इन

(1 min)

सभी सहभागियों और सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) को चेक-इन करवाएं।

Or six.zume.training/checkin and use code: 5430

प्रार्थना करें

(5 min)

प्रार्थना करें और परमेश्वर को धन्यवाद दें कि वह हमारे अंदर अपना अच्छा काम पूरा करने के लिए विश्वासयोग्य है।

उससे कहें कि वह आपके समूह को स्पष्ट दिमाग और खुले दिल दे उन महान चीजों के लिए जिन्हें वह आपके अंदर और आपके द्वारा करना चाहता है।

पवित्र आत्मा से कहें कि वह साथ में के आपके समय की अगुवाई करे और उसकी विश्वासयोग्यता के लिए भी उसे धन्यवाद दें। उसने आपको आगे बढ़ाया!

पीछे देखें

(5 min)

शुरू करने से पहले, पीछे देखने के लिए कुछ समय निकालें।

पिछले सत्र के अंत में, आपके समूह के सभी लोगों को आपने जो सीखा है उसका अभ्यास करने की चुनौती दी गई थी।

कुछ क्षण निकालकर देखें कि इस सप्ताह आपके समूह ने कैसा प्रदर्शन किया।

प्रोत्साहित हो जाएँ ..।

आप शायद इसे जानते न हो, लेकिन अब आपके पास अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण है उन दुनिया भर के पास्टरों और मिशनरियों की तुलना में एक साधारण चर्च शुरू करने और ऐसे शिष्य बनाने के लिए जो गुना करते है।

फिर भी ज़ूमे प्रशिक्षण केवल शुरुआत है! इस सत्र में, हम प्रशिक्षण के बाद क्या होगा, इसके लिए एक योजना बनाएंगे और संक्षेप में उन उपकरणों का परिचय देंगे जिनकी आपको बाद में अपनी यात्रा में आवश्यकता होगी जब आप सीखी गई बातों को लागू करेंगे।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में, हम इस अवधारणा को सुनेंगे और इस पर चर्चा करेंगे:

और हम इन उपकरणों को अपने टूलकिट में शामिल करेंगे:

  • नेटवर्क में लीडरशिप (नेतृत्व)
  • सहकर्मी सलाह समूह
  • तीन माह की योजना

READ

(5 min)

नेटवर्क में लीडरशिप

इस सत्र में, हम सीखेंगे कि नेटवर्क में लीडरशिप - छोटे चर्च के बढ़ते समूह को एकसाथ काम करने, नये लीडर्स तैयार करने और अच्छी चीजों को प्राप्त करने में कैसे मदद करता है जिसकी योजना परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए की है।

चर्च के साथ क्या होता है, जब वे बढ़ते हैं और नये चर्च की शुरुवात करते हैं जो एक और नये चर्च की शुरुवात करते हैं? वे कैसे जुड़े रहते हैं? और एक बड़े आत्मिक परिवार के रूप में कैसे जीते हैं?

इसका जवाब है ये सभी साधारण चर्च शरीर में कोशिकाओं की तरह बढ़ते है और एक साथ जुड़ते हैं और शहर या क्षेत्रीय चर्च में नेटवर्क बनाते हैं।

चर्च एक दूसरे से जुड़े होते हैं। उनके पास एक जैसा आत्मिक डी.एन.ए होता है। ये सब बढ़नेवाले प्रथम परिवार से जुड़े होते हैं।

अब - थोड़े मार्गदर्शन से - और ज्यादा करने के लिए वे एक बड़े शरीर के रूप में साथ आते हैं। परमेश्वर का वचन बताता है कि, शहर और क्षेत्रीय स्तर पर विश्वासियों की बढ़ती देह की सेवा लीडर्स का नया समूह करता है।

नये नियम में, चर्च इन सेवकों को प्राचीन और उपयाजक (डिकन), भंडारी और भेड़ों के रखवाले कहता है।

परमेश्वर के वचन में हम सीखते हैं कि यरुशलेम शहर में बहुत से छोटे घरेलू चर्च की की सेवकाई 7 सेवकों का समूह - या उपयाजक (डिकन्स) करते थे।

परमेश्वर के वचन में हम सीखते हैं कि इफिसुस शहर में बहुत से घरेलू चर्च की सेवकाई प्राचीनों - चरवाहों के छोटे से समूह द्वारा की जाती थी, जिन्हें अच्छे चरवाहा - प्रभु यीशु के उदाहरण पर चलना था और भेड़ों के लिए अपनी जान देनी थी।

शहर या क्षेत्र में हम लीडरशिप के पाँच वरदानों को देखते हैं।

परमेश्वर का वचन कहता है - मसीह ने प्रेरितों, भविष्यवक्ताओं, सुसमाचार प्रचारकों, पासवानों और शिक्षकों को आत्मिक वरदान दिये ताकि वे सेवा के लिए लोगों को तैयार करें और मसीह की देह उन्नति पाए।

ये आत्मिक वरदान इसलिए नहीं दिये गए कि छोटा समूह चर्च का सारा काम करे, बल्कि इसलिए कि वे सेवा करें और प्रभु यीशु के शिष्यों को काम के लिए तैयार करें - ताकि विश्वासियों की संपूर्ण देह साथ मिलकर परमेश्वर की सभी इच्छाओं को पूरा करें।

अपने आत्मिक परिवार या इन जगहों के अलावा ये लीडर्स आपस में मिलते और प्रार्थना करते और सहभागिता करते और एक दूसरे को उत्साहित करते, ठीक उसी तरह जैसे घर में कोई साधारण चर्च करता था।

लीडरशिप प्रशिक्षण सभाओं और साथियों को तैयार करने में 3/3 नमूने का इस्तेमाल किया गया है।

योजना बनाने, आकलन करने और उच्च स्तर पर सिखाने के लिए चार क्षेत्रीय नमूने का उपयोग किया गया, जैसा कि यह स्थानीय स्तर पर है।

जब लीडर्स मिलते हैं तो वे बताते हैं कि उनके साथ और उनके नेटवर्क में क्या हो रहा है। वे परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी कुशलता के बारे में बताते हैं।

आत्मिक परिवारों के नेटवर्क के लिए केंद्र एक अच्छा स्थान है, जहाँ से नेटवर्क शुरु होता है। एक चर्च नेटवर्क जो ताम्पा से शुरु होता है, वह ताम्पा में शहर का चर्च होगा। जब वे बढ़ते हैं और पूरे राज्य में सेवकाई करते हैं, तो वे फ्लोरिडा में नेटवर्क के लिए काम करेंगे। जब वे देश में और दुनिया में भेजे जाते हैं और सेवकाई करते हैं, तो वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं।

प्रभु यीशु ने कहा है - यदि तुम थोड़े में विश्वासी हो तो बहुत में भी विश्वासी हो।

चर्च के ये नेटवर्क एक दूसरे से जुड़े होते हैं, उनके एक जैसे आत्मिक डी.एन.ए और एक जैसी शुरूवात होने के कारण। कभी कभी नेटवर्क बहुत से नेटवर्क में बँट जाते हैं, भाषा, मिलने के अवसर या अन्य कारणों से।

ये बढ़ोतरी का हिस्सा है ना कि परेशानी का।

सीखने, आज्ञा मानने और परमेश्वर के वचन को बाँटने के लिए साधारण चर्च और शिष्यों की इच्छा एक अभियान के आत्मिक डी.एन.ए हैं। यदि ये सफतापूर्वक पीढ़ी से पीढ़ी, चर्च से चर्च और विश्वासी से विश्वासी को दे दिये जाएं, तो शिष्यों को बढ़ाने के नये अभियान की शुरुवात करने के लिए हर आवश्यक चीजें आत्मिक परिवार में तथा प्रभु यीशु के हर शिष्यों में पहले से ही मौजूस रहेंगी।

जब अभियान, अभियान की शुरुवात करता है, तब हम शहर या राज्य या देश के आंटे में "खमीर" को काम करते हुए देखते हैं। परमेश्वर का राज्य इस तरह से आता है कि परमेश्वर की इच्छा पृथ्वी पर उसी तरह से पूरी होती है जैसे स्वर्ग में होती है। इस तरह से सभी देशों को शिष्य बनाने के द्वारा हम इस महान अभियान को पूरा कर सकते हैं।

चर्चा करें

(10 min)

  1. क्या कोई लाभ है जब साधारण चर्चेस के नेटवर्क जुड़ जाते हैं एक गहरे, व्यक्तिगत संबंधों से? कुछ उदाहरण हैं जो मन में आते हों?

READ

(5 min)

सहकर्मी सलाह

प्रभु यीशु ने कहा।- "मैं तुम्हे नई आज्ञा देता हूँ, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो, जैसा मैने तुमसे प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो।। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगें, कि तुम मेरे चेले हो।"

एक सहकर्मी परामर्श दल वो है जो उन व्यक्तियों से बना होता है जो 3/3 दल को शुरु कर रहे है और अगुवाई कर रहे हैं। इसमें भी 3/3 प्रारूप का अनुसरण होता है और ये एक शक्तिशाली तरीका है आपके क्षेत्र में परमेश्वर के कार्य के आध्यात्मिक स्वास्थ्य का आकलन करने का।

सहकर्मि सलाह समूह एक एक अगुवा को प्रभु यीशु के एक एक अनुयायी को परामर्श देता है, साधारा कलुसिये, मंत्रालय संगठन या साधारण से वैश्विक कुलसिये के संघ के साथ जो विश्वभर में घूमते है।

सहकर्मी परामर्श दल, धर्मपुस्तिका से सेवकाई के प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरकरण करते है, एक एक करके प्रश्न पूछते है और अपना मत देते है--3/3 दल के रूप में एक ही बुनियादी समय सरचंना का इस्तेमाल करते हुये। इन दलों का उद्येष्य आलोचना करना नही है- एक सदस्य की प्रशंसा करना और दूसरे की आलोचना करना।

प्रभु यीशु ने कहा- "दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष लगाया जायेगा। क्योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा, और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।"

बल्कि, सहकर्मी परामर्श दल का उद्येश्य प्रभु यीशु के अनुयायियों के लिये एक सरल प्रारूप प्रदान करना है ताकि वे प्रार्थना, आज्ञाकारिता, आवेदन और जवाबदेही में आगे बढ़ सकें। दुसरे शब्दों में-"एक दुसरे से प्रेम करना"

देखिये ये कैसे कार्य करता हैः

पीछे देखे /अतीत में देखें

पहले तिहाई के दौरान- प्रार्थना और देखभाल में समय बिताये बिल्कुल वैसे ही जैसा आपने आरम्भिक 3/3 दल में किया था। फिर समूह की दूरदर्शिता को समझने में समय बिताये - कैसे हम व्यक्तिगत रूप से प्रभु यीशु में समाहित हो रहे है जब हम धर्मपुस्तिका पढ़ते है, परमेश्वर की प्रार्थना करते है, उन पर विश्वास और अनुयरण करते है और इतना महत्वपूर्ण संबंध बना।?

अंततः पहले तिहाई के दैारना, समूह की टिप्पणीयां पूछे और सभी की व्यक्तिगत कार्य योजनाओं पर प्रतिक्रिया दे और अंतिम सत्र में प्रतिबद्धता बनाये।

अवलोकन / झांकना

दल का मध्यम तिहाई समय परमेश्वर की बुद्धिमता में बिताये और धर्मपुस्तिका की दिशा और विचार विमर्श और प्रार्थना करने में बिताये। एक सरल और छोटी प्रार्थना करे, परमेश्वर से कहे वो अपने शब्दों द्वारा आपको अपने आदेशों और अपने तरीकों को आपको सिखाये। पवित्र आत्मा से आपके समय की अगुवाई करने को कहे।

दल के सदस्यों को सबको बताना चाहिये जो भी उन्होने अपने अगुवाई के क्षेत्र के बारे में परमेश्वर से सीखा-चाहे परमेश्वर के शब्दो के माध्यम से, प्रार्थना से या अन्य अनुयायियों से।

निम्नलिखित सरल प्रश्नों पर दल के साथ विचार विमर्श करेः

  • चार क्षेत्रों के ढांचे के प्रत्येक भाग में आप कैसा कर रहे है?
  • अच्छे से क्या चल रहा है? आपकी सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
  • अपने वर्तमान पीढ़ी के मानचित्र की समीक्षा करे।
  • आपको क्या चुनौतीपूर्ण लगता है या आपको समझने में क्या मुश्किले हुई थी?
  • हाल ही में परमेश्वर आपको क्या दिखा रहे है?
  • क्या अभी भी काई प्रश्न है और कोई प्रतिक्रिया है किसी अनुभवी अगुवाई या अन्य प्रतियोगियों की तरफ से?

आगे देखें / विचार करें

दल का अंतिम तिहाई समय विचार करने में बिताये कि जो हमने सीखा है उसे कैसे हम सब अनुसरण और लागू कर सकते है। दल में प्रत्येक के साथ मौन प्रार्थना में समय बिताये, पवित्र आत्मा को कहे कि उन्हे दिखाये कैसे इन प्रश्नों का उत्तर देंः

  • परमेश्वर ने अभ्यास के पहले कौनसे कार्य की योजनाये या लक्ष्य मेरे भीतर डाले होंगे, अगली बार एक साथ रहने के लिये? (अपने कार्य पर ध्यान केन्द्रित करने के लिये चार क्षेत्रीय टूल की मदद ले)
  • मेरा परामर्श दाता या अन्य दलके सदस्य कैसे इस कार्य में मेरी सहायता कर सकते हैं,

अंततः प्रार्थना में परमेश्वर से बात करते हुये एक समूह के रूप में समय बिताये। पूरे समूह के साथ प्रार्थना करे ताकि प्रत्येक सदस्य प्रार्थना कर और परमेश्वर को कहे कि वो उन सभी व्यक्तियों के हृदय को तैयार करने को कहे जिनके पास वो अपने अलग समय के दौरान जाने वाले है।

परमेश्वर के लिये प्रार्थना करे कि वो समूह के प्रत्येक सदस्य को साहस और बल दे ताकि वो परमेश्वर द्वारा इस सत्र में सिखायी बातों को लागू और उनका अनुसारण कर सके। यदि एक अनुभवी अगुवा एक युवक अगुवा के लिये विशेष प्रार्थना करना चाहता है, तो उस प्रार्थना के लिये ये बिल्कुल सही समय है।

जिस समय ये समूह अकसर एक दूरी पर मिलते है, तब आप परमेश्वर के भोजन या एक आहार को बांटने के उत्सव में सक्षम होते है, परन्तु निश्चित करे कि आप समय निकाले परिवार और मित्रों के स्वास्थ्य के बारे में लिखने का समय निकाले।

प्रभु यीशु ने हमें बार बार दिखाया कि भले ही वो उन्होने सबसे महत्वपूर्ण कार्य पूरा कर लिया हो, उन्होने संतुलन बना लिया हो, हमेशा, उन्होने अपनो के लिये समय निकाला जिनसे वो प्रेम करते है। एक सहकर्मि परामर्श दाता दल एक सरल पर Zume Toolkit का महत्वपूर्ण साधन है जो मजबूत अगुवाओं का विकास करता है।

गतिविधि

(45 min)

सहकर्मी सलाह समूह

QR कोड को स्कैन करें।

दो या तीन के समूहों में विभाजित हो जाएँ। 3/3 प्रारूपित सहकर्मी सलाह समूह रूपरेखा का उपयोग करें।

समूह में एक व्यक्ति को "शागिर्द" के रूप में चुनें और अन्य सदस्यों को सहकर्मी सलाहकारों के रूप में सुझाए गए प्रश्नों की सूची के माध्यम से काम करने दें।

सहकर्मी सलाह समूह (पीयर मेंटरिंग ग्रुप) का नेतृत्व करने के लिए सरल प्रारूप:

पीछे देखें [अपने समय का 1/3]

पहले एक-तिहाई के दौरान, प्रार्थना और देखभाल में समय बिताएं जैसे आप मूल 3/3 समूह में करेंगे। फिर समूह के उद्देश्य और पिछले प्रतिबद्धताओं में सच्चाई को देखने में समय व्यतीत करें। आप मसीह के साथ कितनी अच्छी तरह चल रहे हैं? [बाइबल पढ़ने, प्रार्थना, विश्वास, आज्ञाकारिता, महत्वपूर्ण रिश्ते?] क्या आपके समूह ने पिछले सत्र से आपकी कार्य योजना पूरी की थी? उनकी समीक्षा करें।

ऊपर देखें [1/3 अपना समय]

समूह में निम्नलिखित सरल प्रश्नों पर चर्चा की गई है।

  • चार फ़ील्ड आरेख के प्रत्येक अनुभाग में आप कैसे कर रहे हैं?
  • क्या चार फ़ील्ड आरेख अच्छी तरह से काम कर रहा है? आपकी सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
  • अपने वर्तमान पीढ़ी के नक्शे की समीक्षा करें
  • आपको क्या चुनौती दी गई या समझने में आपको कड़ी मेहनत मिली?
  • यह क्या है कि ईश्वर आपको हाल ही में दिखा रहा है?
  • क्या अनुभवी नेताओं या अन्य प्रतिभागियों से कोई सवाल है?

फॉरवर्ड देखो [अपने समय का 1/3]

समूह में हर किसी के साथ चुप्पी में प्रार्थना में समय बिताते हैं, पवित्र आत्मा से यह पूछिए कि इन सवालों का जवाब कैसे दिया जाए:

  • इससे पहले कि हम अगली बार एक साथ मिलें, कार्रवाई की योजनाएं या लक्ष्य क्या हैं जो परमेश्वर चाहते हैं कि मैं अपना उपयोग करना शुरू करूँ? [अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करने के लिए चार फ़ील्ड साधन का उपयोग करें]
  • मेरे संरक्षक या अन्य समूह के सदस्य इस काम में मेरी मदद कैसे कर सकते हैं?

अंत में, परमेश्वर से बात करने में समय बिताएं। समूह को प्रार्थना करने के लिए कहें ताकि प्रत्येक सदस्य के लिए प्रार्थना की जाए और परमेश्वर को उन सभी के दिलों को तैयार करने के लिए कहें जिन के पास समूह उनके अलग किए गए समय के दौरान पहुँचेगा। समूह के प्रत्येक सदस्य को जो परमेश्वर ने उनको इस शिक्षण-काल में सीखाया है उसको लागू करने और आज्ञा पालन करने की हिम्मत और ताकत देने के लिए कहें। यदि एक प्रशिक्षित अगुवे विशेषकर एक युवा अगुवे के लिए प्रार्थना करने की जरूरत है तो यह प्रार्थना के लिए सबसे बेहतर समय है। क्योंकि यह समूह अक्सर दूर इकट्ठठे होते है। आपके पास बहुत कम प्रभु-भोज का जश्न मनाने या एक भोजन को बाँटने का अवसर होगा, पर सेहत, परिवार और मित्रों की सुख, शांति के बारें में पुछना यकीनी जरूर बनाएं।

तीन माह की योजना

उसकी बाइबल में, परमेश्वर कहता है, "जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन् कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा।"

परमेश्वर योजनाएँ बनाता है, और वह हमसे भी योजनाएँ बनाने की अपेक्षा करता है।

तीन महीने की योजना एक ऐसा साधन है जिसका उपयोग करके आप अपना ध्यान और प्रयास केन्द्रित कर सकते हैं तथा उन्हें शिष्य बनाने की परमेश्वर की प्राथमिकताओं के साथ संरेखित रख सकते हैं जो बढ़ते हैं।

अगली स्लाइड में आपको बताया जाएगा कि आप अपनी तीन महीने की योजना कैसे बना सकते हैं। हम ऑनलाइन टूल का उपयोग करने की सलाह देते हैं।

गतिविधि

(30 min)

Three Month Plan

QR कोड को स्कैन करें।

पढ़ें - आपको हर आइटम के लिए प्रतिबद्ध होने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि वे आपकी योजना के लिए संकेत के रूप में हैं। (5 मिनट)

सुनें - जितना संभव हो उतना शांत रहने के लिए समय निकालें और सुनें कि परमेश्वर क्या प्रकट करना चाहता है। (10 मिनट)

अपनी योजना रिकॉर्ड करें - कागज़ के एक टुकड़े पर प्रतिबद्धताएँ लिखें या आपके उत्तरों को सहेजने के लिए ऑनलाइन टूल का उपयोग करें। (15 मिनट)

चर्चा करें

(10 min)

  1. आपकी तीन माह की योजनाओं को एक-दूसरे के साथ बारी-बारी से साझा करें।
  2. एक प्रशिक्षण साथी खोजें जो साप्ताहिक तौर पर आपको संपर्क करने के लिए तैयार हो। उनके लिए भी ऐसा ही करने के लिए प्रतिबद्ध हो जाएँ।

अवलोकन

(1 min)

इस सत्र में सुनी गई अवधारणा:

इस सत्र में सुने गए उपकरण:

  • नेटवर्क में लीडरशिप (नेतृत्व)
  • सहकर्मी सलाह समूह
  • तीन माह की योजना

गतिविधि

(0 min)

समुदाय में शामिल हो जाएँ

Zúme प्रशिक्षण भाग समाप्त हो रहा है, लेकिन उपकरणों और अवधारणाओं का अभ्यास जारी है।

इसे अकेले न पूरा करें। प्रोत्साहन और विकास के लिए एक समुदाय खोजें।

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